पानीपत के डाहर गांव में खुलेगा नया राजकीय महिला महाविद्यालय। शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने दी जानकारी, सत्र 2026-27 से 240 सीटों पर शुरू होगी पढ़ाई।
हरियाणा के शिक्षा मंत्री श्री महिपाल ढांडा ने पानीपत के डाहर गांव में नए राजकीय महिला महाविद्यालय की स्थापना को लेकर एक बड़ी घोषणा की है। मुख्यमंत्री के विजन को आगे बढ़ाते हुए सरकार ने इस महाविद्यालय के निर्माण के लिए सैद्धांतिक मंजूरी प्रदान कर दी है। आने वाले शैक्षणिक सत्र 2026-27 से यहां छात्राओं के लिए कक्षाएं शुरू कर दी जाएंगी, जो इस क्षेत्र की शैक्षणिक बुनियादी ढांचे में एक मील का पत्थर साबित होगा।
240 सीटों पर होगा दाखिला: कला और वाणिज्य संकाय
पानीपत के डाहर गांव स्थित राजकीय महिला महाविद्यालय में शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षाएं शुरू होंगी। मुख्यमंत्री की घोषणा को अमलीजामा पहनाते हुए सरकार ने इस संबंध में सैद्धांतिक मंजूरी प्रदान कर दी है।
शिक्षा मंत्री श्री @MAHIPALDHANDA1 ने कहा कि महाविद्यालय में कला एवं वाणिज्य…
— DPR Haryana (@DiprHaryana) May 26, 2026
शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने जानकारी दी कि महाविद्यालय में कला (Arts) और वाणिज्य (Commerce) संकायों के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। यहां कुल 240 सीटों पर प्रवेश प्रक्रिया शीघ्र ही शुरू की जाएगी। ग्रामीण अंचल की छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए अब लंबी दूरी तय करने की आवश्यकता नहीं होगी। यह कदम न केवल लड़कियों की उच्च शिक्षा तक पहुंच को सुनिश्चित करेगा, बल्कि उन्हें अपने ही क्षेत्र के निकट गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित शिक्षा का अवसर भी प्रदान करेगा।
ग्रामीण छात्राओं के लिए सौगात
इस पहल के महत्व पर प्रकाश डालते हुए श्री ढांडा ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा का प्रसार सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। डाहर और आसपास के गांवों की बेटियों के लिए यह नया महाविद्यालय एक नई उम्मीद बनकर उभरेगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री का सपना है कि प्रदेश की हर बेटी शिक्षित और सशक्त हो, और यह महाविद्यालय उस दिशा में एक ठोस कदम है।
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और विकास
महाविद्यालय में आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी ताकि छात्राओं को प्रतिस्पर्धी युग के अनुकूल शिक्षा मिल सके। शिक्षा विभाग ने इस परियोजना को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए रूपरेखा तैयार कर ली है। महाविद्यालय के खुलने से न केवल शिक्षा के स्तर में सुधार होगा, बल्कि क्षेत्र में सामाजिक-आर्थिक विकास को भी गति मिलेगी। अभिभावकों ने भी सरकार के इस निर्णय का स्वागत किया है, क्योंकि इससे उनकी बेटियों की शिक्षा की चिंता दूर हो गई है।