LNJP अस्पताल में सड़क हादसे में घायल पत्रकार निधि तिवारी ने इलाज में देरी और कथित दुर्व्यवहार के आरोप लगाए। सौरभ भारद्वाज ने दिल्ली की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाए।
दिल्ली के लोकनायक जयप्रकाश अस्पताल (LNJP) में सड़क हादसे में घायल एक महिला पत्रकार के इलाज में कथित देरी का मामला सामने आया है। पत्रकार निधि तिवारी ने अपने अनुभव को साझा करते हुए अस्पताल की इमरजेंसी व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनके मुताबिक, सड़क हादसे में उनका दाहिना पैर बुरी तरह घायल हो गया था और लगातार खून बह रहा था। इसके बावजूद अस्पताल पहुंचने के बाद करीब दो घंटे तक उन्हें समुचित इलाज नहीं मिल सका। इस मामले को लेकर दिल्ली के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) नेता सौरभ भारद्वाज ने भी दिल्ली की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए पूछा कि गंभीर रूप से घायल मरीज को तत्काल उपचार क्यों नहीं मिला।
पहले कागजी कार्रवाई, फिर इलाज का इंतजार
निधि तिवारी के अनुसार, दुर्घटना के बाद जब उन्हें LNJP अस्पताल ले जाया गया तो उनकी हालत गंभीर थी। पैर में गंभीर चोट के कारण लगातार रक्तस्राव हो रहा था, लेकिन कथित तौर पर तत्काल उपचार शुरू करने के बजाय पहले कागजी कार्रवाई और अन्य औपचारिकताओं का सामना करना पड़ा। उन्होंने दावा किया कि इलाज के लिए उन्हें लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा। उनका कहना है कि गंभीर स्थिति में मरीज और उसके परिवार की प्राथमिकता उपचार होती है, न कि लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया।
दो घंटे से अधिक इंतजार का दावा
पत्रकार द्वारा साझा किए गए अनुभव के अनुसार, अस्पताल की इमरजेंसी में उन्हें करीब दो घंटे तक पर्याप्त उपचार नहीं मिला। उन्होंने बताया कि पैर की गंभीर चोट और लगातार खून बहने के बावजूद उपचार की प्रक्रिया अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ी। उन्होंने अस्पताल में ड्रेसिंग और प्राथमिक उपचार को लेकर भी सवाल उठाए। उनके मुताबिक, हाथ में लगी चोट के लिए भी उन्हें खुद दवा लगाने की स्थिति का सामना करना पड़ा। इन आरोपों ने अस्पताल की इमरजेंसी सेवाओं और गंभीर मरीजों के प्रति चिकित्सा व्यवस्था की तत्परता पर बहस छेड़ दी है।
इलाज को लेकर सवाल करने पर कथित दुर्व्यवहार
निधि तिवारी ने अपने अनुभव में अस्पताल के कुछ कर्मचारियों के व्यवहार पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि जब उन्होंने इलाज में हो रही देरी को लेकर सवाल किया और घटनाक्रम को रिकॉर्ड करने की कोशिश की, तो कथित तौर पर अस्पताल के कर्मचारियों की ओर से उनके साथ रूखा व्यवहार किया गया और उन्हें धमकाने जैसी स्थिति का सामना करना पड़ा। हालांकि, इन आरोपों पर अस्पताल प्रशासन या संबंधित कर्मचारियों का पक्ष इस विवरण में सामने नहीं आया है। ऐसे में मामले के सभी पक्षों की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना महत्वपूर्ण होगा।
परिवार ने दूसरे अस्पताल में कराया इलाज
दिल्ली के LNJP अस्पताल में एक गंभीर सड़क हादसे में घायल महिला पत्रकार का अनुभव बेहद चिंताजनक है।
एक्सीडेंट के कारण उनका पैर बुरी तरह क्षतिग्रस्त था और लगातार खून बह रहा था, लेकिन करीब दो घंटे तक उन्हें उचित इलाज नहीं मिला। पहले कागजी कार्रवाई, फिर इंतज़ार और इलाज के लिए सवाल… https://t.co/jF4kf4RvJM
— Aam Aadmi Party Delhi (@AAPDelhi) August 19, 2026
निधि तिवारी के अनुसार, LNJP अस्पताल में उपचार में देरी के बाद उनके परिवार ने उन्हें दूसरे अस्पताल में ले जाने का फैसला किया। वहां उन्हें उचित चिकित्सा सहायता मिली और उनके पैर की सर्जरी की गई। परिवार द्वारा अस्पताल बदलने का निर्णय इस पूरे मामले को और गंभीर बनाता है। घायल मरीज के लिए शुरुआती घंटों में चिकित्सा सहायता बेहद महत्वपूर्ण होती है, खासकर तब जब गंभीर चोट के साथ लगातार रक्तस्राव हो रहा हो। इसी वजह से पत्रकार द्वारा साझा किए गए अनुभव ने सरकारी अस्पतालों की इमरजेंसी व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
सौरभ भारद्वाज ने सरकार से पूछे सवाल
