विश्व मधुमक्खी दिवस: मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने किसानों को जारी की ₹1.02 करोड़ की प्रोत्साहन राशि; मधुमक्खी पालन पर 85% सब्सिडी का ऐलान

विश्व मधुमक्खी दिवस: मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने किसानों को जारी की ₹1.02 करोड़ की प्रोत्साहन राशि; मधुमक्खी पालन पर 85% सब्सिडी का ऐलान

विश्व मधुमक्खी दिवस पर सीएम नायब सिंह सैनी ने 30 किसानों को जारी किए 1.02 करोड़ रुपये। मधुमक्खी पालन पर 85% सब्सिडी और कुरुक्षेत्र में इजरायल तकनीक केंद्र।

हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने किसानों की आय बढ़ाने और कृषि विविधीकरण (crop diversification) को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ी सौगात दी है। पंचकूला में आयोजित ‘विश्व मधुमक्खी दिवस’ (World Bee Day) के राज्य स्तरीय कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करते हुए मुख्यमंत्री ने भावांतर भरपाई योजना के तहत राज्य के 30 प्रगतिशील मधुमक्खी पालक किसानों को 1.02 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि सीधे उनके खातों में जारी की।

मुख्यमंत्री ने किसानों से पारंपरिक खेती के साथ-साथ मधुमक्खी पालन जैसे सहायक व्यवसायों को अपनाने का पुरजोर आह्वान किया ताकि उनकी आर्थिक स्थिति और मजबूत हो सके।

कुरुक्षेत्र के रामनगर में इजरायली तकनीक आधारित केंद्र

किसानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने की प्रतिबद्धता दोहराते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार ने कुरुक्षेत्र के रामनगर में इजरायल की अत्याधुनिक तकनीक पर आधारित एकीकृत मधुमक्खी पालन विकास केंद्र (Integrated Beekeeping Development Centre) और एक विशाल शहद व्यापार केंद्र (Honey Trade Centre) स्थापित किया है। यह केंद्र राज्य के किसानों को विश्व स्तरीय प्रसंस्करण (processing) और बाजार कनेक्टिविटी प्रदान कर रहा है।

मधुमक्खी पालन पर 85% तक की भारी सब्सिडी

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सरकार की नीतियों को रेखांकित किया:

“हरियाणा सरकार मधुमक्खी पालन को एक बड़े उद्योग के रूप में विकसित करने के लिए किसानों को 85 प्रतिशत तक की भारी सब्सिडी दे रही है। किसानों के जोखिम को कम करने के लिए हमने इसे ‘मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना’ और ‘भावांतर भरपाई योजना’ के सुरक्षा कवच में भी शामिल किया है।”

किसानों को आर्थिक सुरक्षा का भरोसा

मुख्यमंत्री ने साफ किया कि हरियाणा देश का पहला ऐसा राज्य है जो बागवानी और मधुमक्खी पालन करने वाले किसानों को बाजार के उतार-चढ़ाव से बचाने के लिए भावांतर भरपाई जैसी नीतियां चला रहा है। सरकार की इन योजनाओं का सीधा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि लागत बढ़ने या बाजार में दाम गिरने पर भी किसानों को नुकसान न उठाना पड़े।

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