मालदीव में बड़ा हादसा: समुद्र से 160 फीट नीचे गुफाओं की खोज के दौरान 5 इतालवी पर्यटकों की मौत, मरीन बायोलॉजिस्ट और उनकी बेटी भी शामिल
मालदीव के वावु एटोल में एक बड़ा हादसा हो गया है। समुद्र से 160 फीट नीचे गुफाओं की खोज के दौरान मशहूर मरीन बायोलॉजिस्ट समेत 5 इतालवी पर्यटकों की ऑक्सीजन टॉक्सिसिटी के कारण दर्दनाक मौत हो गई।
दुनियाभर के पर्यटकों के लिए ‘जन्नत’ माना जाने वाला मालदीव (Maldives) एक बेहद दर्दनाक और रोंगटे खड़े कर देने वाले हादसे का गवाह बना है। मालदीव में एक लग्जरी स्कूबा डाइविंग एक्सपीडिशन (Scuba Diving Expedition) के दौरान समुद्र तल से करीब 160 फीट (50 मीटर) नीचे गहरे पानी की गुफाओं की खोज करते समय 5 अनुभवी इतालवी (Italian) पर्यटकों की मौत हो गई।
14 मई 2026 को घटित हुई इस दर्दनाक घटना ने पूरी टेक और वैज्ञानिक दुनिया को झकझोर कर रख दिया है। यह हादसा मालदीव के प्रसिद्ध वावु एटोल (Vaavu Atoll) के पास अलिमाथा द्वीप (Alimathaa Island) की रहस्यमयी अंडरवाटर केव्स (पानी के नीचे की गुफाओं) में हुआ। इस हादसे ने गहरे समुद्र में डाइविंग के सबसे बड़े और अदृश्य खतरों में से एक—ऑक्सीजन टॉक्सिसिटी (Oxygen Toxicity)—की ओर दुनिया का ध्यान एक बार फिर खींचा है।
हादसे का शिकार कौन लोग हुए?
इस अभियान में शामिल सभी लोग बेहद अनुभवी और समुद्र विज्ञान के जानकार थे। मृतकों में इटली की जेनोआ यूनिवर्सिटी (University of Genoa) की एक बेहद प्रसिद्ध पारिस्थितिकीविद् (Ecology Professor) और मरीन बायोलॉजिस्ट (समुद्री जीवविज्ञानी) मोनिका मोंटेफालकोन (Monica Montefalcone – 51 वर्ष) और उनकी 20 वर्षीय बेटी जियोर्जिया सोमाकल (Giorgia Sommacal) शामिल थीं।
उनके अलावा इस हादसे में रिसर्च फेलो मूरियल ओडेनिनो (Muriel Oddenino), मरीन बायोलॉजी से ग्रेजुएट फेडेरिको गुआल्टिएरी (Federico Gualtieri) और बोट ऑपरेशंस मैनेजर व डाइविंग इंस्ट्रक्टर जियानलुका बेनेडेटी (Gianluca Benedetti) ने भी अपनी जान गंवा दी।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह ग्रुप अलिमाथा द्वीप के आसपास पानी के नीचे बनी गुफाओं के नेटवर्क को एक्सप्लोर करने के लिए करीब 50 मीटर (160 फीट) की गहराई तक उतरा था, लेकिन तय समय के बाद भी वे सतह पर वापस नहीं लौटे। रेस्क्यू टीम को एक शव गुफा के भीतर मिला है, जबकि बाकी शव भी उसी गुफा तंत्र में फंसे होने की आशंका है, जो लगभग 60 मीटर की गहराई तक फैला हुआ है
क्या है ऑक्सीजन टॉक्सिसिटी (Oxygen Toxicity), जिसने ली 5 जानें?
