235: 5 दिसंबर 2025 से पौष माह की शुरुआत हो रही है, जो 3 जनवरी 2026 की पूर्णिमा तक चलेगा। यह माह धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि इस दौरान नियमों और धार्मिक परंपराओं का पालन करने से जीवन में सुख, समृद्धि और सकारात्मक बदलाव आते हैं। विशेष रूप से यह समय व्यक्तिगत और पारिवारिक जीवन में शांति लाने का अवसर प्रदान करता है।
हालांकि, इस माह में कुछ कार्यों से बचना चाहिए, क्योंकि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इनका पालन न करने पर अशुभ परिणाम सामने आ सकते हैं। पौष महीने में सावधानी और जागरूकता जीवन में नकारात्मक प्रभावों से बचाने और सौभाग्य बढ़ाने में मदद करती है।
पौष माह में बचें इन 5 कार्यों से
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विवाह, मुंडन या धार्मिक अनुष्ठान – इस माह में किसी भी प्रकार के विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश या अन्य धार्मिक अनुष्ठान करना अशुभ माना जाता है।
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नए व्यवसाय या बड़े प्रोजेक्ट की शुरुआत – इस समय निवेश या नए काम की शुरुआत आर्थिक नुकसान या कठिनाइयों का कारण बन सकती है।
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तेल की मालिश – धार्मिक मान्यता के अनुसार पौष माह में तेल की मालिश स्वास्थ्य और ऊर्जा पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है।
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अनियंत्रित क्रोध और कठोर वाणी – संयम और सौम्य व्यवहार बनाए रखना जरूरी है, अन्यथा रिश्तों में तनाव और नकारात्मक ऊर्जा बढ़ सकती है।
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अनियमित दिनचर्या और अधूरी पूजा-अर्चना – पौष माह में नियमों का पालन और धार्मिक कृत्यों को नियमित करना शुभ माना जाता है।
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पौष माह में करें ये शुभ कार्य
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सूर्य देव की पूजा और अर्घ्य – प्रतिदिन सूर्य देव को जल अर्पित करने और वैदिक मंत्रों का जाप करने से स्वास्थ्य, आत्मविश्वास और जीवन में सकारात्मक बदलाव आता है।
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तिल का दान – तिल का दान आर्थिक स्थिरता और मानसिक संतुलन के लिए अत्यंत लाभकारी है।
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शुभ आहार का सेवन – गुड़, अदरक, लहसुन और तिल का सेवन ऊर्जा और सौभाग्य बढ़ाने में मदद करता है।
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नए अनाज का भोग – नए अनाज का सेवन करने से पहले देवी-देवताओं को भोग अर्पित करना आवश्यक है।
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भक्ति और संयम – भगवान की भक्ति, संयमित रहना और क्रोध से दूर रहना जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाता है।
पौष माह तिथि और धार्मिक महत्व
द्रिंग पंचांग के अनुसार, पौष माह 2025 की शुरुआत 5 दिसंबर, शुक्रवार से हो रही है और यह 3 जनवरी 2026, शनिवार तक चलेगा। इसे पितरों के तर्पण और धार्मिक कर्मकांड के लिए अत्यंत शुभ समय माना जाता है। इस दौरान भगवान विष्णु और सूर्य देव की उपासना से जीवन में धन-धान्य की वृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।
सूर्य देव के मंत्र
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ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय नमः
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ॐ घृणिं सूर्य्य: आदित्य
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ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय सहस्रकिरणराय मनोवांछित फलम् देहि देहि स्वाहा
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ॐ ऐहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजो राशे जगत्पते, अनुकंपयेमां भक्त्या, गृहाणार्घय दिवाकर