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“हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी पर एक महिला पत्रकार का हाथ पकड़ने का गंभीर आरोप लगा है। इस कथित घटना के बाद विपक्ष ने महिला सुरक्षा और मुख्यमंत्री की नैतिकता पर कड़े सवाल खड़े किए हैं। पढ़ें पूरी खबर।”
क्या मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पार की मर्यादा? महिला पत्रकार का हाथ पकड़ने का वीडियो वायरल
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी एक बार फिर विवादों के घेरे में हैं। हाल ही में सोशल मीडिया पर एक कथित वीडियो और कुछ तस्वीरें तेजी से प्रसारित हो रही हैं, जिसमें मुख्यमंत्री एक महिला पत्रकार का हाथ पकड़े हुए नजर आ रहे हैं। इस घटना ने न केवल राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है, बल्कि राज्य में महिला सुरक्षा और सत्तासीन व्यक्तियों के आचरण पर भी गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं। विपक्ष और सामाजिक संगठनों ने इस व्यवहार को बेहद आपत्तिजनक और गरिमा के खिलाफ बताया है।
सत्ता के नशे में मर्यादा भूलने का आरोप: ‘क्या यही है महिला सुरक्षा?’
मुख्यमंत्री नायब सिंह नशे में हैं शायद, वरना यूँ सरेआम एक महिला पत्रकार का हाथ नहीं पकड़ते।
मुख्यमंत्री खुद ही प्रदेश की महिला पर बुरी नज़र रखेंगे तो प्रदेश में महिला सुरक्षा का क्या हाल होगा? pic.twitter.com/sAIbvn004Q
— Anurag Dhanda (@anuragdhanda) May 5, 2026
विपक्षी दलों ने मुख्यमंत्री पर कड़ा प्रहार करते हुए आरोप लगाया है कि वे “सत्ता के नशे” में चूर हैं। एक महिला पत्रकार, जो अपनी ड्यूटी कर रही थी, उसके साथ ऐसा व्यवहार किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि प्रदेश का मुखिया ही सरेआम किसी महिला पत्रकार की मर्यादा का ख्याल नहीं रखेगा, तो आम महिलाओं की सुरक्षा का क्या होगा? सोशल मीडिया पर लोग पूछ रहे हैं कि क्या सार्वजनिक जीवन में पद की गरिमा का कोई मूल्य नहीं रह गया है?
महिला पत्रकार का पक्ष: “असहज करने वाला व्यवहार”
सूत्रों के अनुसार, संबंधित महिला पत्रकार ने इस घटना पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है। उनका कहना है कि प्रश्न पूछने के दौरान मुख्यमंत्री द्वारा अचानक हाथ पकड़ा जाना न केवल उन्हें असहज कर गया, बल्कि यह पेशेवर पत्रकारिता के माहौल में पूरी तरह से अनुचित था। इस मामले ने पत्रकारों के संगठनों को भी एकजुट कर दिया है, जो अब मुख्यमंत्री से सार्वजनिक माफी और स्पष्टीकरण की मांग कर रहे हैं। महिला पत्रकारों का तर्क है कि कार्यस्थल पर इस तरह का शारीरिक स्पर्श सुरक्षा और सम्मान की भावना को ठेस पहुँचाता है।
प्रदेश में महिला सुरक्षा पर खड़े हुए गंभीर सवाल
इस विवाद ने हरियाणा में महिलाओं की स्थिति और सरकार के ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ के दावों पर भी बहस छेड़ दी है। आलोचकों का कहना है कि जब रक्षक ही भक्षक जैसी छवि पेश करने लगे, तो शासन व्यवस्था पर भरोसा करना मुश्किल हो जाता है। “मुख्यमंत्री खुद ही प्रदेश की महिला पर ऐसी नज़र रखेंगे, तो प्रदेश का क्या हाल होगा?” जैसे नारे अब सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहे हैं। इस घटना ने भाजपा सरकार की छवि को भी नुकसान पहुँचाया है, जो अक्सर नारी शक्ति के सम्मान की बात करती है।
जवाबदेही और नैतिकता की जरूरत
लोकतंत्र में जनप्रतिनिधियों से उच्च नैतिक मानकों की अपेक्षा की जाती है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का यह कथित आचरण अब एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। जनता और पत्रकार जगत अब सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे हैं। क्या मुख्यमंत्री इस पर अपनी स्थिति स्पष्ट करेंगे या मौन रहकर इसे रफा-दफा करने की कोशिश होगी? आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि हरियाणा की राजनीति इस मुद्दे पर क्या करवट लेती है।