National Camel Race Championship 2025 का हुआ शानदार आगाज, जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत रहे मुख्य अतिथि

National Camel Race Championship 2025 का हुआ शानदार आगाज, जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत रहे मुख्य अतिथि

पुष्कर में National Camel Race Championship 2025 का भव्य शुभारंभ हुआ। जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने कहा– यह आयोजन राजस्थान की संस्कृति का प्रतीक है।

राजस्थान की समृद्ध लोक संस्कृति और पारंपरिक खेलों को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने के लिए National Camel Race Championship 2025 का पहला संस्करण पुष्कर में भव्यता के साथ आयोजित किया गया। इस ऐतिहासिक आयोजन में राजस्थान सरकार के जल संसाधन मंत्री एवं पुष्कर विधायक सुरेश सिंह रावत ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की और कार्यक्रम को राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत के लिए मील का पत्थर बताया।

देशभर के 8 राज्यों से 50 प्रतिभागियों की भागीदारी

इस अनूठे आयोजन में भारत के 8 राज्यों से 50 प्रतिभागियों, पुरुषों और महिलाओं ने भाग लिया। इस आयोजन का संयुक्त रूप से कैमलिड्स स्पोर्ट्स इंडिया फेडरेशन और राजस्थान ऊंट दौड़ संघ द्वारा आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य ऊंट दौड़ जैसे पारंपरिक खेलों को संरक्षण और प्रोत्साहन देना था।

पारंपरिक खेलों को मिलेगा बढ़ावा, पर्यटन और रोजगार के नए अवसर

अपने भाषण में मंत्री श्री सुरेश सिंह रावत ने कहा कि ऊंट दौड़ जैसे पारंपरिक खेल न केवल राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान को जीवित रखते हैं, बल्कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और पर्यटन के नए अवसर भी विकसित होते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार पारंपरिक खेलों को बढ़ावा देने के लिए हर संभव सहयोग करेगी।

विश्वस्तरीय आयोजन की दिशा में बड़ा कदम (National Camel Race Championship 2025)

यह आयोजन आने वाले समय में पुष्कर ऊंट मेले को और अधिक भव्य एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय बनाने की दिशा में एक मजबूत आधार तैयार करता है। भविष्य में इस तरह के आयोजनों के माध्यम से लोक नृत्य, संगीत, ऊंट सौंदर्य प्रतियोगिता और हस्तशिल्प जैसे क्षेत्र भी नई ऊंचाइयों को छू सकते हैं।

राज्य सरकार के संरक्षण से पारंपरिक विरासत को मिलेगा संबल

National Camel Race Championship 2025राजस्थान की पारंपरिक विरासत को पुनर्जीवित करने और खेल भावना को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक प्रभावशाली पहल है। इस आयोजन की सफलता दर्शाती है कि सरकार और जनप्रतिनिधियों के सहयोग से ग्रामीण और पारंपरिक खेलों का पुनरुत्थान पूरी तरह संभव है।

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