पीएम मोदी ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से मुलाकात में पश्चिम एशिया में स्थायी शांति, सुरक्षित नौवहन और होरमुज जलडमरूमध्य में व्यापार की सुरक्षा पर जोर दिया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को नई दिल्ली में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से मुलाकात के दौरान पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और बढ़ती अनिश्चितता के बीच स्थायी शांति एवं स्थिरता सुनिश्चित करने की जरूरत पर जोर दिया। 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले हुई इस द्विपक्षीय बैठक में दोनों नेताओं ने भारत-ईरान संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। इसके साथ ही पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात, रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होरमुज जलडमरूमध्य में पैदा हुई चुनौतियों और क्षेत्र में व्यापार एवं नौवहन पर पड़ रहे प्रभावों को लेकर भी विचारों का आदान-प्रदान किया गया। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया कि सभी मुद्दों का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए होना चाहिए।
पश्चिम एशिया में शांति और सुरक्षित नौवहन पर जोर
प्रधानमंत्री मोदी ने बैठक के दौरान कहा कि क्षेत्र में लंबे समय तक शांति और स्थिरता के लिए लगातार प्रयास किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने स्वतंत्र नौवहन और वाणिज्य की सुरक्षा के साथ-साथ समुद्री मार्गों पर काम करने वाले नाविकों की सुरक्षा और उनके कल्याण को भी महत्वपूर्ण बताया। पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण वैश्विक स्तर पर व्यापार और आपूर्ति श्रृंखलाओं को लेकर चिंता बढ़ी है। ऐसे में समुद्री मार्गों की सुरक्षा भारत सहित दुनिया की कई अर्थव्यवस्थाओं के लिए महत्वपूर्ण है। होरमुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा व्यापार के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मार्ग है, इसलिए यहां किसी भी तरह का व्यवधान अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित कर सकता है।
भारत ने दोहराया बातचीत और कूटनीति का रुख
विदेश मंत्रालय के अनुसार, पीएम मोदी ने भारत के उस निरंतर रुख को दोहराया कि क्षेत्रीय विवादों और समस्याओं का समाधान संवाद एवं कूटनीति के माध्यम से किया जाना चाहिए। भारत पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच सभी पक्षों से संयम बरतने और बातचीत का रास्ता अपनाने की अपील करता रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में क्षेत्रीय शांति केवल पश्चिम एशिया के देशों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की आर्थिक स्थिरता के लिए जरूरी है। ऊर्जा, व्यापार और समुद्री परिवहन से जुड़े वैश्विक हितों को देखते हुए स्थिर और सुरक्षित क्षेत्र का महत्व और बढ़ जाता है।
मोदी और पेजेशकियन की हालिया दूसरी मुलाकात
शुक्रवार को हुई मुलाकात प्रधानमंत्री मोदी और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन की हाल के समय में दूसरी बैठक थी। इससे पहले दोनों नेताओं की मुलाकात 31 अगस्त को बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन यानी एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान हुई थी। नई दिल्ली में हुई बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद ब्रिक्स से संबंधित बैठकों में ईरान की नियमित और उच्चस्तरीय भागीदारी के लिए राष्ट्रपति पेजेशकियन का आभार जताया। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स वैश्विक दक्षिण के देशों के बीच लचीलापन, नवाचार, सहयोग और सतत विकास की भावना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
ब्रिक्स बिजनेस फोरम में भी शामिल हुए पेजेशकियन
ईरानी राष्ट्रपति ने शुक्रवार को ब्रिक्स बिजनेस फोरम के लीडर्स सेशन को भी संबोधित किया। अपने संबोधन में उन्होंने ब्रिक्स देशों के बीच आर्थिक सहयोग को और मजबूत करने की आवश्यकता बताई। पेजेशकियन ने कहा कि ब्रिक्स की वास्तविक ताकत केवल उसके सदस्य देशों की अर्थव्यवस्थाओं के आकार में नहीं है, बल्कि इस क्षमता को व्यापार, निवेश और संयुक्त वित्तपोषण के नेटवर्क में बदलने में है। उन्होंने संभावनाओं पर आधारित सहयोग से आगे बढ़कर व्यावहारिक और परिचालन स्तर के सहयोग की जरूरत पर जोर दिया।
वैश्विक आर्थिक चुनौतियों का किया जिक्र
ईरानी राष्ट्रपति ने मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए भू-राजनीतिक अनिश्चितता, आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान और आर्थिक साधनों के जरिए राजनीतिक दबाव बढ़ने की बात कही। उनके अनुसार, ऐसे माहौल में ब्रिक्स देशों के बीच आर्थिक और वित्तीय सहयोग को मजबूत करना जरूरी है। भारत भी अपनी ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान विकास, स्थिरता, नवाचार और सहयोग को प्राथमिकता दे रहा है।
भारत-ईरान संबंधों को आगे बढ़ाने पर चर्चा
बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने बहुपक्षीय संगठनों में भारत और ईरान के बीच जारी सहयोग की भी सराहना की। दोनों देश ब्रिक्स के साथ-साथ अन्य बहुपक्षीय मंचों पर कई मुद्दों पर सहयोग करते हैं। इससे पहले बिश्केक में हुई बैठक के दौरान भी पीएम मोदी ने ईरान के साथ व्यापारिक चैनलों को विस्तार देने और उन्हें अधिक विविध बनाने की भारत की प्रतिबद्धता व्यक्त की थी। ईरानी राष्ट्रपति ने भी भारत और ईरान के लंबे समय से चले आ रहे संबंधों तथा साझा हित वाले क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं को रेखांकित किया था।
12-13 सितंबर को नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन
भारत 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता का विषय “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” रखा गया है। इसके तहत विकास, स्थिरता और नवाचार को प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल किया गया है। ब्रिक्स अब 11 देशों का समूह है, जिसमें ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। वैश्विक आर्थिक विभाजन, तकनीकी बदलाव, भू-राजनीतिक तनाव, जलवायु परिवर्तन और संसाधनों पर बढ़ते दबाव के बीच ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग को और मजबूत करने की कोशिश की जा रही है। ऐसे समय में पीएम मोदी और ईरानी राष्ट्रपति की मुलाकात को पश्चिम एशिया की शांति, सुरक्षित समुद्री व्यापार और भारत-ईरान आर्थिक सहयोग के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।