मां दुर्गा के प्रमुख शक्तिपीठ: जहां दर्शन करने से मिलती है सभी बाधाओं से मुक्ति

मां दुर्गा के प्रमुख शक्तिपीठ: जहां दर्शन करने से मिलती है सभी बाधाओं से मुक्ति

जानें मां दुर्गा के 9 प्रमुख शक्तिपीठ (Maa Durga Shaktipeeth) के बारे में, जहां शारदीय नवरात्रि में दर्शन करने से मिलती है आध्यात्मिक शक्ति, मानसिक शांति और सभी बाधाओं से मुक्ति।

शारदीय नवरात्र में मां दुर्गा के शक्तिपीठों (Maa Durga Shaktipeeth Temples) का पूजन करने से न केवल जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, बल्कि भक्तों को मानसिक शांति, आध्यात्मिक मार्गदर्शन और सभी बाधाओं से मुक्ति भी मिलती है। इस लेख में हम आपको मां दुर्गा के 9 प्रमुख शक्तिपीठों और उनके महत्व के बारे में बता रहे हैं।

शारदीय नवरात्र और शक्तिपीठों का महत्व

नवरात्रि का पर्व देवी दुर्गा की शक्ति और उनके विभिन्न रूपों के सम्मान में मनाया जाता है। यह नौ दिन का पावन उत्सव भक्तों के लिए साहस, ऊर्जा और आध्यात्मिक शक्ति का स्रोत होता है। शक्तिपीठों को देवी सती के शरीर और आभूषणों के पवित्र अवशेषों से जुड़े स्थल माना जाता है।

प्रमुख मां दुर्गा के शक्तिपीठ और उनकी मान्यता

1. अंबाजी शक्तिपीठ, गुजरात 

गुजरात के बनासकांठा जिले में स्थित यह शक्तिपीठ देवी सती के हृदय गिरने के कारण पवित्र माना जाता है। यहां मूर्ति की बजाय ‘श्री विसा यंत्र’ की पूजा होती है। नवरात्रि में विशेष पूजा, गरबा और भजन-कीर्तन आयोजित होते हैं।

2. बहुला देवी शक्तिपीठ, बंगाल 

पश्चिम बंगाल के वर्धमान जिले के केतुग्राम में स्थित यह स्थल देवी सती के बायें हाथ गिरने से प्रसिद्ध है। यहां की पूजा मानसिक शांति, संकट निवारण और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती है।

also read: तुलसी विवाह 2025: घर में जल्दी बजेंगी शहनाइयां, जानें…

3. नैना देवी शक्तिपीठ, हिमाचल प्रदेश

हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में स्थित यह शक्तिपीठ देवी सती की आंख गिरने के कारण प्रसिद्ध है। यहां की पूजा से नेत्र संबंधी रोगों में लाभ और मानसिक शांति मिलती है।

4. हिंगलाज शक्तिपीठ, बलूचिस्तान, पाकिस्तान

बलूचिस्तान में स्थित यह शक्तिपीठ देवी सती के सिर गिरने के कारण पवित्र माना जाता है। यहां वसंत ऋतु में ‘हिंगलाज यात्रा’ आयोजित होती है, जिसमें हजारों श्रद्धालु भाग लेते हैं।

5. मणिकर्णिका शक्तिपीठ, वाराणसी, उत्तर प्रदेश 

वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर स्थित यह शक्तिपीठ देवी सती के दाहिने कान और कुंडल गिरने के कारण प्रसिद्ध है। यहां की पूजा जीवन में सकारात्मकता और शांति लाती है।

6. हरसिद्धि देवी शक्तिपीठ, उज्जैन, मध्य प्रदेश

उज्जैन में स्थित यह शक्तिपीठ देवी सती की कोहनी गिरने से प्रसिद्ध है। यह देवी शक्ति और स्वास्थ्य की रक्षा करती हैं।

7. कालिका देवी शक्तिपीठ, गुजरात 

पावागढ़ में स्थित यह शक्तिपीठ देवी सती के दाहिने पैर का अंगूठा गिरने के कारण शक्ति, साहस और सफलता का प्रतीक माना जाता है।

8. कांची देवगर्भ शक्तिपीठ, तमिलनाडु 

कांचीवेरम में स्थित यह शक्तिपीठ ज्ञान, आध्यात्मिक विकास और सुख-समृद्धि का प्रतीक है। देवी सती के कंकाल के गिरने के कारण इसे शक्तिपीठ का दर्जा प्राप्त है।

9. विमला देवी शक्तिपीठ, पुरी, ओडिशा 

पुरी में स्थित यह शक्तिपीठ देवी सती की नाभि गिरने के कारण पवित्र माना जाता है। यहां देवी विमला को जगन्नाथ मंदिर की रक्षक देवी माना जाता है।

Related posts

वट सावित्री व्रत 2026: 16 मई को रखा जाएगा व्रत; जानें बरगद के पेड़ पर क्यों लपेटा जाता है 7 बार कच्चा सूत

शनि देव की ‘हिट लिस्ट’ में हैं ऐसे लोग; इन 3 गलतियों की न्यायाधीश के दरबार में नहीं मिलती कोई माफी

Adhik Maas 2026: अधिकमास में भूलकर भी न करें ये काम, वरना भुगतने पड़ सकते हैं अशुभ परिणाम; जानें वर्जित कार्यों की पूरी लिस्ट

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Read More