वर्ल्ड बिस्किट डे पर आइए 90 के दशक की उन यादों को ताजा करें, जब पार्ले-जी और बॉर्बन जैसी छोटी-छोटी खुशियां हमारे बचपन का सबसे बड़ा हिस्सा हुआ करती थीं।
29 मई, 2026—आज ‘वर्ल्ड बिस्किट डे’ है! यह दिन हमें याद दिलाता है कि कैसे चाय के साथ बिस्किट का मेल हमारे जीवन का एक अभिन्न हिस्सा बन गया है। जब हम आज के बिस्कुटों की बात करते हैं, तो मन में उन बिस्कुटों की यादें ताजा हो जाती हैं जो 90 के दशक के बच्चों के लिए किसी ‘खजाने’ से कम नहीं थे। वह दौर न केवल स्वाद का था, बल्कि उस दौर के बिस्कुटों के साथ जुड़ी भावनाओं का भी था। आज के इस विशेष लेख में, आइए 90 के दशक की उस सुनहरी दुनिया में वापस चलते हैं और उन प्रतिष्ठित बिस्कुटों को याद करते हैं जिन्होंने हमारे बचपन को इतना खास बनाया था।
90 के दशक का स्वाद: एक पुरानी याद
90 का दशक वह समय था जब इंटरनेट और सोशल मीडिया की दुनिया से हम दूर थे। उस समय खुशियों के मायने छोटे होते थे—शाम को स्कूल से आने के बाद चाय या दूध के साथ मिलने वाला बिस्किट का पैकेट। उस दौर के बिस्कुटों की पैकेटिंग आज जितनी रंगीन तो नहीं थी, लेकिन उनके अंदर की मिठास आज भी हमारे जेहन में बसी है। ‘पार्ले-जी’ के साथ दूध डुबोकर खाने की वह परंपरा हो या ‘गुड डे’ की महक, हर बिस्किट के पीछे एक कहानी छिपी है।
पार्ले-जी: बचपन का पर्याय
90 के दशक के हर बच्चे के बचपन का सबसे बड़ा साथी अगर कोई था, तो वह था—’पार्ले-जी’। यह सिर्फ एक बिस्किट नहीं, बल्कि एक इमोशन था। पांच रुपये के छोटे से पैकेट में मिलने वाली वह सादगी आज भी बरकरार है। उस समय ‘पार्ले-जी’ को चाय में डुबोकर खाना एक कला मानी जाती थी, और अगर वह बिस्किट चाय के अंदर टूटकर गिर जाए, तो वह आज भी किसी छोटे-मोटे सदमे से कम नहीं होता। यह आज भी दुनिया के सबसे लोकप्रिय बिस्कुटों में से एक है, जो बिना किसी दिखावे के हर भारतीय घर की मेज पर मौजूद रहा।
बिस्कुट जो बनते थे हमारी छोटी-छोटी खुशियां
90 के दशक में बिस्कुटों की विविधता इतनी अधिक नहीं थी, लेकिन जो थे, वे लाजवाब थे। ‘गुड डे’ के वे नट और बटर वाले बिस्कुट, जो हाथ में आते ही टूट जाते थे, उनका स्वाद आज भी किसी को भी भावुक कर सकता है। इसके अलावा, ‘मोनैको’ (Monaco) के नमकीन बिस्कुटों का अपना ही क्रेज था। उस पर थोड़ा सा प्याज, टमाटर और धनिया रखकर ‘बिस्किट चाट’ बनाने की वह तकनीक, जिसे हम सबने कभी न कभी आजमाया होगा, आज भी एक बेहतरीन स्नैक है। वहीं, ‘मैरी गोल्ड’ (Marie Gold) वह बिस्किट था जिसे घर के बड़े-बुजुर्ग अपनी चाय के साथ गर्व से खाते थे और बच्चों को भी ‘हल्का’ नाश्ता कहकर खिलाते थे।
क्रीम बिस्कुट का जादू
अगर कोई मेहमान घर पर आता था, तो क्रीम बिस्कुट का पैकेट खुलना पक्का था। ‘बॉर्बन’ (Bourbon) बिस्कुट—दो चॉकलेट बिस्कुटों के बीच वह मीठी क्रीम और ऊपर बिखरी चीनी के दाने, किसी चॉकलेट से कम नहीं थे। वहीं ‘हाइड एंड सीक’ (Hide & Seek) की एंट्री जब हुई थी, तो उसने चॉकलेट प्रेमियों की दुनिया ही बदल दी थी। उन दिनों ये बिस्कुट ‘प्रीमियम’ माने जाते थे और इनके एक-एक टुकड़े को बड़े संभालकर खाया जाता था। इन बिस्कुटों ने हमें सिखाया कि कैसे छोटी-छोटी चीजों में खुशियां ढूंढी जाती हैं।
आज की पीढ़ी और बिस्कुट का बदलता स्वरूप
आज 2026 में, बाजार में बिस्कुटों के सैकड़ों विकल्प मौजूद हैं—हेल्थ बिस्कुट, डाइजेस्टिव, ग्लूटेन-फ्री और न जाने क्या-क्या। स्वाद और बनावट में काफी बदलाव आया है। आज की पीढ़ी शायद इन ब्रांडों को पुराने जमाने की चीज मानती हो, लेकिन 90 के दशक के लिए ये केवल बिस्कुट नहीं, बल्कि उनके बचपन के वे सुनहरे पल हैं जो कभी वापस नहीं आएंगे। उन बिस्कुटों में जो मिठास थी, वह शायद आज के अत्याधुनिक फ्लेवर में न मिल सके।
वर्ल्ड बिस्किट डे पर, हम केवल बिस्कुट नहीं खा रहे होते, बल्कि हम अपनी यादों को ताजा कर रहे होते हैं। 90 के दशक के वो बिस्कुट हमें उस समय की सादगी और खुशहाली की याद दिलाते हैं जब दुनिया इतनी तेज नहीं थी। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में, अगर आप भी एक कप चाय और अपने बचपन के उस पसंदीदा बिस्किट के साथ थोड़ा समय बिता सकें, तो यकीन मानिए, वह सुकून आज के किसी भी बड़े स्वाद से ज्यादा मीठा होगा। तो चलिए, आज के दिन उस पुराने ज़माने के किसी बिस्कुट के पैकेट को खोजते हैं और अपने बचपन को एक बार फिर से जीते हैं।