लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अखिलेश यादव को अपना दोस्त बताया और विपक्ष को महिला आरक्षण बिल पर सलाह दी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार (16 अप्रैल 2026) को लोकसभा में जनगणना बिल और महिला आरक्षण बिल पर चर्चा करते हुए एक अलग ही दृष्टिकोण दिखाया। सदन में भाषण देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी जातिगत पहचान पर भी चर्चा की और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव को अपना ‘मित्र’ बताते हुए विपक्ष को राजनीति से दूर रहने की सलाह दी।
प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्षी नेताओं द्वारा उनकी जाति पर उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए कहा,
“अखिलेश जी मेरे दोस्त हैं, कभी-कभी मदद करते हैं।” सही है कि मैं बहुत पिछड़े समाज से आता हूँ। मेरे दोस्त अखिलेश जी कभी-कभी (अपनी बातों से मेरी) मदद करते हैं। मैं बहुत पिछड़े समाज से आता हूँ, लेकिन संविधान ने मुझे सभी को एकजुट करने का रास्ता दिखाया है।”
प्रधानमंत्री मोदी का यह बयान अखिलेश यादव के पुराने आरोप का जवाब है, जिसमें उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री केवल चुनावी लाभ के लिए खुद को पिछड़ा बताते हैं।
विपक्ष को महिला आरक्षण पर ‘नुकसान’ की चेतावनी
प्रधानमंत्री ने महिला आरक्षण बिल पर हो रही राजनीति और देरी पर कड़ा रुख अपनाया। उनका कहना था कि महिला शक्ति किसी दल की ‘नीयत’ को बारीकी से देखती है।
- विरोधी प्रभाव: PM ने कहा कि महिलाओं के इस अधिकार का विरोध करने वाली हर पार्टी ने इतिहास में महिलाओं को कभी क्षमा नहीं की है।
- 2029 तक प्राप्त लक्ष्य: PM ने कहा कि चर्चा 2023 में हुई थी, लेकिन 2024 में लागू करना संभव नहीं था। लेकिन 2029 में यह अद्भुत अवसर है, और अब इसे टालना नहीं चाहिए।
पीएम मोदी ने सभी दलों से अपील की कि वे इस बिल को ‘राजनीतिक रंग’ न दें, कहते हुए, “यश किसी एक का नहीं, पूरे लोकतंत्र का होगा।”
उनका कहना था:
- सामूहिक बल: यदि सभी दल एकजुट होते हैं, तो भारत के लोकतंत्र की जीत होगी, न कि किसी एक नेता या ‘मोदी’ की।