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मार्च में म्युचुअल फंड निवेशकों ने रिकॉर्ड निवेश किया, लेकिन साथ ही SIP बंद करने की दर भी 100% तक पहुँच गई। जानिए बाजार की गिरावट और FII की निकासी का पूरा असर।
म्युचुअल फंड निवेश के क्षेत्र में एक बहुत ही दिलचस्प और चौंकाने वाला रुझान सामने आया है। मार्च महीने में SIP स्टॉपेज रेशियो (रोकने का अनुपात) 100% तक पहुँच गया है। इसका मतलब है कि बाजार में जितने नए SIP शुरू हो रहे हैं, उतने ही पुराने SIP बंद भी किए जा रहे हैं।
यहाँ इस आर्थिक घटनाक्रम पर आधारित विस्तृत लेख दिया गया है:
म्युचुअल फंड में बड़ा बदलाव: मार्च में 100% पहुँचा SIP स्टॉपेज रेशियो; रिकॉर्ड इनफ्लो के बावजूद घट गई इंडस्ट्री की संपत्ति
भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों का व्यवहार बदल रहा है। जहाँ एक तरफ नए निवेशक बाजार में आ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पुराने निवेशक अपनी SIP (सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) बंद करने में भी पीछे नहीं हैं। ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, मार्च महीने में SIP रोकने की दर में भारी उछाल आया है।
SIP रोकने की होड़ और बाजार की अस्थिरता
फरवरी की तुलना में मार्च में SIP बंद करने वालों की संख्या में काफी इजाफा हुआ है। वर्तमान में स्थिति यह है कि हर एक नई SIP बनने के बदले, एक पुरानी SIP बंद की जा रही है। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
- अस्थिर रिटर्न: शेयर बाजार पिछले कुछ समय से निवेशकों को आकर्षित करने वाले रिटर्न नहीं दे पाया है।
- FD से तुलना: इक्विटी मार्केट का प्रदर्शन फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) जैसे सुरक्षित और स्थिर विकल्पों के मुकाबले कमजोर रहा है, जिससे निवेशक सुरक्षित निवेश की ओर मुड़ रहे हैं।
- कमजोर मोमेंटम: पिछले एक साल में बेंचमार्क इंडेक्स Nifty 50 में मात्र 2 प्रतिशत की बढ़त देखी गई है, जो बाजार की सुस्ती को दर्शाता है।
नेट इनफ्लो में 55% का उछाल
भले ही SIP बंद करने वालों की संख्या बढ़ी हो, लेकिन निवेश की कुल राशि (Inflow) में जबरदस्त मजबूती देखी गई है। AMFI के आंकड़ों के अनुसार:
मार्च में इक्विटी स्कीम्स में 40,366 करोड़ रुपये का नेट इनफ्लो रहा, जो फरवरी के 25,965 करोड़ रुपये से 55% ज्यादा है।
SIP के जरिए आने वाला योगदान भी बढ़कर 32,087 करोड़ रुपये हो गया।
AUM में 10% की गिरावट
रिकॉर्ड निवेश के बावजूद, म्युचुअल फंड इंडस्ट्री की कुल संपत्ति (AUM) में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।
फरवरी में कुल AUM 82.03 लाख करोड़ रुपये था, जो मार्च में घटकर 73.73 लाख करोड़ रुपये रह गया।
यह 10% से अधिक की गिरावट मुख्य रूप से शेयर बाजार में आई गिरावट और ‘मार्क-टू-मार्केट’ (MTM) घाटे के कारण हुई है।
FII की बिकवाली और वैश्विक संकट का असर
बाजार के कमजोर प्रदर्शन के पीछे विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार निकासी एक बड़ा कारण है।
- भारी निकासी: मार्च में FII ने भारतीय बाजार से 12 बिलियन डॉलर से अधिक की राशि निकाली।
- ईरान-अमेरिका युद्ध: युद्ध के हालातों ने वैश्विक अनिश्चितता बढ़ा दी है, जिससे विदेशी निवेशक पैसा सुरक्षित मानकर निकाल रहे हैं।
- आर्थिक चुनौतियां: कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, रुपये की कमजोरी और निर्यात पर पड़ने वाले असर ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।