Midcap Mutual Funds: बाजार में करेक्शन के बीच मिडकैप फंड्स में बढ़ी निवेशकों की दिलचस्पी, सितंबर में आए ₹6,940 करोड़

Midcap Mutual Funds: बाजार में करेक्शन के बीच मिडकैप फंड्स में बढ़ी निवेशकों की दिलचस्पी, सितंबर में आए ₹6,940 करोड़

 

बाजार में हालिया गिरावट के बीच मिडकैप म्यूचुअल फंड्स में निवेश बढ़ा है। सितंबर में इस कैटेगरी में ₹6,940 करोड़ का शुद्ध निवेश आया, जो पिछले साल से करीब 37 फीसदी अधिक है।

इक्विटी बाजार में हालिया गिरावट के बीच निवेशकों का रुझान एक बार फिर ग्रोथ ओरिएंटेड निवेश की तरफ बढ़ता दिखाई दे रहा है। खासतौर पर Midcap Mutual Funds को लेकर निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी है। बाजार में आई हालिया करेक्शन ने कई मिडकैप शेयरों के वैल्यूएशन को पहले की तुलना में आकर्षक बनाया है। ऐसे में लंबी अवधि में पूंजी बढ़ाने की क्षमता तलाश रहे निवेशक मिडकैप फंड्स की ओर रुख कर रहे हैं। Association of Mutual Funds in India यानी AMFI के आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर में मिडकैप म्यूचुअल फंड कैटेगरी में 6,940 करोड़ रुपये का नेट इनफ्लो दर्ज किया गया। यह पिछले साल सितंबर के मुकाबले करीब 37 फीसदी अधिक है।

सितंबर में मिडकैप फंड्स में आया ₹6,940 करोड़ का निवेश

AMFI के आंकड़े बताते हैं कि सितंबर महीने में मिडकैप फंड्स में निवेशकों ने बड़ी मात्रा में पैसा लगाया। इस कैटेगरी में 6,940 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश आया, जो पिछले साल इसी महीने की तुलना में लगभग 37 फीसदी अधिक है। इससे संकेत मिलता है कि बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद निवेशक मिडकैप कंपनियों की लंबी अवधि की ग्रोथ क्षमता को लेकर सकारात्मक बने हुए हैं।

हालिया बाजार करेक्शन के बाद मिडकैप शेयरों में कुछ नरमी आई है। बाजार विश्लेषकों के मुताबिक, मौजूदा स्तरों पर कुछ मिडकैप कंपनियों के वैल्यूएशन पहले की तुलना में निवेशकों को अधिक आकर्षक लग सकते हैं। हालांकि, किसी भी फंड में निवेश से पहले जोखिम और निवेश अवधि को ध्यान में रखना जरूरी है।

Midcap Funds में क्यों बढ़ रही है दिलचस्पी?

मिडकैप म्यूचुअल फंड्स का मुख्य फोकस ऐसी कंपनियों में निवेश करना होता है जिनमें आने वाले वर्षों में कारोबार और कमाई बढ़ाने की क्षमता हो। इन फंड्स का उद्देश्य आम तौर पर लंबी अवधि में पूंजी में वृद्धि यानी Capital Appreciation हासिल करना होता है।

मिडकैप कंपनियां अक्सर अपने कारोबार को तेजी से विस्तार देने, नए बाजारों में प्रवेश करने और बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने के चरण में होती हैं। अगर इन कंपनियों की आय और कारोबार उम्मीद के मुताबिक बढ़ता है, तो लंबे समय में इनके शेयरों में भी मजबूत वृद्धि की संभावना बन सकती है।

₹1 लाख का निवेश बना ₹4.3 करोड़

मिडकैप फंड्स के लंबे समय के प्रदर्शन को समझने के लिए Nippon India Growth Mid Cap Fund का उदाहरण दिया जा सकता है। यह फंड 1995 में लॉन्च हुआ था। स्रोत में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, अगर किसी निवेशक ने शुरुआत के समय इस फंड में एकमुश्त 1 लाख रुपये लगाए होते, तो लंबी अवधि के प्रदर्शन के आधार पर यह निवेश आज करीब 4.3 करोड़ रुपये का हो सकता था।

