इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी के स्वाभिमानी रुख पर अरविंद केजरीवाल ने पीएम मोदी पर निशाना साधा। जानिए उन्होंने मेलोनी से क्या सीखने की सलाह दी।
अंतरराष्ट्रीय राजनीति में इन दिनों इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी का एक वीडियो और बयान चर्चा का केंद्र बना हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा मेलोनी पर की गई अपमानजनक टिप्पणी का उन्होंने जो करारा जवाब दिया है, वह अब भारत की राजनीति में भी गूंज रहा है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने मेलोनी के इस स्वाभिमानी रुख को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है।
क्या था पूरा मामला?
G7 शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक साक्षात्कार में दावा किया था कि इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने उनके साथ फोटो खिंचवाने के लिए ‘भीख’ मांगी थी और उन्होंने “दया” खाकर यह तस्वीर खिंचवाई। इस अपमानजनक दावे को मेलोनी ने सिरे से खारिज करते हुए एक वीडियो संदेश जारी किया। उन्होंने कहा, “ट्रंप के ये दावे पूरी तरह मनगढ़ंत हैं। यह शर्म की बात है कि वह अपने सहयोगियों के साथ ऐसा व्यवहार करते हैं। उन्हें एक बात हमेशा याद रखनी चाहिए: मैं और इटली कभी भीख नहीं मांगते।”
केजरीवाल का मोदी पर तंज
इस घटना का संदर्भ देते हुए अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधा है। केजरीवाल ने कहा, “माननीय प्रधानमंत्री जी, मेलोनी से कुछ सीखिए। देखिए उन्होंने ट्रंप को किस तरह जवाब दिया। वे उनके सामने ‘भीगी बिल्ली’ बनकर नहीं बैठीं। उन्होंने न केवल अपने देश के सम्मान की रक्षा की, बल्कि यह भी दिखाया कि एक स्वाभिमानी नेता को अंतरराष्ट्रीय मंच पर कैसे व्यवहार करना चाहिए।”
केजरीवाल ने आगे कहा कि देश की जनता यह देखना चाहती है कि हमारा नेतृत्व अंतरराष्ट्रीय मंच पर मजबूती से खड़ा रहे, न कि किसी के दबाव में झुक जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार विदेश नीति के मोर्चे पर देश की गरिमा को सही ढंग से नहीं रख पा रही है।
राजनीति में स्वाभिमान का मुद्दा
केजरीवाल का यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में कूटनीति और राष्ट्रीय स्वाभिमान को लेकर बहस तेज है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अरविंद केजरीवाल ने इस अंतरराष्ट्रीय घटना का इस्तेमाल पीएम मोदी की ‘नरम’ कूटनीति पर सवाल उठाने के लिए किया है। मेलोनी के इस रुख को दुनिया भर में ‘साहस’ के रूप में देखा जा रहा है, और अब यही ‘साहस’ भारत की घरेलू राजनीति में एक नए विवाद का विषय बन गया है।