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दिल्ली नगर निगम के मुख्यालय में जनता के करोड़ों के टैक्स से खरीदे गए इलेक्ट्रिक वाहन कबाड़ में तब्दील हो रहे हैं।
एक तरफ दिल्ली की सत्ता पर काबिज ‘डबल इंजन’ सरकार राजधानी को ‘इलेक्ट्रिक सिटी’ बनाने का ढिंढोरा पीट रही है, तो दूसरी तरफ दिल्ली नगर निगम (MCD) के सिविक सेंटर की पार्किंग में तैनात करोड़ों की इलेक्ट्रिक गाड़ियाँ सालों से धूल फांक रही हैं। ये लावारिस खड़ी गाड़ियाँ इस बात का जीता-जागता सबूत हैं कि बीजेपी की कथनी और करनी में कितना बड़ा और खतरनाक अंतर है।
करोड़ों का टैक्सपेयर का पैसा बर्बादी की भेंट
सवाल यह है कि आखिर आम जनता की गाढ़ी कमाई से खरीदे गए इन वाहनों का असली मकसद क्या था? अगर इन इलेक्ट्रिक वाहनों को इस्तेमाल ही नहीं करना था, तो इन्हें खरीदा ही क्यों गया? सिविक सेंटर की बेसमेंट में कबाड़ बन चुकी ये गाड़ियाँ चीख-चीख कर गवाही दे रही हैं कि कैसे सरकारी खजाने का दुरुपयोग किया गया है। क्या जनता का पैसा इसलिए लिया जाता है कि उसे सरकारी दफ्तरों की पार्किंग में सड़ने के लिए छोड़ दिया जाए?
नीति नई, पर हकीकत पुरानी और खोखली
भाजपा की चार इंजान सरकार की कथनी और करनी में ज़मीन-आसमान का फर्क देखों‼️
MCD मुख्यालय के सिविक सेंटर की पार्किंग में करोड़ों रुपये की लागत से खरीदी/लीज़ पर ली गई। यह 75 इलेक्ट्रिक गाड़ियां वर्षों से धूल खा रही हैं, जबकि दूसरी ओर भाजपा सीएम रेखा गुप्ता नई EV Policy का ढिंढोरा पीट… pic.twitter.com/cVTjM4tvYA
— Ankush Narang (@AnkushNarang_) June 30, 2026
एक तरफ मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ‘नई EV पॉलिसी’ को लेकर जोर-शोर से प्रचार कर रही हैं और दिल्ली को प्रदूषण मुक्त बनाने के बड़े-बड़े दावे और सपने दिखाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उन्हीं की नाक के नीचे MCD के मुख्यालय में ही पुरानी खरीदी गई इलेक्ट्रिक गाड़ियाँ दम तोड़ रही हैं। क्या नई पॉलिसी केवल कागजों, विज्ञापनों और फोटो सेशन के लिए है? या फिर इसका मकसद भी पुरानी गाड़ियों की तरह केवल सरकारी फंड की बंदरबांट करना है?
जवाबदेही किसकी? प्रशासन मौन क्यों?
इन वाहनों के रखरखाव की जिम्मेदारी किसकी है? इन पर करोड़ों खर्च करने के बाद इन्हें लावारिस किसने छोड़ा? पिछले कई सालों से ये गाड़ियाँ कबाड़ में तब्दील हो रही हैं, लेकिन प्रशासन की आंखें अभी भी बंद हैं।
- जनता की गाढ़ी कमाई के इस अपमान का जवाब कौन देगा?
- गाड़ियों की खरीद के समय हुई धांधली की अब तक जांच क्यों नहीं हुई?
- क्या MCD की ये करोड़ों की संपत्ति अब केवल एक कबाड़खाना बनकर रह गई है?
बीजेपी को जनता को इसका हिसाब देना ही होगा। जब तक इन गाड़ियों के इस्तेमाल न होने के पीछे के असली कारणों का खुलासा नहीं होता और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई नहीं होती, तब तक नई EV पॉलिसी की घोषणाएं केवल जनता की आंखों में धूल झोंकने जैसा एक और छलावा ही मानी जाएंगी। दिल्ली की जनता अब केवल खोखले वादे नहीं, बल्कि ठोस जवाब और कार्रवाई चाहती है।