शुरुआती जांच और गोताखोरी विशेषज्ञों के अनुसार, इस हादसे की मुख्य वजह ‘ऑक्सीजन टॉक्सिसिटी’ को माना जा रहा है। आम तौर पर हम इंसान जीवित रहने के लिए ऑक्सीजन सांस के रूप में लेते हैं, लेकिन जब कोई गोताखोर समुद्र की अत्यधिक गहराई में जाता है, तो पानी का दबाव (Atmospheric Pressure) कई गुना बढ़ जाता है।160 फीट की गहराई पर पानी का दबाव सतह के मुकाबले लगभग 6 गुना ज्यादा होता है। इस अत्यधिक दबाव में जब कोई डाइवर सामान्य हवा या गलत अनुपात वाली गैस (जैसे नाइटॉक्स) के जरिए सांस लेता है, तो ऑक्सीजन का आंशिक दबाव ($P_{O_2}$) एक खतरनाक स्तर ($1.4\text{ to }1.6\text{ ata}$ से ऊपर) तक पहुंच जाता है
।इसके कारण डाइवर को सेंट्रल नर्वस सिस्टम (CNS) ऑक्सीजन टॉक्सिसिटी हो जाती है। इसके लक्षण इतने अचानक और गंभीर होते हैं कि डाइवर को संभलने का मौका भी नहीं मिलता। डाइवर को पानी के भीतर ही अचानक मिर्गी (Epileptic Seizures) जैसे बेहद तेज दौरे पड़ने लगते हैं। इस स्थिति में डाइवर के मुंह से उसका ऑक्सीजन रेगुलेटर (माउथपीस) छूट जाता है और वह तुरंत डूब जाता है। आशंका है कि गुफा के भीतर एक साथ कई डाइवर्स इसका शिकार हुए या फिर एक-दूसरे को बचाने के चक्कर में सभी की मौत हो गई।
गहरे समुद्र की गुफाओं का अनजाना खतरा और ‘नाइट्रोजन नार्कोसिस’
160 फीट की गहराई पर सिर्फ ऑक्सीजन टॉक्सिसिटी ही नहीं, बल्कि नाइट्रोजन नार्कोसिस (Nitrogen Narcosis) का खतरा भी बढ़ जाता है, जिसे ‘गहराई का नशा’ (Rapture of the Deep) भी कहा जाता है। अत्यधिक दबाव में नाइट्रोजन गैस इंसानी दिमाग पर किसी नशीली दवा या अल्कोहल जैसा असर डालती है।
इसके प्रभाव में आकर बेहद अनुभवी डाइवर भी अपनी सोचने-समझने की क्षमता खो बैठता है और वो दिशा भ्रम (Disorientation) का शिकार हो जाता है। अंधेरी और तंग गुफाओं के भीतर जहां रास्ता भटकने का डर हमेशा रहता है, वहां नाइट्रोजन का नशा और ऑक्सीजन का जहर मिलकर एक मौत का जाल बन जाता है, जिससे बच निकलना नामुमकिन हो जाता है।
वैज्ञानिक जगत में शोक की लहर
प्रोफेसर मोनिका मोंटेफालकोन की मौत से समुद्री विज्ञान और पर्यावरण अनुसंधान जगत को एक अपूरणीय क्षति हुई है। वे जेनोआ यूनिवर्सिटी में समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों पर अपने क्रांतिकारी शोध के लिए जानी जाती थीं। वे अपनी बेटी और होनहार छात्रों को प्रैक्टिकल रिसर्च सिखाने के लिए मालदीव लेकर आई थीं, लेकिन इस एडवेंचर का अंत इतने भयानक रूप में होगा, इसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी।
एडवेंचर के शौकीनों के लिए एक सख्त चेतावनी
मालदीव का यह हादसा इस बात की याद दिलाता है कि इंसान चाहे कितना भी आधुनिक हो जाए, प्रकृति और भौतिकी (Physics) के नियमों के आगे वह हमेशा बौना ही रहेगा। टेक्निकल डीप-सी डाइविंग में गैसों के मिश्रण का गणित जरा सा भी बिगड़ने पर क्या अंजाम हो सकता है, यह घटना उसका सबसे बड़ा और दुखद उदाहरण है।