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NEET पेपर लीक मामले में AAP ने मोदी सरकार को घेरा। सोशल मीडिया पर एक ‘पढ़े-लिखे हिंदू’ का संदेश वायरल हो रहा है, जिसमें सिस्टम में बैठे भ्रष्ट लोगों पर कार्रवाई की मांग की गई है
नीट (NEET) परीक्षा 2026 में हुए कथित पेपर लीक और धांधली के आरोपों ने अब एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक आंदोलन का रूप ले लिया है। आम आदमी पार्टी (AAP) ने इस मुद्दे पर मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इस बीच, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ और विभिन्न सोसाइटी व्हाट्सएप ग्रुप्स में एक “कट्टर पढ़ा-लिखा हिंदू” (जागरूक नागरिक) का संदेश तेजी से वायरल हो रहा है, जो धर्म और राष्ट्रवाद से ऊपर उठकर शिक्षा के गिरते स्तर और परीक्षा माफियाओं पर सवाल उठा रहा है।
“पढ़े-लिखे हिंदू” का व्हाट्सएप संदेश: क्या है वायरल पोस्ट?
Msg of a Kattar Padha Likha Hindu in a Society WA Group pic.twitter.com/FN6IMgoALh
— Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) May 13, 2026
सोसाइटी ग्रुप्स में साझा किए जा रहे इस संदेश में लिखा है— “मैं एक गर्वित हिंदू हूँ, लेकिन उससे पहले मैं इस देश का एक पढ़ा-लिखा और जिम्मेदार नागरिक हूँ। हमारे बच्चों ने दिन-रात मेहनत की, हमने अपनी मेहनत की कमाई कोचिंग और किताबों में लगाई, लेकिन नतीजा क्या? पेपर लीक। जो माफिया हमारे बच्चों के भविष्य का सौदा कर रहे हैं, उन्हें किसका संरक्षण प्राप्त है? असली देशभक्ति सीमाओं की रक्षा के साथ-साथ अपने देश की प्रतिभा (Talent) को भ्रष्टाचार से बचाना भी है।”
AAP का हमला: ‘शिक्षा व्यवस्था का भगवाकरण नहीं, माफियाकरण हो गया’
आम आदमी पार्टी ने इस वायरल संदेश का समर्थन करते हुए केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार किया है। AAP के आधिकारिक ‘X’ हैंडल से पोस्ट किया गया कि जब देश का एक साधारण और जागरूक हिंदू भी सरकार से शिक्षा पर सवाल करने लगे, तो समझ लेना चाहिए कि पानी सिर से ऊपर जा चुका है।
AAP ने उठाए ये 5 प्रमुख सवाल:
- बार-बार एक ही एजेंसी (NTA) के तहत पेपर लीक क्यों हो रहे हैं?
- गुजरात और हरियाणा जैसे राज्यों से ही धांधली के तार क्यों जुड़ रहे हैं?
- पेपर लीक माफियाओं के खिलाफ ‘बुलडोजर’ कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
- क्या यह मेहनती युवाओं के खिलाफ एक बड़ी साजिश है?
- शिक्षा मंत्री इस्तीफा क्यों नहीं दे रहे?
युवाओं के भविष्य पर संकट
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि नीट पेपर लीक केवल एक परीक्षा का मामला नहीं है, बल्कि यह देश की चिकित्सा व्यवस्था की गुणवत्ता पर भी हमला है। अगर अयोग्य लोग पैसा देकर डॉक्टर बनेंगे, तो भविष्य में देश का स्वास्थ्य ढांचा ढह जाएगा। व्हाट्सएप और ‘X’ पर चल रही इस बहस ने सरकार को रक्षात्मक मोड में ला दिया है, जहाँ अब न केवल विपक्ष बल्कि सरकार का समर्थक वर्ग भी जवाबदेही की मांग कर रहा है।
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