नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने नैतिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए ‘निफ्टी500 अहिंसा इंडेक्स’ लॉन्च किया है। यह इंडेक्स पशु क्रूरता और जीव हत्या से दूर रहने वाली कंपनियों को ट्रैक करेगा।
भारतीय शेयर बाजार में निवेश के साथ-साथ नैतिक मूल्यों (Ethical Values) को जोड़ने की दिशा में एक बेहद अनोखा और ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) की सहायक कंपनी ‘एनएसई इंडिसेस’ (NSE Indices) ने आधिकारिक तौर पर ‘निफ्टी500 अहिंसा इंडेक्स’ (Nifty500 Ahimsa Index) लॉन्च किया है। यह एक बिल्कुल नया और विशिष्ट थीमैटिक इंडेक्स है, जो शेयर बाजार में सूचीबद्ध उन कंपनियों के प्रदर्शन को ट्रैक करेगा जिनका बिजनेस मॉडल पूरी तरह से ‘अहिंसा’ (Non-violence) के सिद्धांतों पर आधारित है।
इस इंडेक्स को विशेष रूप से उन निवेशकों के लिए तैयार किया गया है जो कमाई के साथ-साथ यह भी सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनका पैसा ऐसी कंपनियों में न लगे जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जीव-जंतुओं को नुकसान पहुँचाने या पशु क्रूरता से जुड़े व्यवसायों में लिप्त हैं।
क्या है Nifty500 Ahimsa Index और कैसे करेगा काम?
‘निफ्टी500 अहिंसा इंडेक्स’ भारतीय शेयर बाजार के व्यापक ‘निफ्टी 500’ (Nifty 500) यूनिवर्स से ही कंपनियों का चयन करता है। लेकिन इसमें शामिल होने के लिए कंपनियों को पशु कल्याण (Animal Welfare) से जुड़े बेहद सख्त नैतिक मापदंडों की स्क्रीनिंग प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।
एनएसई (NSE) द्वारा 10 जुलाई 2026 को जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, इस अनूठे इंडेक्स को ‘अहिंसागेन फाउंडेशन’ (Ahimsagain Foundation) के सहयोग से विकसित किया गया है। यह फाउंडेशन अपने विशेष ‘अहिंसा इन्वेस्टमेंट मूवमेंट’ (AIM) फ्रेमवर्क के तहत कंपनियों का बारीकी से मूल्यांकन करता है। यह फ्रेमवर्क जांचता है कि किसी कंपनी के उत्पाद, सेवाएं और व्यावसायिक तौर-तरीके अहिंसा के सिद्धांतों के कितने अनुकूल हैं।
तीन श्रेणियों (Green, Orange, Red) में बंटी कंपनियां
अहिंसा (AIM) फ्रेमवर्क के तहत शेयर बाजार की सभी कंपनियों की जांच की जाती है और उन्हें उनके बिजनेस के आधार पर तीन मुख्य श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है:
- ग्रीन (Green Category): इस श्रेणी में वे कंपनियां आती हैं जिनका व्यवसाय और उत्पाद पूरी तरह से अहिंसा के सिद्धांतों के अनुकूल हैं और जो किसी भी रूप में पशुओं को नुकसान नहीं पहुंचाती हैं।
- ऑरेंज (Orange Category): इसमें वे कंपनियां शामिल हैं जिनकी गतिविधियों में पशु कल्याण को लेकर मध्यम स्तर की चिंताएं या कमियां पाई जाती हैं।
- रेड (Red Category): इस श्रेणी में उन कंपनियों को रखा जाता है जो सीधे तौर पर जीव हत्या, चमड़ा उद्योग, मांस प्रसंस्करण, पशु परीक्षण (Animal Testing) या ऐसे ही अन्य हानिकारक व्यवसायों में बड़े पैमाने पर शामिल हैं।
इंडेक्स के नियमों के मुताबिक, केवल ‘ग्रीन’ श्रेणी में आने वाली कंपनियां ही इस इंडेक्स का हिस्सा बनने के लिए पात्र होंगी, जबकि ‘ऑरेंज’ और ‘रेड’ श्रेणियों में आने वाली कंपनियों को इस इंडेक्स से पूरी तरह बाहर (Exclude) रखा जाएगा।
ESG निवेश के दौर में एक नया और अनूठा प्रयोग
वर्तमान समय में वैश्विक और भारतीय बाजारों में ईएसजी (Environmental, Social, and Governance – पर्यावरण, सामाजिक और गवर्नेंस) निवेश का चलन तेजी से बढ़ा है। आज के निवेशक केवल कंपनी के वित्तीय मुनाफे को ही नहीं देखते, बल्कि यह भी देखते हैं कि उस कंपनी का समाज और पर्यावरण पर क्या असर पड़ रहा है।
लेकिन पारंपरिक ईएसजी इंडेक्स से अलग, ‘निफ्टी500 अहिंसा इंडेक्स’ का मुख्य और विशेष फोकस केवल इस बात पर है कि व्यावसायिक गतिविधियों में जीवों को नुकसान न पहुंचे। भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में यह अपनी तरह का पहला और बेहद पारदर्शी, नियमों पर आधारित (Rules-based) बेंचमार्क है, जो नैतिक निवेश को एक नई परिभाषा दे रहा है।
विभिन्न क्षेत्रों (Sectors) में डायवर्सिफाइड पोर्टफोलियो
भले ही इस इंडेक्स में शामिल होने के लिए कंपनियों को ‘अहिंसा’ की कड़ी स्क्रीनिंग से गुजरना पड़ता है, लेकिन निवेशकों को विविधता का पूरा लाभ मिलेगा। चूंकि यह इंडेक्स निफ्टी 500 के विशाल दायरे से ग्रीन कंपनियों को चुनता है, इसलिए इसमें देश की अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों (जैसे आईटी, फार्मा, बैंकिंग, एफएमसीजी) की कंपनियों का बेहतरीन प्रतिनिधित्व (Representation) देखने को मिलेगा।
इंडेक्स में प्रत्येक शेयर का वजन (Weight) उसकी फ्री-फ्लोट मार्केट कैपिटलाइजेशन (Free-float Market Capitalisation) के आधार पर तय किया जाएगा। इसके अलावा, कंपनियों के बदलते बिजनेस मॉडल्स और अपडेटेड असेसमेंट को ध्यान में रखते हुए इस इंडेक्स को साल में दो बार (Semi-annually) पुनर्गठित (Reconstitute) किया जाएगा।
इस इंडेक्स के लॉन्च होने के बाद अब वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि जल्द ही भारत में म्यूचुअल फंड हाउस और एसेट मैनेजमेंट कंपनियां इस बेंचमार्क पर आधारित नए ईटीएफ (ETFs) और इंडेक्स फंड्स बाजार में उतार सकती हैं, जिससे आम निवेशकों के लिए भी ‘अहिंसा’ के मार्ग पर चलते हुए शेयर बाजार से मुनाफा कमाने के रास्ते खुलेंगे।