पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी: मल्लिकार्जुन खड़गे ने मोदी सरकार पर साधा निशाना

पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी: मल्लिकार्जुन खड़गे ने मोदी सरकार पर साधा निशाना

 

पेट्रोल-डीजल की कीमतों में फिर हुई बढ़ोतरी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इसे ‘दैनिक लूट’ करार दिया। जानिए ईंधन के नए दाम और विपक्ष के आरोप।

 

देश में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोमवार को ईंधन की कीमतों में हुई ताजा वृद्धि पर कड़ा प्रहार करते हुए इसे “दैनिक लूट” करार दिया और सवाल किया कि इस लूट से आखिर किसे फायदा हो रहा है।

ईंधन की कीमतों में लगातार चौथा इजाफा

सोमवार को पेट्रोल की कीमतों में 2.61 रुपये और डीजल में 2.71 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई। पिछले 10 दिनों में यह चौथी बार है जब ईंधन के दाम बढ़ाए गए हैं। इस ताजा वृद्धि के बाद, दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया है। 15 मई से शुरू हुए इस मूल्य संशोधन के बाद से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगभग 7.50 रुपये प्रति लीटर की कुल वृद्धि हो चुकी है।

कांग्रेस का गंभीर आरोप

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर अपनी पोस्ट में खड़गे ने आरोप लगाया कि “दैनिक ईंधन लूट” का सिलसिला थम नहीं रहा है। उन्होंने कहा, “मोदी सरकार ने आम लोगों की बचत को जलाने के लिए पेट्रोल का छिड़काव किया है।” खड़गे ने तुलना करते हुए कहा कि 2004 से 2014 के बीच यूपीए सरकार के दौरान अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में 175 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई थी, जबकि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वैसी स्थिति नहीं है, फिर भी घरेलू बाजार में दाम लगातार बढ़ाए जा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि पिछले 12 वर्षों में सरकार ने 43 लाख करोड़ रुपये की “लूट” की है।

मुनाफे को प्राथमिकता देने का आरोप

कांग्रेस अध्यक्ष ने दावा किया कि ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा फायदा तेल विपणन कंपनियों (HPCL, BPCL और IOC) को हो रहा है, जिसके चलते इन कंपनियों के शेयरों में भी तेजी देखी गई है। उन्होंने इसे भाजपा का “डीएनए” बताते हुए कहा कि सरकार लोगों के हितों के बजाय मुनाफे को प्राथमिकता दे रही है। खड़गे ने चेतावनी दी कि ईंधन की बढ़ती कीमतें न केवल घरेलू बजट को बिगाड़ रही हैं, बल्कि किसान और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSMEs) सहित अर्थव्यवस्था के हर वर्ग पर इसका बुरा असर पड़ रहा है।

क्यों बढ़ रहे हैं दाम?

उद्योग जगत के सूत्रों के अनुसार, तेल कंपनियों द्वारा यह वृद्धि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, रिफाइनिंग मार्जिन के दबाव और रुपये की कमजोरी के कारण की जा रही है। फरवरी के अंत से वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में 50 प्रतिशत से अधिक का उछाल आया है, जिसका मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान है। सरकारी तेल कंपनियों का कहना है कि वे इन बढ़ते इनपुट कॉस्ट का बोझ उपभोक्ताओं पर डालने के लिए मजबूर हैं।

वहीं, विपक्ष ने आरोप लगाया है कि सरकार ने राज्यों के चुनाव खत्म होने तक कीमतों में वृद्धि को जानबूझकर रोक कर रखा था। पेट्रोल और डीजल की ये नई कीमतें अब देश के अलग-अलग शहरों में स्थानीय करों के अनुसार लागू हो गई हैं।

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