“प्रधानमंत्री मोदी ने ₹23,437 करोड़ की रेल परियोजनाओं को मंजूरी देने के कैबिनेट के फैसले की सराहना की। यूपी, एमपी, राजस्थान सहित 6 राज्यों में 901 KM नई रेल लाइनें बिछेंगी, जिससे कनेक्टिविटी और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा मंजूर की गई हालिया रेल परियोजनाओं की सराहना करते हुए इन्हें भारत के “मजबूत बुनियादी ढांचे” और “तेजी से बढ़ती आर्थिक प्रगति” का प्रतीक बताया है। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) ने मंगलवार को रेल मंत्रालय की तीन प्रमुख परियोजनाओं को हरी झंडी दी, जिनकी अनुमानित लागत ₹23,437 करोड़ है। ये परियोजनाएं देश के छह राज्यों—मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के 19 जिलों को कवर करेंगी। पीएम मोदी ने ‘X’ पर एक पोस्ट में कहा कि ये योजनाएं न केवल कनेक्टिविटी बढ़ाएंगी बल्कि देश के प्रमुख पर्यटन स्थलों तक पहुंच को भी सुगम बनाएंगी।
तीन महत्वपूर्ण कॉरिडोर और मल्टी-ट्रैकिंग का विस्तार
मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत इन तीन परियोजनाओं में नागदा-मथुरा तीसरी और चौथी लाइन, गुंटकल-वाडी तीसरी और चौथी लाइन और बुढ़वल-सीतापुर तीसरी और चौथी लाइन शामिल हैं। इन परियोजनाओं के माध्यम से मौजूदा रेल नेटवर्क में लगभग 901 किलोमीटर का विस्तार होगा। ‘मल्टी-ट्रैकिंग’ के इन प्रस्तावों का मुख्य उद्देश्य रेल संचालन को सुव्यवस्थित करना और भीड़भाड़ वाले मार्गों पर दबाव कम करना है। बढ़ी हुई लाइन क्षमता से भारतीय रेलवे की परिचालन दक्षता और सेवा विश्वसनीयता में सुधार होगा, जिससे यात्री और मालगाड़ियों दोनों की गति और समयबद्धता बढ़ेगी।
“प्रधानमंत्री मोदी: -गति शक्ति और लॉजिस्टिक्स दक्षता पर जोर
ये परियोजनाएं प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत तैयार की गई हैं। इसका मुख्य फोकस एकीकृत योजना और हितधारकों के परामर्श के माध्यम से मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स दक्षता को बढ़ाना है। इन परियोजनाओं से लोगों, वस्तुओं और सेवाओं की आवाजाही के लिए निर्बाध कनेक्टिविटी सुनिश्चित होगी। सरकार का विजन इन क्षेत्रों के लोगों को ‘आत्मनिर्भर’ बनाना है, क्योंकि बुनियादी ढांचे के इस विकास से क्षेत्र में रोजगार और स्वरोजगार के व्यापक अवसर पैदा होंगे। आंकड़ों के अनुसार, यह विस्तार लगभग 4,161 गांवों को सीधा जोड़ेगा, जिनकी कुल आबादी लगभग 83 लाख है।
पर्यटन और धार्मिक स्थलों तक सुगम पहुंच
रेल नेटवर्क के इस सुदृढ़ीकरण से देश के कई प्रमुख पर्यटन और धार्मिक स्थलों तक पहुंचना आसान हो जाएगा। इनमें उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर, राजस्थान का रणथंभौर और केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान, मध्य प्रदेश का कूनो नेशनल पार्क, उत्तर प्रदेश के मथुरा, वृंदावन और नैमिषारण्य, तथा दक्षिण भारत के मंत्रालयम और श्री नेट्टिकांती अंजनेय स्वामी मंदिर जैसे महत्वपूर्ण स्थल शामिल हैं। इससे न केवल घरेलू पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई ऊर्जा मिलेगी।
आर्थिक लाभ और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कदम
ये रेल मार्ग कोयला, खाद्यान्न, सीमेंट, पेट्रोलियम (POL), लोहा और इस्पात, उर्वरक तथा कंटेनरों जैसे आवश्यक सामानों के परिवहन के लिए महत्वपूर्ण हैं। क्षमता विस्तार से सालाना 60 मिलियन टन (MTPA) अतिरिक्त माल ढुलाई का मार्ग प्रशस्त होगा। रेलवे पर्यावरण के अनुकूल और ऊर्जा-कुशल परिवहन का माध्यम है, इसलिए ये परियोजनाएं जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करेंगी। अनुमान है कि इनसे देश की लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी, तेल आयात में 37 करोड़ लीटर की कमी आएगी और 185 करोड़ किलोग्राम कार्बन उत्सर्जन कम होगा। यह प्रभाव लगभग 7 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर है, जो प्रधानमंत्री के सतत विकास के विजन को मजबूती प्रदान करता है।
इसके अलावा, यह परियोजना ‘मेक इन इंडिया’ और क्षेत्रीय विकास को एक नई दिशा प्रदान करेगी। नई रेल लाइनों के बिछाने और बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण से स्थानीय स्तर पर निर्माण सामग्री की मांग बढ़ेगी, जिससे छोटे और मध्यम उद्योगों (MSMEs) को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, इन रेल खंडों के विस्तार से न केवल औद्योगिक गलियारों (Industrial Corridors) को मजबूती मिलेगी, बल्कि सुदूर क्षेत्रों के किसानों को अपनी उपज बड़े बाजारों तक कम समय और कम खर्च में पहुँचाने की सुविधा प्राप्त होगी। इस प्रकार, यह पहल न केवल एक परिवहन नेटवर्क का विस्तार है, बल्कि यह आर्थिक विषमता को दूर करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मुख्यधारा से जोड़ने का एक प्रभावी माध्यम भी सिद्ध होगी।