पीएम नरेंद्र मोदी की सचिवों के साथ बैठक, AI-डेटा से लेकर रक्षा और समुद्री क्षेत्र पर बड़ा फोकस

पीएम नरेंद्र मोदी की सचिवों के साथ बैठक, AI-डेटा से लेकर रक्षा और समुद्री क्षेत्र पर बड़ा फोकस

 

पीएम नरेंद्र  मोदी ने सचिवों के साथ उच्चस्तरीय बैठक में भविष्य की तैयारी, AI, डेटा, रक्षा उद्योग, समुद्री क्षेत्र और विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को केंद्र सरकार के सचिवों के साथ तीसरी उच्चस्तरीय बैठक की। प्रधानमंत्री आवास, 7 लोक कल्याण मार्ग पर आयोजित इस बैठक में इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी, सुरक्षा, विदेश नीति, शासन व्यवस्था तथा तकनीक से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। बैठक का मुख्य फोकस केवल वर्तमान समस्याओं का समाधान करने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आने वाले वर्षों में देश की जरूरतों और संभावित चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक रणनीति तैयार करने पर रहा। प्रधानमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि उन्हें रोजमर्रा की चुनौतियों, आंकड़ों और तत्काल समस्याओं से आगे बढ़कर भविष्य के भारत की आवश्यकताओं के बारे में सोचना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से ऐसी नीतियां और व्यवस्थाएं विकसित करने का आह्वान किया, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए मजबूत आधार तैयार कर सकें।

सरकारी विभागों के बीच साइलो खत्म करने पर जोर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मोदी ने सरकारी कामकाज में विभागों के बीच मौजूद ‘साइलो’ की समस्या को गंभीरता से उठाया। उन्होंने कहा कि साइलो केवल प्रशासनिक या संगठनात्मक समस्या नहीं है, बल्कि यह सोच से जुड़ी चुनौती भी है। अलग-अलग मंत्रालय और विभाग यदि केवल अपने-अपने दायरे में काम करते हैं, तो योजनाओं और संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल नहीं हो पाता। प्रधानमंत्री ने अधिकारियों से ‘पूरी सरकार एक साथ’ यानी Whole-of-Government दृष्टिकोण अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के विभिन्न हिस्सों के बीच क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर दोनों स्तरों पर बेहतर समन्वय आवश्यक है। कोविड-19 महामारी और पश्चिम एशिया संकट का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि संकट की परिस्थितियों में विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने मिलकर प्रभावी तरीके से काम किया था। इसी प्रकार का समन्वय सामान्य परिस्थितियों में भी प्रशासन का हिस्सा बनना चाहिए।

डेटा को राष्ट्रीय संपत्ति के रूप में इस्तेमाल करने की तैयारी

बैठक में डेटा के बेहतर इस्तेमाल पर भी विशेष जोर दिया गया। नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री ने डेटा को देश की महत्वपूर्ण राष्ट्रीय संपत्ति और भविष्य के लिए एक रणनीतिक संसाधन बताया। सरकार विभिन्न योजनाओं और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के माध्यम से बड़ी मात्रा में डेटा एकत्र करती है और उसके सुरक्षित रखरखाव तथा प्रबंधन पर पर्याप्त संसाधन खर्च करती है। हालांकि, अलग-अलग विभागों में अलग-अलग डेटा सिस्टम होने और उनके बीच पर्याप्त तालमेल न होने के कारण इस संसाधन की पूरी क्षमता का उपयोग नहीं हो पाता। प्रधानमंत्री ने ऐसी व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता बताई, जिसमें विभिन्न सरकारी विभागों के डेटा सिस्टम आपस में बेहतर तरीके से जुड़ सकें। इससे नीतियां बनाने, योजनाओं की निगरानी करने और जरूरतमंद लोगों तक सरकारी सुविधाएं पहुंचाने में अधिक प्रभावी निर्णय लिए जा सकते हैं।

