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उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में होने वाली भस्म आरती का विशेष धार्मिक महत्व है। इस आरती में महिलाओं को सीधे शामिल होने की अनुमति नहीं है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान भगवान महाकाल निर्वस्त्र होते हैं और उनका उग्र रूप देखने योग्य होता है, जिसे महिलाओं के लिए वर्जित माना गया है। इसलिए पुरुषों को धोती पहनना और महिलाओं को घूंघट करना अनिवार्य है।
महाकाल की भस्म आरती में महिलाओं का प्रतिबंध क्यों?
पौराणिक कथाओं के अनुसार, भस्म आरती के दौरान महाकाल का विधिपूर्वक स्नान कराया जाता है और उनके वस्त्र व आभूषण हटाए जाते हैं। इस समय महाकाल का रूप पूर्ण रूप से निर्वस्त्र और उग्र होता है। इसलिए धार्मिक नियमों के अनुसार, महिलाओं के लिए इस आरती में शामिल होना वर्जित है।
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भस्म आरती का धार्मिक महत्व
महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग 12 ज्योतिर्लिंगों में तीसरे स्थान पर स्थित है। भस्म आरती ब्रह्म मुहूर्त में होती है और इसमें शामिल होने से अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति मिलती है और नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है। परंपरा के अनुसार, प्राचीन समय में महादेव ने राक्षस दूषण का वध कर उसकी भस्म से शृंगार किया था।
भस्म आरती के नियम
- पुरुषों के लिए धोती पहनना अनिवार्य है, और धोती सिली हुई नहीं होनी चाहिए।
- महिलाओं को आरती के दौरान घूंघट करना होता है।
- आरती में शामिल होने के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन बुकिंग की जाती है।
- आरती शुरू होने के बाद गर्भगृह में प्रवेश बंद कर दिया जाता है।
- मोबाइल फोन, कैमरा और चमड़े की सामग्री ले जाने की अनुमति नहीं है।
महाकाल की भस्म आरती अपनी धार्मिक परंपरा, नियम और भव्यता के कारण देश-विदेश में प्रसिद्ध है। यह श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत पवित्र अनुभव माना जाता है।