केरल में 4 अगस्त तक चिकनगुनिया के 105 पुष्ट और 62 संभावित मामले सामने आए। तिरुवनंतपुरम में सबसे ज्यादा केस, जानें लक्षण और बचाव के उपाय।
केरल में मानसून के बीच चिकनगुनिया संक्रमण के मामलों में एक बार फिर बढ़ोतरी दर्ज की गई है। स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, 4 अगस्त तक राज्य में चिकनगुनिया के 105 मामलों की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 62 अन्य मामलों को संभावित संक्रमण के रूप में दर्ज किया गया है। बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित जिलों में निगरानी बढ़ाने के साथ-साथ मच्छर नियंत्रण अभियान को भी तेज करने के निर्देश दिए हैं। खासतौर पर तिरुवनंतपुरम में संक्रमण के अधिक मामले सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर सावधानी बढ़ाई गई है।
तिरुवनंतपुरम में सबसे ज्यादा मामले
केरल में सामने आए कन्फर्म चिकनगुनिया संक्रमण के अधिकांश मामले तिरुवनंतपुरम से रिपोर्ट किए गए हैं। स्वास्थ्य अधिकारियों का मानना है कि मानसून के दौरान लगातार बारिश और उसके बीच गर्म मौसम ने मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल परिस्थितियां पैदा कर दी हैं। बारिश के बाद घरों और आसपास के इलाकों में जमा साफ पानी Aedes मच्छरों के प्रजनन का कारण बन सकता है।
Aedes मच्छर चिकनगुनिया के साथ-साथ डेंगू जैसे अन्य वायरल संक्रमणों को फैलाने के लिए भी जिम्मेदार होते हैं। इसलिए चिकनगुनिया के मामलों में वृद्धि को स्वास्थ्य विभाग केवल एक बीमारी तक सीमित चुनौती के रूप में नहीं देख रहा, बल्कि इसे व्यापक मच्छरजनित रोगों के जोखिम से जोड़कर निगरानी कर रहा है।
बारिश और गर्मी का मिला-जुला असर
स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक, केरल में इस समय तेज मानसूनी बारिश के बाद गर्म मौसम की स्थिति बन रही है। बारिश के कारण जगह-जगह पानी जमा होता है और उसके बाद तापमान बढ़ने पर मच्छरों के लिए प्रजनन की अनुकूल परिस्थितियां तैयार हो सकती हैं।
घर के आसपास रखे पुराने टायर, गमले, पानी की टंकियां, नारियल के खोल, प्लास्टिक के कंटेनर और अन्य ऐसी वस्तुएं जिनमें पानी जमा हो सकता है, Aedes मच्छरों के लिए संभावित प्रजनन स्थल बन सकती हैं। यही कारण है कि स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपने आसपास पानी जमा न होने देने की अपील की है।
चिकनगुनिया कैसे फैलता है?
