शेयर बाजार की सोमवार की प्रिडिक्शन: 13 जुलाई को कैसी रहेगी निफ्टी और सेंसेक्स की चाल? जानें एक्सपर्ट्स के मुताबिक अहम सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल्स

शेयर बाजार की सोमवार की प्रिडिक्शन: 13 जुलाई को कैसी रहेगी निफ्टी और सेंसेक्स की चाल? जानें एक्सपर्ट्स के मुताबिक अहम सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल्स

 

सोमवार 13 जुलाई को भारतीय शेयर बाजार (Nifty & Sensex) में कारोबार के लिए तकनीकी विश्लेषकों ने अहम संकेत दिए हैं। पश्चिम एशिया (West Asia) के तनाव और कच्चे तेल के बीच जानें निफ्टी के लिए कौन से लेवल्स हैं बेहद जरूरी।

 

भारतीय शेयर बाजार के लिए पिछला हफ्ता भारी उतार-चढ़ाव (Volatility) से भरा रहा। लेकिन कारोबारी हफ्ते के आखिरी दो सत्रों (Trading Sessions) में बेंचमार्क इंडेक्स ने शानदार रिकवरी दिखाते हुए निचले स्तरों से लगभग 1.4 प्रतिशत की छलांग लगाई। इस तेजी की बदौलत बाजार पूरे हफ्ते के दौरान हुए अपने अधिकांश नुकसान की भरपाई करने में सफल रहा। कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में आई गिरावट और घरेलू स्तर पर चिंताओं के कम होने से बाजार को सहारा मिला, जबकि पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी भू-राजनीतिक अनिश्चितता अभी भी एक बड़ा ओवरहैंग बनी हुई है।

बाजार के जानकारों का कहना है कि भारत के आंतरिक बुनियादी सिद्धांत (Domestic Fundamentals) अभी भी काफी मजबूत हैं। लेकिन अल्पावधि (Near-term) में पश्चिम एशिया के घटनाक्रमों और कच्चे तेल के उतार-चढ़ाव के कारण बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। पिछले हफ्ते के अंतिम बंद भाव पर नजर डालें तो सेंसेक्स 0.26% की गिरावट के साथ 77,569 के स्तर पर और निफ्टी 50 भी 0.26% फिसलकर 24,206.90 के स्तर पर बंद हुआ था।

निफ्टी के लिए सोमवार (13 जुलाई) के प्रमुख लेवल्स

तकनीकी मोर्चे (Technical Setup) पर विश्लेषकों का मानना है कि जब तक बाजार प्रमुख सपोर्ट लेवल्स को बनाए रखता है, तब तक व्यापक ट्रेंड (Broader Trend) सकारात्मक बना रहेगा। अलग-अलग ब्रोकरेज फर्म्स और एक्सपर्ट्स ने सोमवार के कारोबार के लिए निम्नलिखित महत्वपूर्ण लेवल्स पर नजर रखने की सलाह दी है:

  • मास्टर कैपिटल सर्विसेज के रवि सिंह के अनुसार: निफ्टी इस समय अपने महत्वपूर्ण मूविंग एवरेज (Moving Averages) से ऊपर ट्रेड कर रहा है और 23,800 से 24,550 के दायरे में कंसोलिडेट (मजबूत) हो रहा है। जब तक निफ्टी 23,800 के सपोर्ट लेवल के ऊपर बना रहता है, तब तक बाजार का समग्र आउटलुक पॉजिटिव है और निवेशकों को ‘बाय-ऑन-डिप्स’ (हर गिरावट पर खरीदारी) की रणनीति अपनानी चाहिए। किसी भी एक तरफ एक निर्णायक ब्रेकआउट ही बाजार की अगली दिशा तय करेगा।
  • एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर के अनुसार: निफ्टी ने अपने 100-दिन के एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) को फिर से हासिल कर लिया है, जिससे शॉर्ट-टर्म टेक्निकल सेटअप में सुधार हुआ है। उनके मुताबिक, 24,300 का स्तर तत्काल रेजिस्टेंस (रुकावट) का काम करेगा। अगर निफ्टी इसके ऊपर टिकने में कामयाब होता है, तो यह 24,400-24,600 के जोन की तरफ बढ़ सकता है। वहीं, नीचे की तरफ 24,100 तत्काल सपोर्ट है, जिसके बाद 24,000 का स्तर बेहद क्रूशियल (महत्वपूर्ण) होगा। 24,000 के नीचे जाने पर बिकवाली का नया दबाव बन सकता है जो निफ्टी को 23,900-23,800 तक खींच सकता है।
  • रेलीगेयर ब्रोकिंग के अजीत मिश्रा के अनुसार: हालांकि बाजार की रफ्तार (Momentum) थोड़ी धीमी हुई है, लेकिन सूचकांक प्रमुख माध्यम-अवधि के मूविंग एवरेज से ऊपर है। उनके अनुसार, 23,800-24,000 का जोन तत्काल सपोर्ट का काम करेगा, जबकि 23,650 पर एक मजबूत बेस (मजबूत सपोर्ट) मौजूद है। ऊपर की तरफ 24,400-24,600 का जोन तत्काल रेजिस्टेंस बना हुआ है और इस रेंज के ऊपर एक निर्णायक ब्रेकआउट निफ्टी को बहुत जल्द 25,000 के ऐतिहासिक मार्क की ओर ले जा सकता है।

