Navratri 2026 Day 7 (महासप्तमी) पर मां कालरात्रि की पूजा का महत्व, विधि, मंत्र और भोग। भय, रोग और तनाव से मुक्ति के लिए करें माता कालरात्रि की आराधना।
Navratri 2026 Day 7: चैत्र नवरात्रि के सातवें दिन यानी 25 मार्च 2026 को महासप्तमी मनाई जाएगी। इस दिन मां कालरात्रि की पूजा की जाती है। देवी कालरात्रि दुर्गा की सातवीं शक्ति मानी जाती हैं और उनकी आराधना से भय, मानसिक तनाव, रोग और ग्रह दोष से मुक्ति मिलती है।
मां कालरात्रि का स्वरूप
- रंग: काला (अंधकार का प्रतीक)
- केश: बिखरे हुए
- वाहन: गधा
- नेत्र: तीन
- चार भुजाएं: एक हाथ में खड्ग, दूसरे में वज्र, एक अभय और एक वर मुद्रा में
- गले में माला, और शरीर से अग्नि की ज्वालाएं निकलती हैं
- भयावह रूप के बावजूद मां कालरात्रि शुभ फल देने वाली मानी जाती हैं
पूजा विधि और मंत्र
- पूजा का समय: रात
- मंत्र: “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै नमः” – इसका सवा लाख बार जाप करें
- दीपक: सरसों के तेल का दीपक जलाएं
- फूल और माला: लाल फूल या 108 गुलदाउदी फूलों से बनी माला अर्पित करें
- बीज मंत्र: “ॐ देवी कालरात्र्यै नमः”
- ध्यान मंत्र: “एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता। लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी॥”
- आरती: कपूर से करें और पूरे घर में घुमाएं
- दान: काले तिल, जूते-चप्पल, कपड़े या भोजन जरूरतमंदों को दें
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भोग
मां कालरात्रि को गुड़ का भोग अर्पित करें।
पूजा के लाभ
- भय और बुरी शक्तियों का नाश
- शनि दोष और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति
- मानसिक शांति, आत्मविश्वास और आध्यात्मिक शक्ति में वृद्धि
- बिगड़ी हुई मनोकामनाओं की पूर्ति
मां कालरात्रि की आरती
कालरात्रि जय जय महाकाली।काल के मुंह से बचाने वाली॥
दुष्ट संघारक नाम तुम्हारा।
महाचंडी तेरा अवतारा॥
पृथ्वी और आकाश पे सारा।
महाकाली है तेरा पसारा॥
खड्ग खप्पर रखने वाली।
दुष्टों का लहू चखने वाली॥
कलकत्ता स्थान तुम्हारा।
सब जगह देखूं तेरा नजारा॥
सभी देवता सब नर-नारी।
गावें स्तुति सभी तुम्हारी॥
रक्तदन्ता और अन्नपूर्णा।
कृपा करे तो कोई भी दुःख ना॥
ना कोई चिंता रहे ना बीमारी।
ना कोई गम ना संकट भारी॥
उस पर कभी कष्ट ना आवे।
महाकाली माँ जिसे बचावे॥
तू भी भक्त प्रेम से कह।
कालरात्रि माँ तेरी जय॥
नवरात्रि की महासप्तमी पर मां कालरात्रि की पूजा करने से जीवन में भय, संकट और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और मनोबल और सकारात्मकता बढ़ती है।