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साल 2026 में कांवड़ यात्रा कब शुरू हो रही है? जानें सावन शिवरात्रि की तिथि, हरिद्वार कांवड़ मेला रूट और शिव भक्तों के लिए जरूरी नियम।
हिंदू धर्म में सावन के महीने का विशेष महत्व है, और इस महीने की सबसे बड़ी विशेषता है— कांवड़ यात्रा। हर साल लाखों शिव भक्त (कांवड़िये) हरिद्वार, गौमुख और सुल्तानगंज जैसे पवित्र स्थानों से गंगाजल भरकर पैदल यात्रा करते हैं और अपने आराध्य भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं। साल 2026 में कांवड़ यात्रा को लेकर भक्तों में अभी से भारी उत्साह है।
कब शुरू होगी कांवड़ यात्रा 2026?
पंचांग के अनुसार, कांवड़ यात्रा सावन मास के शुरू होने के साथ ही प्रारंभ हो जाती है। वर्ष 2026 में सावन का महीना जुलाई के महीने में शुरू हो रहा है।
- सावन प्रारंभ तिथि: जुलाई 2026 (प्रतिपदा तिथि के अनुसार)।
- कांवड़ यात्रा की शुरुआत: यात्रा सावन के पहले दिन से ही औपचारिक रूप से शुरू हो जाएगी।
- मुख्य जलाभिषेक (शिवरात्रि): सावन शिवरात्रि के दिन भक्त गंगाजल अर्पित करते हैं।
(नोट: सटीक तिथियां चंद्र गणना के आधार पर सावन शुरू होने से कुछ दिन पहले प्रशासन द्वारा आधिकारिक रूप से घोषित की जाती हैं।)
कांवड़ यात्रा का महत्व
मान्यता है कि सावन के महीने में भगवान शिव पृथ्वी पर निवास करते हैं। पौराणिक कथा के अनुसार, जब समुद्र मंथन के दौरान विष निकला था, तब भगवान शिव ने उसे अपने कंठ में धारण किया था। विष की तपन को शांत करने के लिए देवताओं ने उन पर पवित्र नदियों का जल अर्पित किया था। तभी से शिवजी को जल अर्पित करने की परंपरा शुरू हुई। माना जाता है कि जो भक्त पैदल चलकर गंगाजल लाते हैं, उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
कांवड़ यात्रा के प्रकार
कांवड़ यात्रा केवल एक तरह की नहीं होती, भक्त अपनी श्रद्धा और शक्ति के अनुसार अलग-अलग रूप में यात्रा करते हैं:
- सामान्य कांवड़: इसमें भक्त रास्ते में विश्राम करते हुए आराम से चलते हैं।
- डाक कांवड़: यह सबसे कठिन मानी जाती है। इसमें जल भरने के बाद भक्त को बिना रुके मंदिर तक दौड़ते हुए जाना होता है।
- खड़ी कांवड़: इस यात्रा में कांवड़ को जमीन पर नहीं रखा जाता। यदि भक्त को आराम करना हो, तो दूसरा भक्त कांवड़ को अपने कंधे पर थामे रखता है।
प्रशासन की तैयारियां और सुरक्षा
कांवड़ यात्रा के दौरान उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली और हरियाणा की सड़कों पर ‘केसरिया सैलाब’ उमड़ पड़ता है। 2026 की यात्रा को सुगम बनाने के लिए प्रशासन ने व्यापक योजना बनाई है:
- रूट डायवर्जन: दिल्ली-हरिद्वार नेशनल हाईवे पर भारी वाहनों का प्रवेश वर्जित रहेगा ताकि कांवड़ियों को रास्ता मिल सके।
- स्वास्थ्य शिविर: जगह-जगह चिकित्सा शिविर और ‘कांवड़ सेवा शिविर’ लगाए जाएंगे जहाँ भक्तों के रहने और खाने की व्यवस्था होगी।
- ड्रोन निगरानी: भीड़ को नियंत्रित करने और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सीसीटीवी और ड्रोन कैमरों का उपयोग किया जाएगा।
भक्तों के लिए जरूरी नियम और सावधानियां
- कांवड़ यात्रा एक कठिन साधना है, इसलिए भक्तों को कुछ नियमों का पालन करना अनिवार्य है:
- यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार के नशीले पदार्थ या मांस-मदिरा का सेवन वर्जित है।
- कांवड़ को कभी भी सिर के ऊपर नहीं रखा जाता और न ही उसे जमीन पर छुआया जाता है।
- धार्मिक स्वच्छता का पूरा ध्यान रखना होता है।