मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सुपर 100 के मेधावी छात्रों को सम्मानित किया। जानिए कैसे हरियाणा में बिना पर्ची-बिना खर्ची की नीति से शिक्षा और रोजगार में आया बड़ा बदलाव।
हरियाणा सरकार शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में पारदर्शिता और योग्यता (मेरिट) को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। हाल ही में चंडीगढ़ में आयोजित ‘हरियाणा सुपर 100’ सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने प्रदेश की युवा शक्ति की सराहना की। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर द्वारा शुरू की गई ‘मेरिट आधारित’ नीतियों को आगे बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा में अब केवल और केवल योग्यता के दम पर युवाओं को अवसर मिल रहे हैं।
‘सुपर 100’ से बदल रही मेधावियों की तकदीर
केंद्रीय मंत्री श्री @mlkhattar ने चंडीगढ़ में आयोजित हरियाणा सुपर 100 अभिनंदन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वर्ष 2015 में शिक्षा में सुधार के लिए मेरिट को मिशन बनाने, ‘बिना खर्ची, बिना पर्ची’ के सिद्धांत पर योग्यता आधारित सरकारी नौकरियों की व्यवस्था लागू करने तथा वर्ष 2018 में… pic.twitter.com/syl0fAOmuR
— DPR Haryana (@DiprHaryana) July 2, 2026
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने ‘सुपर 100’ योजना की अपार सफलता पर गर्व व्यक्त किया। इस योजना के माध्यम से अब तक 534 छात्रों ने IIT और NEET जैसी देश की प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त कर इतिहास रचा है। मुख्यमंत्री ने सभी सफल विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को बधाई देते हुए कहा कि यह मेधावी छात्र प्रदेश का भविष्य हैं और सरकार उनके सुनहरे भविष्य के लिए प्रतिबद्ध है।
‘बिना पर्ची-बिना खर्ची’ का संकल्प
समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2015 से शिक्षा और सरकारी नौकरियों में शुरू किए गए सुधारों का अब व्यापक असर दिख रहा है। ‘बिना पर्ची, बिना खर्ची’ (बिना सिफारिश और बिना खर्च) की नीति ने हरियाणा के आम परिवार के बच्चों के लिए सरकारी नौकरियों के द्वार खोले हैं। उन्होंने दोहराया कि सरकार ने योग्यता को ही अपना मिशन बनाया है, जिससे युवाओं का व्यवस्था पर भरोसा बढ़ा है।
शिक्षा क्षेत्र में बड़े सुधार
नायब सिंह सैनी ने कहा कि हरियाणा सरकार शिक्षा को रोजगारोन्मुखी बनाने के लिए लगातार कार्य कर रही है। ‘सुपर 100’ जैसे कार्यक्रमों ने यह साबित कर दिया है कि यदि सही मार्गदर्शन और संसाधन मिलें, तो हरियाणा के सरकारी स्कूलों के बच्चे भी दुनिया में अपना लोहा मनवा सकते हैं। सरकार का लक्ष्य आने वाले समय में इन सुविधाओं का दायरा और बढ़ाना है ताकि अधिक से अधिक विद्यार्थी लाभान्वित हो सकें।