किसान मेले में पहुंचे लाल चंद कटारूचक्क, प्राकृतिक खेती और जल संरक्षण अपनाने की किसानों से अपील

किसान मेले में पहुंचे लाल चंद कटारूचक्क, प्राकृतिक खेती और जल संरक्षण अपनाने की किसानों से अपील

 

लाल चंद कटारूचक्क ने गुरदासपुर में किसान मेले में कृषि विशेषज्ञों और किसानों से चर्चा की। उन्होंने प्राकृतिक खेती अपनाने और पर्यावरण संरक्षण के लिए पानी बचाने पर जोर दिया।

पंजाब के कैबिनेट मंत्री लाल चंद कटारूचक्क ने गुरदासपुर में पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU), लुधियाना की ओर से आयोजित किसान मेले में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने कृषि विशेषज्ञों और किसानों से मुलाकात कर खेती से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की। मंत्री ने किसानों से प्राकृतिक खेती को अपनाने और पानी के अधिकतम संरक्षण पर ध्यान देने का आह्वान किया।

कृषि विशेषज्ञों और किसानों से की चर्चा

किसान मेले के दौरान लाल चंद कटारूचक्क ने कृषि विशेषज्ञों और किसान भाइयों के साथ बातचीत की। उन्होंने खेती से जुड़े मौजूदा मुद्दों, कृषि पद्धतियों और किसानों के सामने आने वाली चुनौतियों पर चर्चा की। इस दौरान कृषि क्षेत्र में नई तकनीकों और टिकाऊ खेती के तरीकों को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया।

पंजाब में कृषि राज्य की अर्थव्यवस्था और ग्रामीण जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में खेती में प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित इस्तेमाल और पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत पर लगातार चर्चा होती रही है।

प्राकृतिक खेती अपनाने पर जोर

लाल चंद कटारूचक्क ने किसानों से प्राकृतिक खेती को अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि खेती में प्राकृतिक तरीकों को बढ़ावा देने से मिट्टी और पर्यावरण के संरक्षण में मदद मिल सकती है। प्राकृतिक खेती के साथ-साथ कृषि विशेषज्ञों की सलाह और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार खेती की तकनीकों को अपनाने पर भी जोर दिया गया।

मंत्री ने किसानों को खेती में ऐसे तरीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया, जिससे कृषि उत्पादन के साथ प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भी सुनिश्चित किया जा सके।

पानी बचाने का दिया संदेश

किसान मेले में जल संरक्षण भी चर्चा का प्रमुख विषय रहा। लाल चंद कटारूचक्क ने किसानों से पानी की अधिकतम बचत करने की अपील की। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के लिए जल संसाधनों के विवेकपूर्ण इस्तेमाल को जरूरी बताया।

पंजाब में कृषि क्षेत्र में भूजल के इस्तेमाल को लेकर लंबे समय से चिंता जताई जाती रही है। ऐसे में फसल पद्धति में बदलाव, पानी की बचत करने वाली तकनीकों और टिकाऊ कृषि तरीकों को लेकर किसानों के बीच जागरूकता बढ़ाना महत्वपूर्ण माना जाता है।

किसानों के साथ संवाद पर जोर

लाल चंद कटारूचक्क ने किसान मेले को किसानों और कृषि विशेषज्ञों के बीच संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। उन्होंने किसानों से कृषि वैज्ञानिकों की सलाह लेने और खेती में वैज्ञानिक एवं पर्यावरण अनुकूल तरीकों को अपनाने की अपील की।

गौरतलब है कि पंजाब कृषि विश्वविद्यालय की ओर से किसानों तक कृषि संबंधी तकनीकी जानकारी पहुंचाने के लिए समय-समय पर किसान मेलों और अन्य कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। ऐसे आयोजनों में किसानों को फसल प्रबंधन, नई कृषि तकनीकों और खेती से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी जाती है।

टिकाऊ खेती से पर्यावरण संरक्षण का संदेश

लाल चंद कटारूचक्क ने कहा कि कृषि विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण पर ध्यान देना भी जरूरी है। प्राकृतिक खेती और जल संरक्षण जैसे उपाय आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखने में भूमिका निभा सकते हैं।

किसान मेले में हुई चर्चा के दौरान कृषि विशेषज्ञों और किसानों के साथ संवाद के जरिए खेती को अधिक टिकाऊ और संसाधन-कुशल बनाने पर जोर दिया गया। मंत्री ने किसानों को प्राकृतिक खेती तथा जल संरक्षण को अपनी कृषि गतिविधियों का हिस्सा बनाने के लिए प्रोत्साहित किया।

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