ईरान संघर्ष के कारण जेट ईंधन की कीमतें दोगुनी होने के बाद लुफ्थांसा 20,000 उड़ानें रद्द करने जा रही है। जानें विमानन क्षेत्र पर युद्ध का क्या प्रभाव पड़ रहा है।
ईरान संघर्ष के बीच वैश्विक विमानन क्षेत्र (Aviation Sector) पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। जर्मनी की प्रमुख विमानन कंपनी डॉयचे लुफ्थांसा एजी (Lufthansa) ने अपने यूरोपीय ग्रीष्मकालीन शेड्यूल (Summer Schedule) से लगभग 20,000 शॉर्ट-हॉल उड़ानें रद्द करने की घोषणा की है। एयरलाइन ने यह कड़ा फैसला जेट ईंधन (Jet Fuel) की आसमान छूती कीमतों और मुनाफे में आती कमी के कारण लिया है।
ईंधन बचाने के लिए उठाया बड़ा कदम
लुफ्थांसा के अनुसार, उड़ानों में की गई यह कटौती उपलब्ध सीट-किलोमीटर का लगभग 1 प्रतिशत होगी। इस कटौती से एयरलाइन को लगभग 40,000 टन जेट ईंधन बचाने में मदद मिलेगी। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान युद्ध की शुरुआत के बाद से ईंधन की लागत दोगुनी हो गई है, जिसके कारण दुनिया के प्रमुख वाहकों में से एक लुफ्थांसा को यह कड़ा परिचालन निर्णय लेना पड़ा है।
- तत्काल प्रभाव: लगभग 120 उड़ानों का पहला जत्था मंगलवार से रद्द कर दिया गया है, जो मई के अंत तक प्रभावी रहेगा।
- अगला चरण: ग्रीष्मकालीन सीजन के बाकी शेड्यूल में व्यापक कटौती की घोषणा अप्रैल के अंत या मई की शुरुआत में होने की उम्मीद है।
लागत नियंत्रण के लिए लुफ्थांसा की आक्रामक रणनीति
ईंधन की कीमतों के अलावा, लुफ्थांसा अन्य आंतरिक चुनौतियों से भी जूझ रही है। हाल ही में कंपनी ने लागत कम करने के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं:
- रीजनल यूनिट का बंद होना: पिछले सप्ताह लुफ्थांसा ग्रुप ने अपनी क्षेत्रीय इकाई ‘लुफ्थांसा सिटीलाइन’ को बंद करने की घोषणा की थी।
- पुराने विमानों को हटाया: कंपनी ने 27 पुराने विमानों को उड़ान से हटा दिया है (Grounded), जो अधिक ईंधन खपत के लिए जाने जाते थे।
- मजदूर असंतोष: ईंधन संकट के साथ-साथ एयरलाइन पायलटों और केबिन क्रू की हड़ताल जैसी समस्याओं का भी सामना कर रही है।
वैश्विक विमानन क्षेत्र पर भी दबाव
सिर्फ लुफ्थांसा ही नहीं, बल्कि दुनिया की अन्य बड़ी एयरलाइंस भी अपनी क्षमता कम कर रही हैं। विमानन विश्लेषक फर्म सिरियम लिमिटेड (Cirium Ltd) के अनुसार:
- मई के लिए वैश्विक एयरलाइन क्षमता में पहले ही लगभग 3 प्रतिशत की कमी की जा चुकी है।
- दुनिया की 20 सबसे बड़ी एयरलाइंस में से लगभग सभी ने अपनी उड़ानों में कटौती करना शुरू कर दिया है।
- लुफ्थांसा ने अपने बयान में जोर दिया कि इस ‘ऑप्टिमाइजेशन’ प्रक्रिया का उद्देश्य बाजार के उतार-चढ़ाव के बीच दक्षता बनाए रखना है, ताकि मांग और लागत के अनुसार मार्गों को बदला या रद्द किया जा सके।