केरल हाईकोर्ट ने कहा कि भारतीय नागरिक से शादी करने मात्र से विदेशी नागरिक को भारत का वीजा पाने का अधिकार नहीं मिलता। अदालत ने पाकिस्तानी महिला की याचिका खारिज कर दी।
केरल हाईकोर्ट ने पाकिस्तानी नागरिक से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई करते हुए विदेशी नागरिकों के भारत में प्रवेश और वीजा से संबंधित महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी विदेशी नागरिक को केवल इस आधार पर भारत का वीजा पाने का अधिकार नहीं मिल जाता कि उसने किसी भारतीय नागरिक से शादी की है। अदालत ने कहा कि भारत में किसी विदेशी नागरिक का प्रवेश, उसका रहना और देश से बाहर जाना केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है। राष्ट्रीय सुरक्षा, संप्रभुता, अखंडता और सार्वजनिक व्यवस्था जैसे पहलुओं को ध्यान में रखते हुए सरकार विदेशी नागरिकों के भारत आने-जाने को नियंत्रित कर सकती है।
दुबई में भारतीय नागरिक से हुई थी पाकिस्तानी महिला की शादी
मामला एक ऐसे दंपती से जुड़ा है, जिसमें महिला पाकिस्तानी नागरिक है और पुरुष भारतीय नागरिक है। दोनों ने दुबई में शादी की थी और फिलहाल विदेश में रह रहे हैं। पाकिस्तानी महिला एक पारिवारिक शादी में शामिल होने के लिए भारत आना चाहती थी। इसके लिए उसने भारतीय वीजा हासिल करने की कोशिश की, लेकिन उसे वीजा आवेदन जमा करने की प्रक्रिया उपलब्ध नहीं हो सकी। इसके बाद दंपती ने केरल हाईकोर्ट का रुख किया।
याचिका में दंपती की ओर से अदालत के सामने यह दलील दी गई कि महिला को भारत आने के लिए वीजा आवेदन करने का अवसर नहीं दिया जा रहा है। उनका कहना था कि महिला की शादी भारतीय नागरिक से हुई है और इसलिए उसे भारत आने तथा अपने पति के साथ रहने के लिए वीजा प्रक्रिया में शामिल होने का अवसर मिलना चाहिए।
भारतीय नागरिक की पत्नी होने के आधार पर मांगा लंबी अवधि का वीजा
याचिकाकर्ताओं ने अदालत के समक्ष संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का भी हवाला दिया। उनका तर्क था कि वीजा के लिए आवेदन करने का अवसर नहीं दिया जाना उनके अधिकारों का उल्लंघन है। शुरुआत में महिला का उद्देश्य एक शादी में शामिल होने के लिए भारत आना था, लेकिन याचिका में यह भी कहा गया कि भारतीय नागरिक की पत्नी होने के कारण उसे लंबे समय के वीजा की आवश्यकता होगी।
दंपती की ओर से अदालत से आग्रह किया गया कि महिला को कम से कम वीजा के लिए आवेदन करने की अनुमति दी जाए, ताकि संबंधित अधिकारी उसके आवेदन पर नियमों के अनुसार विचार कर सकें।
केंद्र सरकार ने किया याचिका का विरोध
केंद्र सरकार ने दंपती की याचिका का विरोध किया। सरकार की ओर से कहा गया कि किसी विदेशी नागरिक को भारत में प्रवेश करने या यहां रहने का स्वतः अधिकार प्राप्त नहीं होता। किसी विदेशी नागरिक का भारत आना और रहना संबंधित कानूनों तथा केंद्र सरकार की नीतियों के अधीन होता है।
केंद्र सरकार ने यह भी कहा कि भारत में प्रवेश के लिए वैध वीजा आवश्यक है और वीजा जारी करने का अधिकार सक्षम केंद्रीय प्राधिकरण के पास है। इसलिए किसी विदेशी नागरिक को केवल किसी भारतीय नागरिक से वैवाहिक संबंध होने के आधार पर भारत में प्रवेश का कानूनी अधिकार नहीं दिया जा सकता।
पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तानी नागरिकों के लिए रोकी गई थीं वीजा सेवाएं
अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद केंद्र सरकार की ओर से उठाए गए कदमों का भी उल्लेख किया। अदालत के अनुसार, सुरक्षा संबंधी चिंताओं के बीच केंद्र सरकार ने पाकिस्तानी नागरिकों के लिए वीजा सेवाओं को रोकने का आदेश जारी किया था।
फॉरेनर्स एक्ट, 1946 की धारा 3 के तहत जारी आदेश के अनुसार पाकिस्तानी नागरिकों के लिए वीजा सेवाएं बंद कर दी गई थीं। अदालत ने कहा कि जब तक संबंधित आदेश वापस नहीं लिया जाता, तब तक पाकिस्तानी नागरिकों के लिए वीजा प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जा सकती।
विदेशियों के प्रवेश पर नियंत्रण केंद्र का विशेष अधिकार
केरल हाईकोर्ट ने कहा कि विदेशियों के भारत में प्रवेश, उनके यहां रहने, घूमने-फिरने और देश से बाहर जाने को नियंत्रित करना केंद्र सरकार का विशेष संप्रभु अधिकार है। अदालत ने माना कि ऐसे मामलों में सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा, देश की संप्रभुता और अखंडता तथा सार्वजनिक व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं को ध्यान में रख सकती है।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी विदेशी नागरिक को भारत में प्रवेश करने या टूरिस्ट वीजा जारी करने का कोई जन्मजात अधिकार प्राप्त नहीं है। केवल इस वजह से कि किसी विदेशी महिला की शादी भारतीय नागरिक से हुई है, उसे भारत आने का स्वतः कानूनी अधिकार नहीं मिल जाता।
अनुच्छेद 14 और 21 की दलील पर अदालत की टिप्पणी
याचिकाकर्ताओं ने संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के तहत अधिकारों का हवाला दिया था। अदालत ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि अनुच्छेद 14 का संरक्षण गैर-नागरिकों तक भी लागू होता है, लेकिन भारत के बाहर मौजूद किसी विदेशी नागरिक के लिए इस आधार पर भारत में प्रवेश का अधिकार स्वतः पैदा नहीं होता।
अदालत ने इसी आधार पर दंपती की याचिका खारिज कर दी। इस फैसले के माध्यम से हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि भारतीय नागरिक से वैवाहिक संबंध होने के बावजूद विदेशी नागरिक के भारत में प्रवेश का मामला वीजा नियमों, केंद्र सरकार की नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों के अधीन रहेगा।