पंडित जवाहरलाल नेहरू की 62वीं पुण्यतिथि: आधुनिक भारत के निर्माता को देश ने दी श्रद्धांजलि

पंडित जवाहरलाल नेहरू की 62वीं पुण्यतिथि: आधुनिक भारत के निर्माता को देश ने दी श्रद्धांजलि

भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की 62वीं पुण्यतिथि पर पीएम मोदी, राहुल गांधी सहित देश भर के नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। जानें उनके राष्ट्र निर्माण में योगदान के बारे में।

आधुनिक भारत के शिल्पकार: पंडित जवाहरलाल नेहरू को श्रद्धांजलि

27 मई, 2026 को भारत ने अपने पहले प्रधानमंत्री और आधुनिक भारत के मुख्य शिल्पकार पंडित जवाहरलाल नेहरू की 62वीं पुण्यतिथि मनाई। 1964 में इसी दिन, राष्ट्र ने एक ऐसे नेता को खो दिया था, जिन्होंने न केवल स्वतंत्रता संग्राम में अग्रणी भूमिका निभाई थी, बल्कि स्वतंत्र भारत की नींव को मजबूती से रखने का कार्य भी किया था। आज भी, उनके निधन के दशकों बाद, भारतीय राजनीति और समाज में उनका प्रभाव स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। उनकी पुण्यतिथि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित देश के तमाम शीर्ष नेताओं ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

राजनीतिक विमर्श और सम्मान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी श्रद्धांजलि व्यक्त करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री को नमन किया। इस अवसर पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली स्थित उनके समाधि स्थल ‘शांतिवन’ पर पहुंचकर पुष्प अर्पित किए। इस दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता के.सी. वेणुगोपाल और बी.के. हरिप्रसाद भी उपस्थित थे। कांग्रेस पार्टी ने अपने आधिकारिक हैंडल से नेहरू जी को ‘आधुनिक भारत का निर्माता’ बताते हुए याद किया। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (सपा) की सांसद सुप्रिया सुले ने भी उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि पंडित नेहरू ने ही देश की प्रगति की नींव रखी थी। वहीं, कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने बेंगलुरु में आयोजित कार्यक्रमों में भाग लिया, जो उनके प्रति राष्ट्र की निरंतर कृतज्ञता को दर्शाता है।

स्वतंत्रता संग्राम और नेतृत्व

जवाहरलाल नेहरू का जीवन केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं, बल्कि एक राष्ट्र के उदय की यात्रा है। महात्मा गांधी के साथ मिलकर उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की दिशा तय की। 1947 में जब भारत को आजादी मिली, तब देश एक अत्यंत कठिन दौर से गुजर रहा था—विभाजन की विभीषिका, लाखों शरणार्थियों का पलायन और एक बिखरे हुए ढांचे को एकजुट करने की चुनौती। ऐसे समय में नेहरू का 16 वर्षों से अधिक का कार्यकाल एक ‘राष्ट्र-निर्माण’ का युग साबित हुआ। उन्होंने लोकतंत्र को जड़ें जमाने का अवसर दिया और भारत को एक धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में स्थापित करने के लिए संस्थागत ढांचा तैयार किया।

आधुनिक भारत के स्वप्नदृष्टा

नेहरू की दूरदर्शिता का ही परिणाम था कि भारत ने विज्ञान, तकनीक और उद्योग के क्षेत्र में प्रारंभिक कदम उठाए। उन्होंने आईआईटी (IIT), आईआईएम (IIM) और परमाणु ऊर्जा आयोग जैसे संस्थानों की स्थापना की, जो आज भारत की वैश्विक पहचान का आधार बने हैं। विदेश नीति में भी नेहरू ने ‘गुटनिरपेक्ष आंदोलन’ (NAM) की अवधारणा के माध्यम से विश्व को यह संदेश दिया कि नव-स्वतंत्र राष्ट्रों को किसी भी शीतयुद्ध गुट में शामिल होने के बजाय अपनी स्वतंत्र आवाज रखनी चाहिए। उनका यह दृष्टिकोण आज भी अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के अध्ययन का एक महत्वपूर्ण विषय है।

सांस्कृतिक विरासत और ‘चाचा नेहरू’

पंडित नेहरू केवल एक राजनेता नहीं थे, बल्कि वे एक लेखक, इतिहासकार और बच्चों के प्रिय ‘चाचा नेहरू’ भी थे। उनके पत्रों और पुस्तकों, विशेष रूप से ‘डिस्कवरी ऑफ इंडिया’ में भारत की सांस्कृतिक गहराई और उसकी विविधता के प्रति उनके गहरे प्रेम की झलक मिलती है। उनका मानना था कि बच्चों में ही भारत का भविष्य सुरक्षित है, इसीलिए उनके जन्मदिन को ‘बाल दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। उनकी सादगी, बौद्धिक क्षमता और राष्ट्र के प्रति अटूट समर्पण उन्हें समकालीन नेताओं से अलग खड़ा करता है।

आज जब भारत अपनी 62वीं पुण्यतिथि पर नेहरू को याद कर रहा है, तो यह समय उनके द्वारा दिए गए लोकतांत्रिक मूल्यों पर पुनर्विचार करने का भी है। पंडित नेहरू ने जिस वैज्ञानिक दृष्टिकोण और समावेशी सोच के साथ भारत को आगे बढ़ाने का सपना देखा था, आज का भारत उसी राह पर आगे बढ़ते हुए एक वैश्विक शक्ति बनने की ओर अग्रसर है। राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर, उनका व्यक्तित्व और राष्ट्र के प्रति उनका योगदान हमेशा स्मरणीय रहेगा। एक ऐसा नेता जिसने भारत को केवल आजाद ही नहीं किया, बल्कि उसे एक आधुनिक पहचान भी दी, सदैव देश के इतिहास के पन्नों में अमर रहेंगे।

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