प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वादा: छठ महापर्व होगा यूनेस्को की सांस्कृतिक धरोहर सूची में शामिल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वादा: छठ महापर्व होगा यूनेस्को की सांस्कृतिक धरोहर सूची में शामिल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छठ महापर्व को यूनेस्को की सांस्कृतिक धरोहर सूची में शामिल कराने का वादा किया है। बिहार सरकार भी प्रक्रिया शुरू कर चुकी है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में छठ महापर्व को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर सूची में शामिल कराने का बड़ा वादा किया। उन्होंने कहा कि छठ महापर्व सिर्फ भारत के विभिन्न हिस्सों में ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई कोनों में भी मनाया जाता है और यह एक वैश्विक त्योहार बनता जा रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संदेश: छठ महापर्व को मिलेगी वैश्विक पहचान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “हमारे पर्व और त्योहार भारत की संस्कृति को जीवंत बनाए रखते हैं। छठ पूजा एक पवित्र त्योहार है, जिसमें डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। यह त्योहार दिवाली के बाद मनाया जाता है और इसका अपना एक विशेष महत्व है।”

उन्होंने यह भी बताया कि सरकार इस त्योहार को यूनेस्को की सांस्कृतिक धरोहर सूची में शामिल कराने के लिए सक्रिय रूप से प्रयासरत है, ताकि दुनिया भर में लोग छठ महापर्व की भव्यता और आध्यात्मिकता को महसूस कर सकें।

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यूनेस्को सूची में शामिल होने की प्रक्रिया शुरू

प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी साझा किया कि इससे पहले भारत के कोलकाता की दुर्गा पूजा को भी यूनेस्को की सांस्कृतिक धरोहर सूची में शामिल कराया गया था, जो भारतीय त्योहारों को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि थी।

बिहार सरकार ने भी छठ महापर्व को यूनेस्को की सूची में शामिल कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। ‘इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज’ (इंटैक) के बिहार प्रमुख भैरव लाल दास ने बताया कि छठ से संबंधित दस्तावेज तैयार करने की जिम्मेदारी इंटैक को सौंपी गई है।

राजनीतिक प्रतिक्रिया और सामाजिक महत्व

भाजपा बिहार इकाई के अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने प्रधानमंत्री के इस वादे को बिहारवासियों के लिए गर्व का क्षण बताया और विश्वास जताया कि दुर्गा पूजा की तरह छठ महापर्व को भी जल्द यूनेस्को की सांस्कृतिक धरोहर सूची में शामिल किया जाएगा।

छठ महापर्व: भारतीय संस्कृति का अमूल्य हिस्सा

छठ महापर्व दिवाली के छह दिन बाद मनाया जाता है, जिसमें व्रती अस्ताचलगामी और उदयमान सूर्य को अर्घ्य देते हैं। यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक एकता को भी मजबूत करता है।

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