वित्त मंत्रालय ने संसद में स्पष्ट किया है कि खुदरा और घरेलू निवेशकों के लिए इक्विटी पर लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स हटाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। AY25 में LTCG कलेक्शन 78% बढ़ा है।
सरकार ने सोमवार, 20 जुलाई 2026 को संसद के मानसून सत्र के दौरान शेयर बाजार के निवेशकों और आम जनता को एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण जारी किया है। केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने लोकसभा को बताया कि फिलहाल खुदरा और घरेलू इक्विटी निवेशकों पर लगने वाले लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स को खत्म करने का कोई प्रस्ताव नहीं है। सरकार की इस कार्रवाई से निवेशकों की उम्मीदों पर धक्का लगा है कि सरकार बाजार के सेंटिमेंट को सुधारने के लिए टैक्स में बड़ी राहत दे सकती है।
वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में एक लिखित प्रश्न के जवाब में कहा, “वर्तमान में, घरेलू निवेशकों और विदेशी निवेशकों को एक समान अवसर (Level Playing Field) देने या बाजार की धारणा को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से LTCG टैक्स को वापस लेने का कोई भी प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।”
वर्तमान में सूचीबद्ध शेयरों (Listed Equities) और इक्विटी ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड्स पर लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स 12.5 प्रतिशत (12.5%) की दर से लगाया जाता है, जैसा कि LTCG टैक्स के वर्तमान नियम और दरों (Current Rules of LTCG Tax) संसद में सूचित किया गया है।
- टैक्स छूट का आधार: यह टैक्स केवल एक वित्तीय वर्ष में 1.25 लाख रुपये से अधिक के मुनाफे पर लागू होता है। यानी एक साल में 1.25 लाख रुपये तक का लॉन्ग-टर्म प्रॉफिट एक निवेशक को टैक्स नहीं देना होगा।
- सीमा समय: लॉन्ग-टर्म कैपिटल एसेट किसी भी शेयर या म्यूचुअल फंड को इक्विटी मार्केट में 12 महीने या 1 साल से अधिक समय तक रखा जाना चाहिए।
वित्त राज्य मंत्री ने कहा कि कैपिटल गेन्स टैक्स की दरों सहित सभी कर नीतियों की समय-समय पर व्यापक आर्थिक परिस्थितियों (macro-economic parameters) को ध्यान में रखकर वार्षिक बजट प्रक्रिया और विधायी संशोधनों के एक हिस्से के रूप में समीक्षा की जाती है।
LTCG टैक्स ने सरकार की तिजोरी भर दी, कलेक्शन में 78% का रिकॉर्ड वृद्धि
सरकारी खजाने ने भारतीय शेयर बाजार में हुई तेजी का सीधा लाभ उठाया है, जैसा कि वित्त मंत्रालय ने संसद को बताया है। इक्विटी लेनदेन पर लगने वाले LTCG टैक्स से राजस्व में भारी वृद्धि हुई है।
आंकड़े बताते हैं कि LTCG टैक्स कलेक्शन असेसमेंट ईयर (AY) 2025-26 में लगभग 78% बढ़कर 1.29 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। इसके मुकाबले, असेसमेंट ईयर (AY) 2024–25 में कुल कमाई महज 72,249 करोड़ रुपये थी। टैक्स जमा में हुई यह बड़ी वृद्धि देश में खुदरा निवेशकों की बढ़ती भागीदारी और शेयर बाजार की मजबूत स्थिति का संकेत है।
मंत्री से आगामी वर्षों के आंकड़ों के बारे में पूछा गया. उन्होंने बताया कि असेसमेंट ईयर 2026-27 (वित्तीय वर्ष 2025-26 से संबंधित) और AY 2027-28 (वित्तीय वर्ष 2026-27 से संबंधित) के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने की प्रक्रिया अभी जारी है, इसलिए अंतिम डेटा अभी उपलब्ध नहीं है।
घरेलू निवेशकों और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FPIs) के लिए समान टैक्स दरें
वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि 12.5% की LTCG टैक्स दर भारतीय शेयर बाजार में निवेश करने वाले घरेलू खुदरा निवेशकों और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) दोनों के लिए समान है, जिससे टैक्स में भेदभाव और असमानता की चिंताओं को दूर किया गया है। दोनों वर्गों के निवेशकों से टैक्स की दर समान है।
सरकारी प्रतिभूतियों (G-Secs) में वित्तीय निगमों (FPIs) को व्यापक छूट मिलती है:
लेकिन मंत्री ने एक महत्वपूर्ण रणनीतिक निर्णय भी बताया। उनका कहना था कि सरकार ने हाल ही में आयकर (संशोधन) अध्यादेश, 2026 में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। 1 अप्रैल 2026 से सरकारी प्रतिभूतियों (G-Secs) में निवेश करने वाले विदेशी निवेशकों (FPIs) की ब्याज आय (Interest Income) और कैपिटल गेन्स (पूंजीगत लाभ) आयकर से पूरी तरह छूट दी जाएगी।
सरकार ने कहा कि इस कदम का मुख्य उद्देश्य दीर्घकालीन विदेशी पूंजी को आकर्षित करना है और भारत के टैक्स सिस्टम को विश्व भर में अधिक प्रतिस्पर्धी बनाना है। टैक्स छूट के बाद, बड़े पेंशन फंड, विदेशी बीमा कंपनियों और वैश्विक संप्रभु धन कोष से भारत के सरकारी बॉन्ड मार्केट में स्थिर, व्यवस्थित और लंबे समय तक टिकने वाला निवेश की उम्मीद है।