नायब सिंह सैनी का बड़ा फैसला, 1 नवंबर तक हर जिले में अमृत फार्मेसी; सरकारी अस्पतालों में मुफ्त इलाज पर जोर

नायब सिंह सैनी का बड़ा फैसला, 1 नवंबर तक हर जिले में अमृत फार्मेसी; सरकारी अस्पतालों में मुफ्त इलाज पर जोर

 

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सरकारी अस्पतालों में डायबिटिक रेटिनोपैथी का मुफ्त इलाज, डॉक्टरों के खाली पद भरने और ऑनलाइन निगरानी के निर्देश दिए। 1 नवंबर तक अमृत फार्मेसी शुरू होगी।

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। 29 सितंबर को हुई इस बैठक में मुख्यमंत्री ने मरीजों को बेहतर और समयबद्ध स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, उन्होंने सरकारी अस्पतालों में आयुष्मान योजना के तहत डायबिटिक रेटिनोपैथी का मुफ्त इलाज सुनिश्चित करने, डॉक्टरों की रिक्तियों को जल्द भरने और अस्पतालों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जोड़ने पर जोर दिया।

डायबिटिक रेटिनोपैथी का मुफ्त इलाज सुनिश्चित करने के निर्देश

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सरकारी अस्पतालों में आयुष्मान योजना के तहत डायबिटिक रेटिनोपैथी के मरीजों को मुफ्त उपचार की सुविधा सुनिश्चित की जाए। डायबिटिक रेटिनोपैथी मधुमेह से जुड़ी आंखों की एक गंभीर जटिलता है, इसलिए समय पर जांच और उपचार को महत्वपूर्ण माना जाता है।

हरियाणा की आयुष्मान भारत व्यवस्था में बड़ी संख्या में सरकारी और सूचीबद्ध अस्पताल योजना के तहत सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। राज्य की आधिकारिक आयुष्मान भारत वेबसाइट पर जिलेवार सूची भी उपलब्ध है।

डॉक्टरों और विशेषज्ञों के खाली पद जल्द भरने के निर्देश

बैठक में मुख्यमंत्री ने सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी को दूर करने पर भी जोर दिया। उन्होंने डॉक्टरों के साथ-साथ रेडियोलॉजिस्ट और कार्डियोलॉजिस्ट के खाली पदों को जल्द भरने के निर्देश दिए। उनका कहना था कि अस्पतालों में पर्याप्त विशेषज्ञ उपलब्ध होने से मरीजों को इलाज के लिए अनावश्यक रूप से दूसरे शहरों या निजी अस्पतालों का रुख नहीं करना पड़ेगा।

मुख्यमंत्री ने सरकारी अस्पतालों में निजी क्षेत्र के विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाएं लेने की संभावनाओं पर भी काम करने के निर्देश दिए। इसका उद्देश्य सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धता को बढ़ाना है।

रजिस्ट्रेशन से दवा वितरण तक ऑनलाइन निगरानी

नायब सिंह सैनी ने सभी सरकारी अस्पतालों को एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जोड़ने के निर्देश भी दिए। इसके जरिए मरीज के अस्पताल में पंजीकरण से लेकर उपचार और दवा वितरण तक की प्रक्रिया की वास्तविक समय में निगरानी किए जाने की योजना है।

डिजिटल निगरानी व्यवस्था से अस्पतालों में मरीजों की संख्या, उपलब्ध सेवाओं और दवा वितरण जैसी गतिविधियों पर नजर रखने में मदद मिल सकती है। केंद्र सरकार भी स्वास्थ्य सेवाओं में डिजिटल तकनीक और ऑनलाइन स्वास्थ्य प्रणालियों के विस्तार पर जोर दे रही है।

खराब मेडिकल उपकरण तुरंत ठीक करने के निर्देश

मुख्यमंत्री ने सरकारी अस्पतालों में खराब पड़े मेडिकल उपकरणों को तत्काल दुरुस्त कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अस्पतालों में उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल मरीजों को बेहतर उपचार देने के लिए किया जाना चाहिए।

इसके अलावा जिन अस्पतालों में मरीजों की संख्या अधिक है, वहां डॉक्टरों, सहयोगी कर्मचारियों और आयुष्मान मित्रों के लिए विशेष प्रोत्साहन राशि उपलब्ध कराने की बात भी कही गई। सरकार ने इसके लिए आयुष्मान भारत और चिरायु योजनाओं के तहत सरकारी अस्पतालों को मिलने वाली राशि के इस्तेमाल की योजना को मंजूरी दी है। इस राशि का उपयोग कर्मचारियों के प्रोत्साहन के साथ अस्पतालों के उन्नयन और स्वच्छता कार्यों में भी किया जा सकेगा।

1 नवंबर तक हर जिले में अमृत फार्मेसी

बैठक में मुख्यमंत्री ने राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों में अमृत फार्मेसी शुरू करने की समयसीमा भी तय की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि 1 नवंबर तक हर जिले में अमृत फार्मेसी शुरू करने की प्रक्रिया पूरी की जाए।

अमृत फार्मेसी योजना का उद्देश्य मरीजों को दवाएं अपेक्षाकृत कम कीमत पर उपलब्ध कराना है। केंद्र स्तर पर यह योजना किफायती दरों पर दवाओं की उपलब्धता बढ़ाने के लिए संचालित की जाती है।

मरीजों की संख्या बढ़ने वाले अस्पतालों को मिलेगा प्रोत्साहन

मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन सरकारी अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ती है, वहां डॉक्टरों, सपोर्ट स्टाफ और आयुष्मान मित्रों को विशेष प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। सरकार के मुताबिक इससे अस्पतालों में बेहतर प्रदर्शन और मरीजों को सेवाएं उपलब्ध कराने वाले कर्मचारियों को प्रोत्साहित करने में मदद मिलेगी।

समीक्षा बैठक में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, मानव संसाधन, मेडिकल उपकरण, डिजिटल निगरानी और दवा उपलब्धता से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से इन निर्देशों को समयबद्ध तरीके से लागू करने पर जोर दिया।

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