इस मामले को लेकर आम आदमी पार्टी नेता सौरभ भारद्वाज ने दिल्ली सरकार की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से यह दावा किया जाता रहा है कि आपातकालीन स्थिति में कागजी कार्रवाई बाद में और मरीज का इलाज पहले किया जाता है। ऐसे में सवाल यह है कि LNJP अस्पताल में कथित तौर पर इसका पालन क्यों नहीं हुआ। भारद्वाज ने गंभीर रूप से घायल मरीज को समय पर इलाज मिलना उसका अधिकार बताया और पूछा कि क्या दिल्ली की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में इमरजेंसी मरीजों के साथ इस तरह का व्यवहार स्वीकार्य है।
सरकारी दावों और जमीनी हकीकत पर बहस
इस मामले ने सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के दावों और अस्पतालों की जमीनी व्यवस्था के बीच अंतर को लेकर बहस तेज कर दी है। आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था में घायल व्यक्ति को प्राथमिकता के आधार पर उपचार देना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। खासकर सड़क हादसों में गंभीर रक्तस्राव, फ्रैक्चर और अन्य चोटों के मामलों में समय पर प्राथमिक उपचार मरीज की स्थिति को और बिगड़ने से रोकने में अहम भूमिका निभा सकता है। ऐसे में यदि किसी गंभीर मरीज को उपचार के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा हो, तो इसकी जांच की मांग उठना स्वाभाविक है।
सोशल मीडिया पर सामने आया व्यक्तिगत अनुभव
पत्रकार निधि तिवारी ने अपने अनुभव के साथ अस्पताल में हुई कथित घटना से संबंधित तस्वीरें भी साझा की हैं। इन तस्वीरों और उनके विवरण के जरिए उन्होंने LNJP की इमरजेंसी में इलाज की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उनका अनुभव अब दिल्ली की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि, किसी भी आरोप की अंतिम पुष्टि के लिए अस्पताल प्रशासन का पक्ष, मेडिकल रिकॉर्ड और घटना से जुड़े अन्य तथ्यों की स्वतंत्र जांच जरूरी होगी।
गंभीर मरीजों के अधिकार पर उठे सवाल
यह मामला केवल एक पत्रकार के इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि गंभीर स्थिति में अस्पताल पहुंचने वाले प्रत्येक मरीज के अधिकारों से जुड़ा सवाल भी उठाता है। इमरजेंसी में पहुंचने वाले मरीज को समय पर प्राथमिक उपचार, उचित चिकित्सा जांच और आवश्यक उपचार मिलना स्वास्थ्य व्यवस्था की मूल जिम्मेदारी है। यदि कागजी औपचारिकताओं के कारण उपचार में देरी हुई है, तो यह व्यवस्था की गंभीर खामी मानी जाएगी। वहीं, यदि अस्पताल प्रशासन के पास देरी का कोई चिकित्सकीय या प्रशासनिक कारण था, तो उसे भी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया जाना चाहिए।
जांच और जवाबदेही की मांग
LNJP अस्पताल से जुड़े इस मामले में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि पत्रकार को कथित तौर पर समय पर उपचार क्यों नहीं मिला और इमरजेंसी में उपचार शुरू करने में देरी के पीछे क्या कारण था। साथ ही, अस्पताल कर्मचारियों के कथित व्यवहार की भी जांच की जरूरत है। सौरभ भारद्वाज द्वारा उठाए गए सवालों के बाद दिल्ली की स्वास्थ्य व्यवस्था पर राजनीतिक बहस और तेज हो सकती है। फिलहाल इस मामले में अस्पताल प्रशासन या दिल्ली सरकार की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है। यदि आरोपों की जांच होती है तो मेडिकल रिकॉर्ड, इमरजेंसी प्रोटोकॉल और ड्यूटी पर मौजूद कर्मचारियों के बयान के आधार पर स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
इमरजेंसी सेवा को लेकर जवाबदेही जरूरी
LNJP अस्पताल में पत्रकार निधि तिवारी के कथित अनुभव ने दिल्ली की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में इमरजेंसी सेवाओं की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। एक ओर सरकार की ओर से गंभीर मरीजों को प्राथमिकता देने की बात कही जाती है, वहीं दूसरी ओर सामने आए इस व्यक्तिगत अनुभव में इलाज में देरी और कथित दुर्व्यवहार के आरोप लगाए गए हैं। ऐसे मामलों में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर निष्पक्ष जांच और जवाबदेही जरूरी है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सड़क हादसे या किसी अन्य गंभीर आपात स्थिति में मरीज को बिना अनावश्यक देरी के आवश्यक चिकित्सा सहायता मिल सके।