फंड ने इस अवधि में करीब 22 फीसदी का CAGR दिया है। हालांकि, यह ऐतिहासिक प्रदर्शन है और इससे भविष्य में इसी तरह के रिटर्न की गारंटी नहीं मिलती। बाजार में निवेश हमेशा जोखिम के साथ आता है और खासतौर पर मिडकैप श्रेणी में उतार-चढ़ाव अपेक्षाकृत ज्यादा हो सकता है।

Edelweiss और Invesco के फंड्स का भी प्रदर्शन मजबूत

लंबी अवधि में कुछ अन्य मिडकैप फंड्स ने भी अच्छा प्रदर्शन किया है। स्रोत के मुताबिक, Edelweiss और Invesco Mutual Fund जैसे फंड हाउस की कुछ मिडकैप योजनाओं ने पिछले 10 वर्षों में करीब 17-19 फीसदी के बीच रिटर्न दिया है।

यह आंकड़े बताते हैं कि लंबी अवधि में अच्छी कंपनियों में निवेश करने वाले मिडकैप फंड्स ने निवेशकों के लिए संपत्ति निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हालांकि, अलग-अलग फंड की रणनीति, पोर्टफोलियो और जोखिम स्तर अलग हो सकते हैं।

Large Cap और Small Cap के बीच की श्रेणी

मिडकैप फंड्स को अक्सर Large Cap और Small Cap के बीच की श्रेणी माना जाता है। इन कंपनियों में बड़ी कंपनियों की तुलना में तेजी से बढ़ने की अधिक गुंजाइश हो सकती है, जबकि बहुत छोटी कंपनियों की तुलना में कारोबार के स्तर पर कुछ अधिक स्थिरता हो सकती है।

SEBI के वर्गीकरण के अनुसार, पूरी बाजार पूंजीकरण के आधार पर 101वीं से 250वीं रैंक वाली कंपनियों को मिडकैप कंपनियों की श्रेणी में रखा जाता है। इनमें से कई कंपनियां अपने शुरुआती कारोबारी जोखिमों से आगे निकल चुकी होती हैं, लेकिन अभी भी उनके पास बड़े स्तर पर विस्तार करने की संभावना बनी रहती है।

किन सेक्टरों में हैं मिडकैप कंपनियां?

मिडकैप कंपनियां कई तेजी से बढ़ने वाले क्षेत्रों में सक्रिय हैं। इनमें Specialized Manufacturing, Consumer Discretionary, Healthcare और Technology जैसे सेक्टर शामिल हैं। कई मिडकैप कंपनियां असंगठित क्षेत्र के कारोबार को संगठित बाजार में लाने या बड़ी स्थापित कंपनियों से बाजार हिस्सेदारी हासिल करने की कोशिश कर रही हैं।

अगर ऐसी कंपनियां अपने कारोबार का विस्तार करने और मुनाफे में लगातार वृद्धि करने में सफल होती हैं, तो उनके लिए लंबी अवधि में वैल्यू क्रिएशन की संभावना बढ़ सकती है।

5 से 10 साल की अवधि में बन सकता है धन

मिडकैप फंड्स को आमतौर पर लंबी अवधि के निवेश के लिए उपयुक्त माना जाता है, क्योंकि इनमें निवेश करने वाली कंपनियों को कारोबार और कमाई बढ़ाने के लिए समय की जरूरत होती है। पांच से दस साल या उससे अधिक की निवेश अवधि में ग्रोथ आधारित मिडकैप फंड्स लंबी अवधि में संपत्ति निर्माण का माध्यम बन सकते हैं।

हालांकि, इनके साथ Large Cap Funds की तुलना में अधिक उतार-चढ़ाव का जोखिम भी रहता है। बाजार में गिरावट के दौरान मिडकैप शेयरों पर दबाव अपेक्षाकृत अधिक हो सकता है। इसलिए निवेशकों को अपनी जोखिम क्षमता, लक्ष्य और निवेश अवधि के आधार पर फैसला लेना चाहिए। हालिया करेक्शन के बीच मिडकैप फंड्स में बढ़ता निवेश इस बात का संकेत है कि निवेशक बाजार की अस्थिरता के बावजूद लंबी अवधि की ग्रोथ संभावनाओं पर नजर बनाए हुए हैं।

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