चिकनगुनिया एक वायरल बीमारी है, जो संक्रमित Aedes मच्छर के काटने से फैलती है। ये मच्छर दिन के समय भी सक्रिय रह सकते हैं और संक्रमित व्यक्ति को काटने के बाद वायरस को दूसरे व्यक्ति तक पहुंचा सकते हैं।
चिकनगुनिया का संक्रमण एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक सामान्य संपर्क, हाथ मिलाने या साथ बैठने से नहीं फैलता। इसके प्रसार में संक्रमित मच्छर की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। इसलिए बीमारी के नियंत्रण के लिए मच्छरों की संख्या कम करना और उनके प्रजनन स्थलों को खत्म करना सबसे महत्वपूर्ण उपायों में शामिल है।
चिकनगुनिया के प्रमुख लक्षण
चिकनगुनिया के संक्रमण में अचानक तेज बुखार और जोड़ों में तेज दर्द प्रमुख लक्षणों में शामिल हैं। कई मरीजों में सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, थकान और त्वचा पर दाने भी दिखाई दे सकते हैं। कुछ मामलों में जोड़ों का दर्द लंबे समय तक बना रह सकता है और व्यक्ति की सामान्य गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं।
हालांकि चिकनगुनिया और डेंगू के कुछ लक्षण एक जैसे हो सकते हैं। इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर दोनों बीमारियों में अंतर करना हमेशा आसान नहीं होता। बुखार या अन्य लक्षण दिखाई देने पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है, खासकर ऐसे क्षेत्रों में जहां मच्छरजनित बीमारियों के मामले बढ़ रहे हों।
पिछले प्रकोपों से सबक लेने की जरूरत
केरल में चिकनगुनिया का खतरा नया नहीं है। राज्य में वर्ष 2006-07 के दौरान बड़े पैमाने पर चिकनगुनिया के प्रकोप देखे गए थे। इसके बाद 2019-20 में भी संक्रमण का एक प्रमुख प्रकोप सामने आया था।
पुराने प्रकोप इस बात की याद दिलाते हैं कि मानसून के दौरान मच्छरजनित बीमारियों के खिलाफ सतर्कता बनाए रखना जरूरी है। मौसम की परिस्थितियां अनुकूल होने पर संक्रमण तेजी से फैल सकता है, इसलिए शुरुआती स्तर पर निगरानी और नियंत्रण उपायों को मजबूत करना महत्वपूर्ण माना जाता है।
स्वास्थ्य विभाग ने बढ़ाई निगरानी
मामलों में बढ़ोतरी के बीच स्वास्थ्य अधिकारियों ने प्रभावित जिलों में सर्विलांस को मजबूत करने पर जोर दिया है। संदिग्ध मामलों की पहचान, बीमारी की निगरानी और मच्छर नियंत्रण गतिविधियों को तेज करने के साथ स्थानीय स्तर पर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है।
स्वास्थ्य कर्मचारियों द्वारा संभावित प्रजनन स्थलों की पहचान और उन्हें नष्ट करना, प्रभावित क्षेत्रों में सफाई अभियान चलाना तथा लोगों को मच्छरों से बचाव के उपायों के बारे में जानकारी देना संक्रमण की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
घरों में भी बरतें सावधानी
चिकनगुनिया से बचाव के लिए लोगों को घर और आसपास के इलाके में पानी जमा नहीं होने देना चाहिए। पानी के कंटेनरों को ढककर रखना, कूलर और अन्य उपकरणों में जमा पानी को नियमित रूप से बदलना तथा अनावश्यक पानी जमा करने वाली वस्तुओं को हटाना उपयोगी उपाय हैं।
दिन के समय मच्छरों के काटने से बचने के लिए पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनना और जरूरत के अनुसार मच्छररोधी उपायों का इस्तेमाल करना भी मददगार हो सकता है। बच्चों, बुजुर्गों और अन्य संवेदनशील लोगों के आसपास विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
मानसून में सतर्कता ही बचाव
केरल में चिकनगुनिया के नए मामलों में वृद्धि ने एक बार फिर मानसून के दौरान मच्छरजनित बीमारियों के प्रति सतर्क रहने की जरूरत को सामने ला दिया है। 4 अगस्त तक 105 पुष्ट और 62 संभावित मामलों की रिपोर्ट के बाद स्वास्थ्य विभाग की निगरानी बढ़ना महत्वपूर्ण कदम है।
विशेषज्ञों के अनुसार, मच्छरों के प्रजनन स्थलों को खत्म करना केवल सरकारी एजेंसियों की जिम्मेदारी नहीं है। घरों, स्कूलों, कार्यालयों और सार्वजनिक स्थानों पर पानी जमा न होने देना सामुदायिक स्तर पर बीमारी के प्रसार को रोकने में अहम भूमिका निभा सकता है। बुखार, तेज जोड़ों के दर्द या अन्य असामान्य लक्षणों को नजरअंदाज करने के बजाय समय पर चिकित्सकीय सलाह लेना भी जरूरी है। मानसून के दौरान थोड़ी सी सावधानी चिकनगुनिया और अन्य मच्छरजनित संक्रमणों के जोखिम को कम करने में मदद कर सकती है।