AI के इस्तेमाल के साथ मानवीय समझ जरूरी

प्रधानमंत्रीनरेंद्र मोदी  मोदी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI को सरकारी कामकाज में अधिक प्रभावी ढंग से इस्तेमाल करने की जरूरत पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि AI की क्षमता को मानवीय विशेषज्ञता और अनुभव के साथ जोड़ा जाना चाहिए। तकनीक प्रशासन को तेज, प्रभावी और डेटा आधारित बना सकती है, लेकिन अंतिम निर्णय प्रक्रिया में मानवीय समझ और हस्तक्षेप का महत्व बना रहना चाहिए। प्रधानमंत्री ने अधिकारियों को AI के नए और रचनात्मक उपयोगों पर विचार करने के लिए प्रेरित किया। साथ ही उन्होंने सरकारी विभागों, विश्वविद्यालयों और युवाओं के बीच अधिक संवाद स्थापित करने की आवश्यकता बताई। युवाओं और अकादमिक संस्थानों से जुड़ाव के जरिए नीतिगत प्रक्रिया में नए विचार, आधुनिक तकनीकी दृष्टिकोण और पारंपरिक सोच से अलग समाधान शामिल किए जा सकते हैं।

रक्षा उद्योग को वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाने की दिशा

बैठक में भारत के रक्षा उद्योग और रक्षा क्षेत्र में मानव संसाधन विकास पर भी चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने रक्षा उद्योग को अधिक मजबूत और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की जरूरत बताई। उन्होंने रक्षा क्षेत्र की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप नए और आधुनिक पाठ्यक्रम विकसित करने तथा कुशल मानव संसाधन तैयार करने पर जोर दिया। तेजी से बदलती सैन्य तकनीक के दौर में भारत के लिए स्वदेशी क्षमता विकसित करना और आधुनिक कौशल वाले विशेषज्ञ तैयार करना महत्वपूर्ण है। इससे रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के साथ-साथ भारत को वैश्विक रक्षा बाजार में अधिक प्रभावी भूमिका निभाने में मदद मिल सकती है।

समुद्री क्षेत्र और जहाज निर्माण पर मिशन मोड में काम

प्रधानमंत्री ने भारत के समुद्री क्षेत्र को मजबूत करने के लिए व्यापक रणनीति की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने जहाज निर्माण क्षेत्र की संभावनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि जहाज निर्माण को पहले ही इंफ्रास्ट्रक्चर का दर्जा दिया जा चुका है। अब अधिकारियों को यह समीक्षा करनी चाहिए कि इससे जुड़े निर्धारित लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में अपेक्षित प्रगति हो रही है या नहीं। उन्होंने इस क्षेत्र को मिशन मोड में आगे बढ़ाने की आवश्यकता बताई। भारत के लिए समुद्री क्षेत्र आर्थिक, व्यापारिक और रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। ऐसे में जहाज निर्माण, बंदरगाहों और समुद्री कनेक्टिविटी को मजबूत करना देश की दीर्घकालिक आर्थिक और रणनीतिक क्षमता को बढ़ा सकता है।

अधिकारियों के बीच टीम भावना और बेहतर नेटवर्क

प्रधानमंत्री ने प्रशासनिक व्यवस्था में टीम स्पिरिट और आपसी संवाद को मजबूत करने पर भी जोर दिया। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों से जूनियर अधिकारियों के साथ अधिक व्यक्तिगत और अनौपचारिक संवाद करने की अपील की। अलग-अलग कैडर और विभागों के अधिकारियों के बीच मजबूत नेटवर्क विकसित होने से सरकार के विभिन्न हिस्सों के बीच समन्वय बेहतर हो सकता है। बैठक में सचिवों ने अपने-अपने विभागों की प्राथमिकताओं, नई चुनौतियों और योजनाओं के क्रियान्वयन से जुड़ी समस्याओं पर भी अनुभव साझा किए। पूरी बैठक का व्यापक संदेश यही रहा कि भारत को भविष्य की चुनौतियों के लिए आज से तैयारी करनी होगी। इसके लिए तकनीक, डेटा, AI, रक्षा, समुद्री क्षमता और बेहतर प्रशासन के साथ-साथ विभागों के बीच सहयोग और मानवीय नेतृत्व को भी मजबूत करना आवश्यक है।

 

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