NSG Raising Day 2026: आज है ब्लैक कैट कमांडो का स्थापना दिवस, जानें इनकी ताकत और खासियत

NSG Raising Day 2026: आज है ब्लैक कैट कमांडो का स्थापना दिवस, जानें इनकी ताकत और खासियत

 

NSG Raising Day 2026 पर जानें ब्लैक कैट कमांडो का इतिहास, गठन का उद्देश्य, SAG और SRG की भूमिका, बम निरोधक विशेषज्ञता और देश की सुरक्षा में नेशनल सिक्योरिटी गार्ड का महत्व।

भारत की सुरक्षा व्यवस्था में नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (NSG) की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। ब्लैक कैट कमांडो के नाम से मशहूर यह विशेष बल आतंकवादी हमलों, बंधक संकट और अन्य गंभीर सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार किया गया है। 16 अक्टूबर 1985 को स्थापित NSG शुक्रवार को अपना 42वां स्थापना दिवस यानी Raising Day मना रहा है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन कार्य करने वाली इस फोर्स का आदर्श वाक्य ‘सर्वत्र सर्वोत्तम सुरक्षा’ है। NSG के जवानों को कठिन प्रशिक्षण से गुजरना पड़ता है, ताकि वे बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी सटीकता, अनुशासन और साहस के साथ अपने दायित्व निभा सकें। आतंकवाद के बदलते स्वरूप और आधुनिक सुरक्षा चुनौतियों के बीच इस बल की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण बनी हुई है। इसका मुख्य उद्देश्य विशेष अभियानों के दौरान नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और गंभीर संकटों से निपटने में संबंधित एजेंसियों की सहायता करना है।

क्यों किया गया NSG का गठन?

NSG का गठन देश में आतंकवाद और असाधारण सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए एक विशेष प्रशिक्षित बल की आवश्यकता को ध्यान में रखकर किया गया था। इसका उद्देश्य ऐसी परिस्थितियों में कार्रवाई करना है, जिनमें सामान्य सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ विशेष प्रशिक्षण, उन्नत उपकरणों और पेशेवर रणनीति की जरूरत होती है। NSG को आतंकवाद-रोधी अभियानों, बंधक बचाव, विमान अपहरण जैसी घटनाओं और विस्फोटक खतरों से निपटने के लिए तैयार किया गया है। यह बल जरूरत पड़ने पर अन्य सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर काम करता है। इसकी कार्यप्रणाली में त्वरित प्रतिक्रिया, सटीक योजना, जोखिम का आकलन और आम नागरिकों को नुकसान से बचाने पर विशेष ध्यान दिया जाता है। NSG की पहचान इसके विशेष प्रशिक्षण, ऑपरेशनल अनुशासन और कठिन परिस्थितियों में काम करने की क्षमता से जुड़ी हुई है।

NSG के दो प्रमुख ऑपरेशनल समूह

NSG की ऑपरेशनल संरचना में दो प्रमुख समूह शामिल हैं, जिन्हें स्पेशल एक्शन ग्रुप (SAG) और स्पेशल रेंजर ग्रुप (SRG) के नाम से जाना जाता है। दोनों समूहों की जिम्मेदारियां अलग-अलग हैं, लेकिन विशेष सुरक्षा अभियानों में उनकी भूमिका एक-दूसरे की पूरक होती है।

1. स्पेशल एक्शन ग्रुप (SAG)

स्पेशल एक्शन ग्रुप NSG की प्रमुख ऑपरेशनल इकाइयों में शामिल है। इसमें मुख्य रूप से भारतीय सेना से चुने गए कर्मियों को शामिल किया जाता है। इन जवानों को आतंकवाद-रोधी अभियानों, बंधक बचाव और उच्च जोखिम वाले विशेष ऑपरेशनों के लिए प्रशिक्षित किया जाता है। कठिन परिस्थितियों में तेजी से निर्णय लेना, टीम के साथ समन्वय बनाए रखना और निर्धारित उद्देश्य को सुरक्षित तरीके से पूरा करना इनके प्रशिक्षण का अहम हिस्सा है। विशेष अभियानों में SAG की भूमिका महत्वपूर्ण होती है, जहां पेशेवर दक्षता और अनुशासन की अत्यधिक आवश्यकता होती है।

2. स्पेशल रेंजर ग्रुप (SRG)

स्पेशल रेंजर ग्रुप में मुख्य रूप से केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) से प्रतिनियुक्त कर्मी शामिल होते हैं। यह समूह NSG की निर्धारित सुरक्षा और विशेष ऑपरेशनल जिम्मेदारियों में योगदान देता है। इसकी भूमिका मिशन की जरूरतों और संबंधित इकाइयों के साथ समन्वय के आधार पर तय होती है। SAG और SRG के बीच तालमेल से NSG को विभिन्न प्रकार की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में मदद मिलती है।

