दिल्ली हाईकोर्ट में अरविंद केजरीवाल का नया हलफनामा: जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा पर लगाए गंभीर सवाल, रिक्यूजल की मांग तेज

दिल्ली हाईकोर्ट में अरविंद केजरीवाल का नया हलफनामा: जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा पर लगाए गंभीर सवाल, रिक्यूजल की मांग तेज

अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली हाईकोर्ट में नया हलफनामा दाखिल कर जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा से रिक्यूजल की मांग की। जज के बच्चों और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से जुड़े आरोपों पर विवाद तेज।

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री एवं आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली हाईकोर्ट में एक नया हलफनामा दाखिल कर बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। यह हलफनामा शराब घोटाले से जुड़े मामले की सुनवाई कर रहीं जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की अदालत में प्रस्तुत किया गया है।

केजरीवाल ने अपने हलफनामे में न्यायाधीश से जुड़े कुछ तथ्यों का उल्लेख करते हुए सुनवाई से उन्हें अलग करने (रिक्यूजल) की मांग दोहराई है।

जज के बच्चों और वकील पर उठाए सवाल

हलफनामे में आरोप लगाया गया है कि जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा के दोनों बच्चे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के साथ काम करते हैं और उनके माध्यम से केस भी प्राप्त करते हैं। केजरीवाल ने यह भी दावा किया कि तुषार मेहता CBI की ओर से पेश होते हैं, जिससे उनके अनुसार निष्पक्ष सुनवाई पर सवाल उठता है।

पहले भी उठ चुका है रिक्यूजल का मुद्दा

इससे पहले भी केजरीवाल ने अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश होकर जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की पीठ से मामले को हटाने की मांग की थी। उन्होंने दलील दी थी कि न्याय न केवल होना चाहिए बल्कि ऐसा दिखाई भी देना चाहिए कि निष्पक्षता बनी हुई है।

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अदालत में तीखी बहस

सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के बीच लंबी और तीखी बहस हुई। अदालत ने इस रिक्यूजल याचिका पर अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया है। जस्टिस ने टिप्पणी की कि इस मामले की सुनवाई के दौरान न्यायिक क्षेत्राधिकार से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा हुई।

केजरीवाल के आरोप

केजरीवाल ने अदालत में कहा कि उन्हें इस बात की आशंका है कि मामला निष्पक्ष रूप से नहीं सुना जाएगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि न्यायाधीश द्वारा सीबीआई और ईडी के तर्कों को अधिक स्वीकार किया जाता है, जिससे पक्षपात की आशंका बढ़ती है।

उन्होंने लगभग 10 आधारों का हवाला देते हुए पीठ से रिक्यूजल की मांग की, जिनमें न्यायाधीश की कुछ गतिविधियों और पूर्व भागीदारी का भी उल्लेख किया गया है। यह मामला अब अदालत के अगले फैसले पर निर्भर है, जिस पर पूरे राजनीतिक और कानूनी हलकों की नजर बनी हुई है।

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