“क्या आप जानते हैं शनिवार को तेल क्यों नहीं खरीदना चाहिए? जानें इसके पीछे के धार्मिक और ज्योतिषीय कारण। साथ ही पढ़ें शनिवार को क्या करना शुभ होता है और किन कार्यों से बचना चाहिए, ताकि शनिदेव की कृपा बनी रहे।”
भारतीय संस्कृति में वार (दिनों) का संबंध किसी न किसी ग्रह और देवता से होता है। शनिवार का दिन न्याय के देवता शनिदेव को समर्पित है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कुछ विशेष वस्तुओं का संबंध शनिदेव से माना गया है, जिनमें तेल (विशेषकर सरसों का तेल) और लोहा प्रमुख हैं।
शनिवार को तेल न खरीदने के मुख्य कारण
1. ज्योतिषीय कारण (Astrological Reason)
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, तेल शनिदेव की प्रिय वस्तु है। शनिवार के दिन तेल का दान करना शुभ माना जाता है, लेकिन तेल खरीदकर घर लाना अशुभ माना जाता है। मान्यता है कि शनिवार को तेल खरीदने से घर में दरिद्रता आती है और ऋण (कर्ज) बढ़ता है। यह भी कहा जाता है कि इस दिन तेल खरीदने से शनिदेव रुष्ट हो जाते हैं, जिससे कार्यों में बाधाएं आने लगती हैं।
2. पौराणिक कथा (Mythological Legend)
पौराणिक कथाओं के अनुसार, रावण ने शनिदेव को बंदी बना लिया था। जब हनुमान जी लंका पहुंचे, तो उन्होंने शनिदेव को मुक्त कराया। युद्ध के दौरान शनिदेव के शरीर पर काफी चोटें आई थीं। तब हनुमान जी ने उनके घावों पर तेल लगाया था, जिससे शनिदेव को बहुत आराम मिला। तभी से शनिदेव को तेल अत्यंत प्रिय है। शनिवार को तेल चढ़ाने या दान करने का महत्व है, लेकिन इसे खरीदने को संघर्ष का प्रतीक माना जाता है।
3. दान और अर्पण का महत्व
शनिवार का दिन ‘त्याग’ और ‘सेवा’ का दिन माना जाता है। इस दिन तेल घर लाने के बजाय, उसे मंदिर में चढ़ाना या किसी जरूरतमंद को दान करना अधिक फलदायी होता है। ज्योतिषियों का मानना है कि जो वस्तु दान की जानी चाहिए, उसे उसी दिन खरीदना अपने लिए दोष मोल लेने जैसा है