मानसून में सफेद चीनी की जगह गुड़ या देसी खांड लेने से पहले जानें सच्चाई। क्या ये वास्तव में ज्यादा हेल्दी हैं या इनका सेवन भी सीमित मात्रा में करना चाहिए?
मानसून का मौसम आते ही खानपान में भी काफी बदलाव देखने को मिलता है। ठंडे पेय की जगह गर्म चाय, कॉफी और काढ़ा पसंद आने लगता है। इसके साथ ही पकौड़े, हलवा और दूसरी पारंपरिक चीजों की क्रेविंग भी बढ़ सकती है। इस मौसम में भारतीय रसोई में इस्तेमाल होने वाली पारंपरिक चीजें एक बार फिर खाने का हिस्सा बन जाती हैं। इन्हीं में गुड़ और देसी खांड भी शामिल हैं। लंबे समय से गुड़ और देसी खांड को सफेद चीनी की तुलना में ज्यादा प्राकृतिक और सेहतमंद विकल्प के तौर पर प्रचारित किया जाता रहा है। लेकिन क्या वास्तव में इन दोनों को चीनी से बेहतर माना जा सकता है? विशेषज्ञों के अनुसार, तस्वीर इतनी सीधी नहीं है। गुड़ और देसी खांड भले ही सफेद चीनी की तुलना में कम प्रोसेस्ड हो सकते हैं और इनमें कुछ मात्रा में प्राकृतिक रूप से मौजूद खनिज भी पाए जा सकते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इन्हें हेल्थ फूड माना जाए। आखिरकार, तीनों ही शरीर को मुख्य रूप से शुगर उपलब्ध कराते हैं और इनका सेवन कितनी मात्रा में किया जा रहा है, यह ज्यादा महत्वपूर्ण है।
क्या गुड़ सफेद चीनी से ज्यादा हेल्दी है?
गुड़ को आमतौर पर सफेद चीनी का बेहतर विकल्प माना जाता है। इसका एक कारण यह है कि गुड़ बनाने की प्रक्रिया में गन्ने के रस को पूरी तरह से रिफाइन करके क्रिस्टलाइज्ड चीनी में नहीं बदला जाता। इसमें गुड़ बनने के दौरान शीरे यानी मोलासेस के कुछ घटक बने रह सकते हैं। इसी वजह से गुड़ में आयरन, कैल्शियम, पोटैशियम और कुछ अन्य खनिजों की थोड़ी मात्रा मौजूद हो सकती है। इसके बावजूद गुड़ को पोषक तत्वों का प्रमुख स्रोत मानना सही नहीं होगा। इसकी सामान्य मात्रा में मिलने वाले माइक्रोन्यूट्रिएंट्स इतने अधिक नहीं होते कि गुड़ को किसी जरूरी पोषण स्रोत के रूप में देखा जाए। इसलिए केवल सफेद चीनी की जगह गुड़ इस्तेमाल करने से आपकी डाइट अचानक हेल्दी नहीं हो जाती।
देसी खांड को लेकर भी समझें सच्चाई
देसी खांड या पारंपरिक तरीके से तैयार की गई शक्कर को भी अक्सर रिफाइंड सफेद चीनी से बेहतर बताया जाता है। इसका कारण इसका अपेक्षाकृत कम प्रसंस्कृत होना और रंग या स्वाद में अंतर होना हो सकता है। लेकिन कम प्रोसेस्ड होने का अर्थ यह नहीं है कि इसमें शुगर की मात्रा कम हो जाती है। देसी खांड भी मुख्य रूप से चीनी ही प्रदान करती है। इसलिए चाय, मिठाई या किसी अन्य व्यंजन में इसका इस्तेमाल करते समय मात्रा का ध्यान रखना जरूरी है। केवल इस आधार पर अधिक मात्रा में देसी खांड खाना कि यह पारंपरिक या प्राकृतिक है, सही तरीका नहीं है।
प्राकृतिक होने का मतलब कम कैलोरी नहीं