बम निरोधक दस्ते और नेशनल बॉम्ब डेटा सेंटर

NSG की विशेषज्ञता केवल कमांडो ऑपरेशन तक सीमित नहीं है। इसके पास बम निरोधक और काउंटर-आईईडी यानी इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस से जुड़े खतरों से निपटने की विशेष क्षमताएं भी हैं। विस्फोटक उपकरणों की पहचान करना, उनके खतरे का आकलन करना और सुरक्षित तरीके से उन्हें निष्क्रिय करने में विशेषज्ञ इकाइयों की अहम भूमिका होती है।

NSG का नेशनल बॉम्ब डेटा सेंटर (NBDC) हरियाणा के मानेसर में स्थित है। यह केंद्र बम विस्फोटों से संबंधित जानकारी एकत्र करने, घटनाओं का तकनीकी विश्लेषण करने और जांच में विशेषज्ञ सहायता प्रदान करने का काम करता है। विस्फोटक घटनाओं के पैटर्न और तकनीकी पहलुओं का अध्ययन सुरक्षा एजेंसियों को भविष्य के खतरों को बेहतर तरीके से समझने में मदद कर सकता है। इस तरह NBDC देश की विस्फोटक घटनाओं से निपटने की क्षमता मजबूत करने में योगदान देता है।

मानेसर मुख्यालय और देशभर में क्षेत्रीय हब

NSG का मुख्यालय मानेसर, हरियाणा में है। देश के विभिन्न हिस्सों में इसकी प्रतिक्रिया क्षमता को मजबूत करने के लिए क्षेत्रीय हब स्थापित किए गए हैं। मुंबई, चेन्नई, हैदराबाद, कोलकाता, गुजरात और जम्मू में NSG के क्षेत्रीय हब बताए जाते हैं। इनका उद्देश्य गंभीर सुरक्षा संकट के दौरान संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय और आवश्यक प्रतिक्रिया को बेहतर बनाना है।

इसके अलावा अयोध्या में NSG हब स्थापित करने की योजना को लेकर भी पहले खबरें सामने आई थीं। हालांकि, इसकी वर्तमान परिचालन स्थिति की पुष्टि आधिकारिक जानकारी से की जानी चाहिए। क्षेत्रीय हब का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है, क्योंकि किसी बड़े सुरक्षा संकट में समय पर प्रतिक्रिया और एजेंसियों के बीच तालमेल बेहद जरूरी होता है।

आधुनिक चुनौतियों के लिए विशेष प्रशिक्षण

आज सुरक्षा चुनौतियां पहले से अधिक जटिल हो रही हैं। आतंकवाद के नए तरीके, विस्फोटक उपकरण, ड्रोन से जुड़े जोखिम और भीड़भाड़ वाले शहरी इलाकों में संभावित खतरे सुरक्षा एजेंसियों के सामने नई चुनौतियां पेश कर रहे हैं। ऐसे में NSG के लिए आधुनिक उपकरणों, नियमित अभ्यास, तकनीकी दक्षता और बेहतर संचार व्यवस्था का महत्व बढ़ गया है।

NSG की ऑपरेशनल तैयारी में चिकित्सा सहायता, इंजीनियरिंग, संचार और लॉजिस्टिक्स जैसी सहायक व्यवस्थाएं भी अहम भूमिका निभाती हैं। किसी विशेष अभियान की सफलता केवल कमांडो की कार्रवाई पर निर्भर नहीं करती, बल्कि उसके पीछे मौजूद योजना, संसाधनों और विभिन्न टीमों के समन्वय का भी बड़ा योगदान होता है।

देश की सुरक्षा में NSG का महत्व

NSG का 42वां स्थापना दिवस उन जवानों के समर्पण, अनुशासन और पेशेवर क्षमता को रेखांकित करता है, जो देश को गंभीर सुरक्षा खतरों से बचाने के लिए विशेष प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं। आतंकवाद-रोधी कार्रवाई से लेकर बम निरोधक विशेषज्ञता तक, यह बल भारत की विशेष सुरक्षा क्षमताओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है। बदलते समय के साथ आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण और अंतर-एजेंसी समन्वय को मजबूत करना इसकी तैयारियों के लिए आवश्यक है। ब्लैक कैट कमांडो की भूमिका यह सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण है कि असाधारण सुरक्षा संकट के दौरान देश के पास प्रशिक्षित विशेषज्ञों और विशेष संसाधनों से लैस एक सक्षम बल मौजूद रहे।

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