बॉलीवुड में आउटसाइडर के तौर पर कृति सनोन का संघर्ष: “बिना साबित किए मौके मिलना गलत है”

बॉलीवुड में आउटसाइडर के तौर पर कृति सनोन का संघर्ष: "बिना साबित किए मौके मिलना गलत है"

 

कृति सनोन ने बॉलीवुड में अपने सफर, नेपोटिज्म और संघर्ष पर खुलकर बात की। जानिए उन्होंने बिना योग्यता के बार-बार अवसर मिलने वाले कलाकारों पर क्या कहा।

 

मेहनत का मौका सबको मिले, लेकिन योग्यता को अनदेखा न किया जाए” बॉलीवुड में आउटसाइडर के तौर पर कृति सनोन का संघर्ष: “बॉलीवुड में सफलता की सीढ़ियां चढ़ना किसी भी नए कलाकार के लिए आसान नहीं होता, खासकर जब आपके पास फिल्म इंडस्ट्री की कोई पृष्ठभूमि नहीं है। कृति सनोन ने हाल ही में एक साक्षात्कार में बॉलीवुड में अपने सफर, संघर्ष और ‘नेपोटिज्म’ (Nepotism) जैसे गंभीर मुद्दों पर खुलकर बात की है। कृति की यह यात्रा केवल सफलता की कहानी नहीं है; यह हर “आउटसाइडर” (बाहरी व्यक्ति) को सामना करने वाली चुनौतियों का भी चित्रण है।

योग्यता और मौका: कृति की स्पष्ट दृष्टि

कृति सनोन ने कहा कि बॉलीवुड में मौका पाना अक्सर मुश्किल होता है। ‘फिल्मफेयर’ से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि कई बार आप एक भूमिका के लिए चुने जाते हैं, लेकिन अंततः वह भूमिका किसी और को मिल जाती है। कृति ने नेपोटिज्म को बहुत स्पष्ट रूप से समझाया। उन्हें लगता है कि यह सिर्फ “स्टार किड्स” नहीं है, बल्कि “योग्यता” (गुण) का मुद्दा है।

“रणबीर कपूर और आलिया भट्ट जैसे कई कलाकार फिल्म पृष्ठभूमि से हैं, लेकिन उन्होंने खुद को बार-बार साबित किया है”, कृति ने कहा। वे बहुत प्रतिभाशाली हैं और अपनी मेहनत से सफल हुए हैं।कृति के अनुसार, 8 से 9 वर्षों तक निरंतर मौके मिलते रहने से समस्या होती है। “एक आउटसाइडर के तौर पर यदि आप शुरुआती कुछ वर्षों में खुद को साबित नहीं करते हैं, तो आपको तुरंत दरकिनार कर दिया जाता है,” उन्होंने कहा। यह असमानता सबसे अधिक अखरती है।”

आत्मविश्वास और निराशा: संघर्ष के पहले दिन

कृति सनोन की यात्रा तुरंत सफल नहीं होती है। उन्हें मानना पड़ा कि उनकी यात्रा में कई बार उन्हें खुद पर संदेह होने लगा था। उन्हें मिलने वाले अवसरों के लिए लंबे समय इंतजार करना पड़ा। कृति ने बताया कि यात्रा ‘सीधे शीर्ष पर पहुंचने’ की जगह ‘धीरे-धीरे आगे बढ़ने’ की तरह थी। उन्हें उतार-चढ़ाव नजदीक से देखा गया है।

उन्होंने अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए कहा, “मेरा पहला फोटोशूट एक आपदा था।” मेरा पहला रैंप वॉक भी बहुत बुरा रहा। दोनों बार मैं घर आकर बहुत रोया था। लेकिन उस विफलता के बाद भी मैं फिर से एक ऑडिशन, फिर से एक शूट और फिर से एक अवसर के लिए गया। यही जिद मुझे यहां तक लाया है।कृति का मानना है कि उन्हें आज बॉलीवुड की एक स्थापित अभिनेत्री बनाने में उनकी सीखने की ललक और हार न मानने का जज्बा महत्वपूर्ण हैं।

“मिमी” का इंतजार और सही समय

कृति के करियर का टर्निंग पॉइंट फिल्म ‘मिमी’ था। उन्हें बताया गया कि वे लंबे समय से इस तरह का किरदार चाहते थे, लेकिन यह फिल्म उन्हें इंडस्ट्री में सात साल रहने के बाद मिली। कृति का मानना है कि सभी घटनाएं समय पर होती हैं। “मेरा मानना है कि भगवान की योजना हमसे बेहतर होती है,” उन्होंने कहा। मैं उस तरह का किरदार निभाने और उसे बेहतरीन तरीके से प्रस्तुत करने के लिए पूरी तरह तैयार था जब मैं “मिमी” से मिली। यह फिल्म मुझे पहले मिल गई होती तो शायद इसका असर नहीं होता था जैसा मैंने बाद में देखा।”

मैं अब खुद को आउटसाइडर नहीं समझती।

लंबे संघर्ष के बाद, आज कृति सनोन को इंडस्ट्री को लेकर कोई शिकायत नहीं है। “नहीं, अब मैं खुद को बिल्कुल भी आउटसाइडर नहीं मानती,” उन्होंने कहा। इस व्यवसाय ने मुझे बहुत कुछ दिया है। मैं खुद को बहुत भाग्यशाली मानता हूँ कि मुझे इतने सारे अवसर मिले बिना किसी फिल्मी नाम या बैकिंग के।”

कृति ने उन पर भरोसा करने वालों और उनकी प्रतिभा को पहचानने वालों का आभार व्यक्त किया। पीछे मुड़कर देखने पर, वे बेहतर कलाकार बनाने वाले अनुभवों को भी देखते हैं। कृति सनोन का यह सफर दिखाता है कि बॉलीवुड में सफलता की कोई सीमा नहीं है अगर आप अत्यधिक मेहनत और सीखने की इच्छाशक्ति रखते हैं। वे अब एक ऐसी अभिनेत्री हैं जिन्होंने अपने काम से सिद्ध कर दिया है कि व्यवसाय में सबसे बड़ा नाम ‘योग्यता’ है।

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