गुड़ और देसी खांड को लेकर सबसे आम गलतफहमी यह है कि प्राकृतिक या पारंपरिक होने के कारण इनमें कैलोरी कम होती है। वास्तव में ऐसा जरूरी नहीं है। गुड़ और चीनी दोनों ही ऊर्जा प्रदान करते हैं और ज्यादा मात्रा में सेवन करने पर कुल कैलोरी सेवन बढ़ सकता है। यदि कोई व्यक्ति वजन नियंत्रित करने की कोशिश कर रहा है तो सिर्फ चीनी हटाकर उसकी जगह गुड़ डालना पर्याप्त नहीं होगा। पूरे दिन में कितनी मिठास और कुल कितनी कैलोरी ली जा रही है, इस पर ध्यान देना ज्यादा जरूरी है।
मानसून में बढ़ सकती है मीठे की क्रेविंग
बारिश के मौसम में मौसम ठंडा और सुहावना होने के कारण कई लोगों को मीठी और गर्म चीजें खाने की इच्छा अधिक हो सकती है। चाय में गुड़, गर्म दूध में खांड या गुड़ से बने पारंपरिक पकवान इस दौरान पसंद किए जाते हैं। कभी-कभार सीमित मात्रा में इन्हें लेना सामान्य संतुलित डाइट का हिस्सा हो सकता है। समस्या तब होती है जब पूरे दिन चाय, मिठाई, बिस्किट और अन्य खाद्य पदार्थों के जरिए अतिरिक्त शुगर का सेवन लगातार बढ़ता रहता है। इसलिए मानसून में भी मीठी चीजों की कुल मात्रा पर नजर रखना जरूरी है।
ज्यादा चीनी से क्या हो सकता है नुकसान?
डाइट में अतिरिक्त शुगर की मात्रा लगातार ज्यादा रहने से कुल कैलोरी सेवन बढ़ सकता है। इससे वजन बढ़ने का जोखिम बढ़ सकता है और लंबे समय तक असंतुलित खानपान कई स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ा हो सकता है। खासतौर पर ऐसे लोगों को मीठे खाद्य पदार्थों और पेय पदार्थों के सेवन पर अधिक ध्यान देना चाहिए जिन्हें पहले से ब्लड शुगर या वजन से जुड़ी समस्या है। हालांकि, किसी एक खाद्य पदार्थ को पूरी तरह से अच्छा या खराब बताने के बजाय पूरी डाइट और व्यक्ति की जरूरत को ध्यान में रखना अधिक उचित है।
गुड़ को डाइट में कैसे शामिल करें?
अगर आपको गुड़ का स्वाद पसंद है तो इसे सीमित मात्रा में भोजन का हिस्सा बनाया जा सकता है। उदाहरण के लिए, मिठाई या मीठे पेय में बहुत ज्यादा चीनी डालने के बजाय थोड़ी मात्रा में गुड़ इस्तेमाल किया जा सकता है। लेकिन गुड़ का इस्तेमाल करने के बाद यह मान लेना कि अब मीठी चीज कितनी भी मात्रा में खाई जा सकती है, गलत होगा। इसी तरह गुड़ वाली चाय या दूध को भी रोजाना बड़ी मात्रा में लेने से बचना चाहिए।
चीनी, गुड़ या खांड—किसे चुनें?
अगर सवाल यह है कि चीनी, गुड़ और देसी खांड में से कौन सबसे ज्यादा हेल्दी है, तो इसका जवाब व्यक्ति की पूरी डाइट और सेवन की मात्रा पर निर्भर करता है। गुड़ और देसी खांड में सफेद चीनी की तुलना में कुछ अतिरिक्त घटक मौजूद हो सकते हैं, लेकिन दोनों को भी अतिरिक्त शुगर के स्रोत के रूप में ही देखना चाहिए। इसलिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी भी स्वीटनर का सेवन सीमित मात्रा में किया जाए।
कुल मिलाकर, मानसून में चीनी की जगह गुड़ या देसी खांड का इस्तेमाल स्वाद और पसंद के आधार पर किया जा सकता है, लेकिन इन्हें हेल्थ फूड समझकर ज्यादा मात्रा में खाना सही नहीं है। बेहतर स्वास्थ्य के लिए फल, सब्जियां, साबुत अनाज, दालें, प्रोटीन और पर्याप्त पानी को डाइट का हिस्सा बनाना ज्यादा महत्वपूर्ण है। प्राकृतिक या पारंपरिक स्वीटनर चुनने से ज्यादा जरूरी है कि कुल शुगर सेवन को संतुलित रखा जाए।