घरेलू मोर्चे पर कोई बड़ा ‘रेड फ्लैग’ नहीं, संस्थागत खरीदारी मजबूत

एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस समय भारतीय अर्थव्यवस्था और घरेलू मोर्चे पर कोई भी बड़ा नकारात्मक संकेत (Red Flag) मौजूद नहीं है। पश्चिम एशिया (विशेष रूप से ईरान-अमेरिका) का संकट ही एकमात्र बाहरी चिंता है। एक राहत की बात यह भी है कि व्यापक बाजार (Broader Market) यानी मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स ने मुख्य सूचकांकों (सेंसेक्स-निफ्टी) की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है, जो मार्केट ब्रेथ (बाजार की चौड़ाई) में सुधार को दिखाता है।

इसके अलावा, संस्थागत निवेशकों का भरोसा भी भारतीय विकास कहानी (India’s Growth Story) पर अटूट है। पिछले हफ्ते के दौरान विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने बाजार में करीब 4,670 करोड़ रुपये का निवेश किया, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने लगभग 8,275 करोड़ रुपये बाजार में पंप किए। यह भारी-भरकम संस्थागत खरीदारी बाजार को निचले स्तरों पर एक मजबूत सुरक्षा चक्र प्रदान कर रही है।

आगामी हफ्ते के इन बड़े घटनाक्रमों (Key Events) पर रहेगी नजर

रेलीगेयर ब्रोकिंग के अजीत मिश्रा के मुताबिक, आने वाला हफ्ता व्यापक आर्थिक (Macroeconomic) आंकड़ों और कॉर्पोरेट अर्निंग्स (Corporate Earnings) दोनों ही दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण होने जा रहा है। घरेलू मोर्चे पर निवेशकों की नजरें मुख्य रूप से इन आर्थिक संकेतकों पर टिकी होंगी:

  • महंगाई के आंकड़े: जून महीने के लिए सीपीआई (CPI) यानी खुदरा मुद्रास्फीति और डब्ल्यूपीआई (WPI) यानी थोक मुद्रास्फीति के आंकड़े जारी होंगे।
  • आर्थिक डेटा: बेरोजगारी के आंकड़े, व्यापार संतुलन (Trade Balance) के आंकड़े और देश के नवीनतम विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) के डेटा पर भी बाजार की नजर रहेगी।

इसके साथ ही, चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (Q1 FY27) के नतीजों का सीजन भी रफ्तार पकड़ेगा। कंपनियों के नतीजों के साथ-साथ उनके मैनेजमेंट की भविष्य की कमेंट्री विभिन्न सेक्टर्स के प्रदर्शन को तय करने में बड़ी भूमिका निभाएगी। वैश्विक स्तर पर, कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें जो इस समय 71 से 72 डॉलर प्रति बैरल के आसपास स्थिर हैं, उनकी स्थिरता भारत के लिए बेहद अनुकूल है। यदि ऊर्जा की कीमतें इसी दायरे में बनी रहती हैं, तो इससे महंगाई का दबाव कम होगा और बाजार की धारणा को और मजबूती मिलेगी।

 

 

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