पेपर लीक मामलों पर केंद्र सरकार सख्त, ED ने कई राज्यों में ECIR दर्ज कर मनी ट्रेल और अपराध से अर्जित आय की जांच शुरू की। जानें पूरा मामला।
देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और कथित धांधली के मामलों को लेकर छात्रों और अभिभावकों में लगातार नाराजगी बढ़ रही है। मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG से लेकर अलग-अलग राज्यों की भर्ती परीक्षाओं तक पेपर लीक के आरोप सामने आने के बाद परीक्षा व्यवस्था और उसकी पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के बाद अब झारखंड की राजधानी रांची में भी JPSC भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का विरोध जारी है। इसी बीच केंद्र सरकार ने पेपर लीक मामलों में आर्थिक पहलुओं की जांच को लेकर बड़ा कदम उठाया है। अब ऐसे मामलों में प्रवर्तन निदेशालय यानी ED की भूमिका भी सामने आई है।
कई राज्यों में पेपर लीक मामलों पर ED की नजर
पेपर लीक के मामलों को लेकर केंद्र सरकार का रुख सख्त होता दिखाई दे रहा है। जानकारी के मुताबिक, ED ने पेपर लीक और परीक्षा में कथित धांधली से जुड़े मामलों में कई राज्यों में ECIR यानी Enforcement Case Information Report दर्ज की है। बताया जा रहा है कि राजस्थान, हरियाणा, असम के गुवाहाटी, बिहार के पटना, कर्नाटक के बेंगलुरु, महाराष्ट्र और झारखंड में दर्ज मामलों को लेकर ED ने जांच शुरू की है।
इन मामलों में स्थानीय एजेंसियों द्वारा दर्ज FIR के आधार पर ED आर्थिक पहलुओं की जांच कर रही है। जांच का मुख्य फोकस यह पता लगाना होगा कि पेपर लीक या परीक्षा में अनियमितता के पीछे किसी तरह का संगठित आर्थिक नेटवर्क तो काम नहीं कर रहा था। एजेंसी पेपर लीक से जुड़े पैसों के लेन-देन और उससे जुड़े लोगों की भूमिका की भी पड़ताल कर सकती है।
मनी ट्रेल की जांच करेगी प्रवर्तन निदेशालय
पेपर लीक को आमतौर पर सिर्फ परीक्षा व्यवस्था में गड़बड़ी के तौर पर देखा जाता है, लेकिन जब इसके पीछे पैसे के लेन-देन, अवैध कमाई या संगठित नेटवर्क की आशंका होती है तो मामला आर्थिक अपराध के दायरे में भी आ सकता है। इसी पहलू को ध्यान में रखते हुए ED अब ऐसे मामलों में अपराध से अर्जित आय यानी Proceeds of Crime और Money Trail की जांच करेगी।
जांच के दौरान यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि पेपर लीक के बदले किसी अभ्यर्थी या अन्य व्यक्ति से पैसे लिए गए थे या नहीं। इसके अलावा रकम किन खातों में पहुंची, किन लोगों के बीच उसका लेन-देन हुआ और क्या इस पूरी प्रक्रिया में कोई संगठित गिरोह शामिल था, इसकी भी पड़ताल की जा सकती है।
सरकार की ओर से कथित तौर पर यह स्पष्ट संदेश दिया गया है कि पेपर लीक को किसी एक राज्य का स्थानीय मामला मानकर सीमित नहीं रखा जाएगा। जिस भी राज्य में परीक्षा से संबंधित गंभीर अनियमितता और आर्थिक अपराध के संकेत मिलेंगे, वहां एजेंसियां आर्थिक नेटवर्क की जांच कर सकती हैं।
JPSC मामले में भी ED की एंट्री
झारखंड में JPSC परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का प्रदर्शन जारी है। इसी मामले में राज्य की CID द्वारा दर्ज FIR के आधार पर ED ने ECIR दर्ज कर जांच शुरू की है। अब जांच का दायरा केवल परीक्षा में हुई कथित गड़बड़ी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे जुड़े वित्तीय लेन-देन और संभावित मनी ट्रेल की भी जांच की जाएगी।
JPSC मामले में ED की एंट्री ऐसे समय हुई है, जब देश के अलग-अलग हिस्सों में प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता को लेकर छात्रों के बीच चिंता बढ़ी हुई है। अभ्यर्थियों की सबसे बड़ी मांग यही है कि परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए और यदि किसी स्तर पर पेपर लीक या धोखाधड़ी साबित होती है तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
NEET-UG मामले में भी बढ़ सकती है जांच
NEET-UG पेपर लीक विवाद ने भी देशभर में व्यापक चर्चा पैदा की थी। इस मामले में भी आर्थिक लेन-देन और पेपर लीक से जुड़े नेटवर्क की जांच को लेकर ED की संभावित भूमिका पर नजर बनी हुई है। यदि जांच में मनी लॉन्ड्रिंग या अपराध से अर्जित धन से जुड़े पहलू सामने आते हैं, तो आर्थिक जांच एजेंसी की कार्रवाई का दायरा बढ़ सकता है।
NEET जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में बड़ी संख्या में छात्र शामिल होते हैं। ऐसे में पेपर लीक या परीक्षा में किसी भी तरह की अनियमितता का असर हजारों-लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य पर पड़ सकता है। यही वजह है कि परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुरक्षा को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं।
संसद से पास हुआ एंटी पेपर लीक कानून
पेपर लीक और सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों पर रोक लगाने के लिए संसद ने हाल ही में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) से संबंधित संशोधन विधेयक, 2026 को मंजूरी दी है। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद इसके कानून बनने से परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई को और सख्त किए जाने की बात सामने आई है।
कानून के तहत पेपर लीक जैसे मामलों की जांच तय समयसीमा में पूरी करने और दोषियों के खिलाफ कड़ी सजा का प्रावधान बताया गया है। पेपर लीक या अनुचित साधनों से जुड़े अपराध में दोषी पाए जाने पर कम से कम पांच साल और अधिकतम 10 साल तक की जेल तथा 50 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। वहीं, संगठित अपराध की श्रेणी में आने वाले मामलों में सजा और जुर्माना और अधिक कठोर रखा गया है, जिसमें कम से कम सात साल की जेल और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान बताया गया है।
छात्रों को सख्त कार्रवाई की उम्मीद
लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों के बीच अब छात्रों और अभिभावकों की नजर जांच एजेंसियों की कार्रवाई पर है। ED के जरिए आर्थिक नेटवर्क और मनी ट्रेल की जांच शुरू होने से पेपर लीक के पीछे काम करने वाले कथित संगठित गिरोहों तक पहुंचने की कोशिश तेज हो सकती है। हालांकि, किसी भी मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
कुल मिलाकर, केंद्र सरकार की ओर से पेपर लीक मामलों में आर्थिक पहलू की जांच पर जोर दिए जाने से यह संकेत मिलता है कि अब परीक्षा में धांधली को केवल प्रशासनिक चूक के तौर पर नहीं देखा जाएगा। यदि पेपर लीक के पीछे संगठित आर्थिक नेटवर्क या अवैध धन का इस्तेमाल साबित होता है, तो संबंधित आरोपियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है।