नृसिंह जयंती 2026 में 30 अप्रैल को मनाई जाएगी। जानें भगवान विष्णु के नृसिंह अवतार की कथा, पूजा का शुभ मुहूर्त और भक्त प्रहलाद की रक्षा का रहस्य।
हिंदू पंचांग के अनुसार, वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को नृसिंह जयंती (Narsingh Jayanti) के रूप में मनाया जाता है। यह दिन भगवान विष्णु के चौथे और अत्यंत शक्तिशाली अवतार, ‘भगवान नृसिंह’ के प्राकट्य का उत्सव है। भगवान नृसिंह ने आधे मानव और आधे सिंह के रूप में अवतार लेकर अधर्मी हिरण्यकश्यप का वध किया था और अपने परम भक्त प्रहलाद की रक्षा की थी।
साल 2026 में नृसिंह जयंती 30 अप्रैल, गुरुवार को मनाई जाएगी।
नृसिंह जयंती 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस वर्ष चतुर्दशी तिथि का विवरण इस प्रकार है:
- चतुर्दशी तिथि प्रारंभ: 30 अप्रैल 2026, सुबह 04:12 बजे से
- चतुर्दशी तिथि समाप्त: 1 मई 2026, सुबह 05:45 बजे तक
- नृसिंह जयंती पूजा मुहूर्त: 30 अप्रैल को शाम 04:22 बजे से शाम 07:05 बजे तक (सायाह्न काल)
क्यों लिया था भगवान विष्णु ने नृसिंह अवतार?
पौराणिक कथा के अनुसार, दैत्यराज हिरण्यकश्यप ने ब्रह्मा जी से कठिन तपस्या के बाद एक ऐसा वरदान प्राप्त किया था जिससे उसे न कोई इंसान मार सके न जानवर, न वह घर के अंदर मरे न बाहर, न दिन में मरे न रात में, और न ही किसी अस्त्र या शस्त्र से उसका वध हो।
- भक्त प्रहलाद पर अत्याचार: अहंकार में डूबा हिरण्यकश्यप खुद को भगवान मानने लगा और अपने ही पुत्र प्रहलाद को विष्णु भक्ति के कारण प्रताड़ित करने लगा।
- अधर्म का अंत: जब हिरण्यकश्यप ने प्रहलाद से पूछा कि “क्या तुम्हारा भगवान इस खंभे में भी है?” और खंभे पर प्रहार किया, तब भगवान विष्णु खंभे को चीरकर नृसिंह (नर + सिंह) रूप में प्रकट हुए।
- वरदान की रक्षा और वध: भगवान ने उसे गोधूलि बेला (न दिन न रात) में, चौखट पर (न घर के अंदर न बाहर), अपनी जंघा पर लिटाकर (न भूमि न आकाश) अपने नाखूनों (न अस्त्र न शस्त्र) से उसका वध कर दिया।
नृसिंह जयंती की पूजा विधि
- उपवास: इस दिन भक्त सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करते हैं और व्रत का संकल्प लेते हैं।
- स्थापना: पूजा स्थान पर भगवान नृसिंह और माता लक्ष्मी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
- अभिषेक: भगवान का दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से अभिषेक किया जाता है।
- भोग: भगवान नृसिंह को पीले फूल, फल और केसर युक्त मिठाई का भोग लगाएं।
नृसिंह जयंती का महत्व
यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत और अटूट भक्ति के विजय का प्रतीक है। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से पूजा करने वाले भक्तों के सभी डर और शत्रुओं का नाश होता है। भगवान नृसिंह अपने भक्तों की हर संकट से रक्षा करते हैं।