“ग्लोबल ब्रोकरेज मॉर्गन स्टेनली ने भारतीय इक्विटी पर बड़ा दांव लगाया है। रिपोर्ट के अनुसार, बुल-केस परिदृश्य में सेंसेक्स दिसंबर 2026 तक 1.1 लाख के स्तर को पार कर सकता है। जानें बाजार में तेजी के मुख्य कारण और संभावित जोखिम।”
दिग्गज ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म मॉर्गन स्टेनली (Morgan Stanley) ने भारतीय शेयर बाजार को लेकर अपना सकारात्मक नजरिया (Constructive View) दोहराया है। ब्रोकरेज का मानना है कि आने वाले महीनों में बाजार में आने वाली तेज रिकवरी BSE सेंसेक्स को दिसंबर 2026 तक 1.1 लाख के स्तर तक पहुंचा सकती है।
सेंसेक्स के लिए नए लक्ष्य और संभावनाएं
मॉर्गन स्टेनली ने अपनी ताजा इंडिया स्ट्रैटेजी रिपोर्ट में कहा है कि भारतीय बाजार के हालिया खराब प्रदर्शन ने निवेशकों के लिए प्रवेश का एक शानदार मौका (Compelling Entry Point) बनाया है। फर्म ने सेंसेक्स के लिए अलग-अलग परिदृश्यों के आधार पर लक्ष्य निर्धारित किए हैं:
- बेस-केस (Base-case): ब्रोकरेज ने दिसंबर 2026 के लिए सेंसेक्स का बेस टारगेट 95,000 बरकरार रखा है।
- बुल-केस (Bull-case): अनुकूल परिस्थितियों में बाजार के 1,07,000 (30% संभावना) या 1,10,000 (20% संभावना) के स्तर तक जाने की उम्मीद है।
- बियर-केस (Bear-case): प्रतिकूल स्थिति में सेंसेक्स गिरकर 76,000 के स्तर तक आ सकता है।
बाजार में तेजी के मुख्य कारण
ब्रोकरेज के अनुसार, भारतीय अर्थव्यवस्था और बाजार के पक्ष में कई महत्वपूर्ण संकेत मिल रहे हैं:
- RBI और रुपया: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रुपये को लेकर सकारात्मक सेंटीमेंट बनाया है, जबकि रुपया अभी भी अपनी वास्तविक वैल्यू से कम (Undervalued) है।
- मजबूत नीतियां: सरकार की नीतिगत गति मजबूत दिख रही है और घरेलू निवेशकों का भरोसा बाजार में बना हुआ है।
- कमाई में वृद्धि: सेंसेक्स की कंपनियों की कमाई (Earnings) में वित्त वर्ष 2028 तक सालाना 17% की दर से बढ़ोतरी की उम्मीद जताई गई है।
- आकर्षक वैल्यूएशन: रिपोर्ट में कहा गया है कि सोने (Gold) के संदर्भ में सेंसेक्स अब तक के सबसे सस्ते स्तरों में से एक पर है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और अन्य चुनौतियां
उम्मीदों के बीच मॉर्गन स्टेनली ने कुछ जोखिमों की ओर भी इशारा किया है। भारत के पास सीधे तौर पर AI आधारित कंपनियों की कमी एक चुनौती हो सकती है, जो भविष्य में सेवा निर्यात (Services Exports) को प्रभावित कर सकती है। इसके अलावा, वैश्विक विकास दर में गिरावट और भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitics) बाजार की गति को धीमा कर सकते हैं।
निष्कर्ष: निवेश का सही समय?
मॉर्गन स्टेनली का मानना है कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की पोजीशन पिछले कुछ महीनों में कमजोर हुई है, लेकिन हाई-फ्रीक्वेंसी डेटा दिखा रहा है कि कॉर्पोरेट अर्निंग साइकिल फिर से शुरू हो गई है। ऐसे में अगले 12 से 18 महीनों में भारतीय शेयर बाजार में बड़ी तेजी की प्रबल संभावना है