सैन्य कार्रवाई में तीन भारतीयों की मौत पर पीएम मोदी की चुप्पी से खफा अरविंद केजरीवाल। जानिए उन्होंने क्यों कहा कि भारत को अब एक मजबूत प्रधानमंत्री की जरूरत है।
ओमान की खाड़ी में हुई एक सैन्य कार्रवाई के दौरान तीन भारतीय नाविकों की दुखद मौत का मुद्दा अब राजनीतिक तूल पकड़ चुका है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने इस घटना पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी और अमेरिकी नेतृत्व के प्रति उनके नरम रुख को लेकर तीखा हमला बोला है।
क्या है पूरा मामला?
India needs a strong PM… https://t.co/ptl7YMUth9
— Aam Aadmi Party Delhi (@AAPDelhi) June 20, 2026
हाल ही में एक वाणिज्यिक जहाज पर हुई सैन्य कार्रवाई के दौरान तीन भारतीय नाविकों की जान चली गई थी। इस घटना के बाद से ही देश के विभिन्न हलकों में आक्रोश है। विपक्ष का आरोप है कि इस गंभीर घटना के बाद भी प्रधानमंत्री मोदी ने न तो कोई सार्वजनिक बयान दिया और न ही अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं। इसके विपरीत, उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रशंसा करने का सिलसिला जारी रखा, जिससे सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठने लगे हैं।
केजरीवाल का हमला: ‘मोदी जी, मेलोनी से कुछ सीखिए’
अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया के माध्यम से प्रधानमंत्री मोदी को आड़े हाथों लेते हुए कहा, “तीन निर्दोष भारतीयों की मौत हुई, लेकिन मोदी जी उनकी प्रशंसा करने में व्यस्त हैं। एक मजबूत प्रधानमंत्री का काम होता है कि वह देश के नागरिकों के लिए खड़ा हो और ऐसी मौतों के लिए बिना किसी शर्त माफी की मांग करे, न कि प्रशंसा के फूल बरसाए।”
केजरीवाल ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी का उदाहरण देते हुए कटाक्ष किया। उन्होंने कहा, “मोदी जी, मेलोनी से कुछ सीखिए। देखिए उन्होंने कैसे अपने देश के स्वाभिमान के साथ अपनी बात रखी। वे विदेशी दबाव के आगे कभी नहीं झुकीं। भारत को आज एक ऐसे नेतृत्व की जरूरत है जो अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आंखें मिलाकर बात कर सके और विदेशी शक्तियों को यह बता सके कि भारतीय नागरिकों की जान की कीमत किसी भी कूटनीतिक समझौते से कहीं बढ़कर है।”
कूटनीति पर उठ रहे गंभीर सवाल
विपक्ष का यह आरोप है कि सरकार की ‘विश्वगुरु’ की छवि केवल कागजों और विज्ञापनों तक सीमित है। केजरीवाल ने सवाल उठाया कि क्या कूटनीतिक मजबूरियां इतनी बड़ी हैं कि तीन भारतीयों की जान जाने के बाद भी सरकार अपना मुंह नहीं खोल सकती? उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक देश में एक ऐसा नेतृत्व नहीं आता जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के स्वाभिमान को सर्वोपरि रखे, तब तक विदेश नीति के मोर्चे पर जवाबदेही तय करना असंभव होगा।
इस बयान के बाद देश की राजनीति में एक बार फिर विदेश नीति और राष्ट्रीय गौरव को लेकर बहस छिड़ गई है। केजरीवाल के इस बयान को प्रधानमंत्री की कूटनीति के खिलाफ एक बड़े राजनीतिक दांव के रूप में देखा जा रहा है, जिससे आने वाले समय में कूटनीतिक संबंधों और सरकार की छवि पर चर्चा और तेज होने की संभावना है।