NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले की मुख्य आरोपी मनीषा संजय हवलदार की हैंडराइटिंग और सिग्नेचर के अतिरिक्त नमूने लेने की अनुमति दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने CBI को दे दी है। फोरेंसिक जांच में पुराने नमूने अपर्याप्त पाए गए थे।
देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 में हुए पेपर लीक मामले की जांच कर रही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को एक बड़ी सफलता मिली है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने CBI की अर्जी स्वीकार करते हुए इस घोटाले की प्रमुख आरोपी मनीषा संजय हवलदार की हैंडराइटिंग और हस्ताक्षर के अतिरिक्त नमूने लेने की अनुमति दे दी है। अदालत ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया कि निष्पक्ष और सटीक फोरेंसिक जांच के लिए आरोपी के अतिरिक्त नमूनों की सख्त आवश्यकता है, क्योंकि पूर्व में लिए गए नमूने दस्तावेजों की विशाल संख्या को देखते हुए अपर्याप्त पाए गए हैं।
राउज एवेन्यू कोर्ट का अहम फैसला और जज की टिप्पणी
विशेष सीबीआई न्यायाधीश अजय गुप्ता की अदालत में इस संवेदनशील मामले पर गहन सुनवाई हुई। CBI द्वारा दाखिल आवेदन को स्वीकार करते हुए जज ने आदेश जारी किया। कोर्ट ने कहा कि गवर्नमेंट एक्जामिनर ऑफ क्वेश्चनड डॉक्यूमेंट्स (GEQD) की ओर से यह स्पष्ट रिपोर्ट आई है कि पहले लिए गए नमूने तुलनात्मक अध्ययन के लिए नाकाफी हैं।
अदालत ने माना कि चूंकि मामले में जब्त किए गए कुल दस्तावेजों और मोबाइल डेटा की मात्रा काफी अधिक है, इसलिए निष्पक्ष जांच के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए सीबीआई को आरोपी की हैंडराइटिंग और सिग्नेचर के नए नमूने लेने की अनुमति दी जानी चाहिए।
जेल अधीक्षक को आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश
राउज एवेन्यू कोर्ट ने इस प्रक्रिया को पारदर्शी और सुचारू रूप से पूरा करने के लिए जेल प्रशासन को कड़े निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने संबंधित जेल अधीक्षक को आदेश दिया है कि 27 जुलाई से 29 जुलाई 2026 के बीच (कुल 3 दिनों की अवधि में) CBI अधिकारियों को आरोपी के नमूने लेने के लिए जेल परिसर के भीतर आवश्यक और सुरक्षित व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए।
इसके साथ ही, कोर्ट ने यह भी अनिवार्य किया है कि पूरी हैंडराइटिंग और हस्ताक्षर नमूना लेने की यह प्रक्रिया एक स्वतंत्र गवाह की प्रत्यक्ष मौजूदगी में ही संपन्न कराई जाएगी, ताकि भविष्य में इस पर कोई विधिक सवाल न खड़ा हो सके।
फिजिक्स के प्रश्न लिखवाने और भेजने में आरोपी की मुख्य भूमिका
सुनवाई के दौरान CBI की ओर से पेश वरिष्ठ लोक अभियोजक नीतू सिंह ने अदालत के समक्ष आरोपी मनीषा संजय हवलदार की अपराध में संलिप्तता का पूरा ब्योरा पेश किया। जांच एजेंसी ने खुलासा किया कि मनीषा हवलदार इस पूरे रैकेट की एक मुख्य कड़ी है।
जांच के अनुसार:
- हैंडरिटन नोट्स भेजना: मनीषा हवलदार ने अपने हाथ से लिखकर फिजिक्स (भौतिक विज्ञान) के प्रश्न तैयार किए थे और उनकी तस्वीरें एक अन्य सह-आरोपी मनीषा मांधरे को भेजी थीं।
- मोबाइल फोन से साक्ष्य: पुलिस और सीबीआई की जांच के दौरान आरोपी मनीषा मांधरे के जब्त मोबाइल फोन से हाथ से लिखे गए इन्हीं फिजिक्स के प्रश्नों की डिजिटल तस्वीरें बरामद हुई हैं।
- बोलकर सवाल लिखवाना: सीबीआई ने कोर्ट को यह भी बताया कि आरोपी मनीषा हवलदार ने एक अन्य आरोपी तेजस हर्षद कुमार शाह को भी फिजिक्स के लीक सवाल बोल-बोलकर लिखवाए थे।
फोरेंसिक जांच (GEQD) के लिए अतिरिक्त नमूनों की आवश्यकता
जांच एजेंसी ने कोर्ट को याद दिलाया कि आरोपी की हैंडराइटिंग का पहला सैंपल लेने की अनुमति 30 मई 2026 को ही अदालत से मिल चुकी थी। हालांकि, जैसे-जैसे जांच का दायरा बढ़ा और बड़े पैमाने पर डिजिटल व कागजी दस्तावेज बरामद हुए, वैसे-वैसे फोरेंसिक मिलान का काम जटिल होता गया।
CBI का कहना है कि हर एक जब्त दस्तावेज का निष्पक्ष और वैज्ञानिक तरीके से फोरेंसिक प्रयोगशाला में मिलान करने के लिए पहले के नमूने कम पड़ रहे हैं। अदालत के सामने ठोस साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए वैज्ञानिक रूप से सटीक तुलना आवश्यक है, जिसके लिए अतिरिक्त नमूनों की मांग की गई थी।
बचाव पक्ष की दलीलें और सीबीआई की मांग का विरोध
दूसरी ओर, आरोपी मनीषा संजय हवलदार के वकील ने CBI के इस आवेदन का अदालत में पुरजोर विरोध किया। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि सीबीआई अपने आवेदन में यह स्पष्ट रूप से साबित नहीं कर पाई है कि पुराने नमूने तुलना के लिए किस तरह से अपर्याप्त हैं।
वकील ने अदालत को बताया कि:
आरोपी से पहले ही विभिन्न पन्नों पर लगभग 60 पेज भरवाकर हैंडराइटिंग के विस्तृत नमूने लिए जा चुके हैं।
- आरोपी एक वरिष्ठ नागरिक (Senior Citizen) हैं और बार-बार उनसे लंबी लेखन प्रक्रिया करवाना उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से अनावश्यक परेशान करने जैसा है।
- आरोपी ने जांच में अब तक पूरा सहयोग दिया है और सीबीआई ने जो भी लिखने को कहा, वह सब ईमानदारी से लिखा है।
नीट विवाद पर लगातार गहराता आक्रोश
NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में एक तरफ जहां अदालती और कानूनी कार्रवाई तेजी से आगे बढ़ रही है, वहीं दूसरी तरफ इस परीक्षा में हुई गड़बड़ियों को लेकर देश भर के छात्रों और युवाओं का गुस्सा कम होने का नाम नहीं ले रहा है। दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर विभिन्न छात्र संगठनों का विरोध प्रदर्शन और हंगामा लगातार जारी है। छात्र इस पूरे घोटाले के जिम्मेदार मुख्य सरगनाओं की त्वरित गिरफ्तारी और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली की मांग कर रहे हैं। ऐसे में सीबीआई द्वारा राउज एवेन्यू कोर्ट से मजबूत फॉरेंसिक सबूत जुटाने की यह इजाजत केस को उसके अंजाम तक पहुंचाने में काफी निर्णायक साबित हो सकती है।