भारत भाग्य विधाता’ के प्रमोशन के दौरान कंगना रनौत दिखीं बेहद खूबसूरत। जोधपुर में पाटन पटोला साड़ी में नजर आईं अभिनेत्री, जानें क्या है इस साड़ी की खासियत।
बॉलीवुड की ‘क्वीन’ कंगना रनौत अपनी हालिया फिल्म ‘इमरजेंसी’ (2025) में इंदिरा गांधी के रूप में दर्शकों का दिल जीतने के बाद अब एक बार फिर बड़े पर्दे पर वापसी कर रही हैं। उनकी नई फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ (Bharat Bhhagya Viddhaata) 12 जून 2026 यानी आज रिलीज हो रही है। अपनी इस फिल्म के प्रमोशन के लिए कंगना इन दिनों देश के विभिन्न शहरों का दौरा कर रही हैं और हर जगह उनके लुक की चर्चा हो रही है। दिल्ली में पैठणी साड़ी के बाद, जोधपुर के अपने पड़ाव पर कंगना ने गुजरात की पारंपरिक ‘पाटन पटोला’ (Patan Patola) साड़ी पहनकर भारतीय हस्तशिल्प के प्रति अपने प्रेम को दर्शाया।
पाटन पटोला: परंपरा और वैभव का संगम
जोधपुर में कंगना रनौत ने ‘फ्रंटियर रास’ (Frontier Raas) ब्रांड की एक शानदार सफेद और लाल पाटन पटोला साड़ी पहनी थी। इस साड़ी की कीमत 55,000 से लेकर 2,58,000 रुपये के बीच बताई जा रही है। सफेद बेस पर लाल रंग के सुंदर डिजाइन समृद्धि, सौभाग्य और खुशहाली का प्रतीक माने जाते हैं। कंगना ने इसे पारंपरिक गुजराती अंदाज में ‘सीधा पल्लू’ (Sidha Pallu) ड्रैप के साथ पहना था। जहाँ सामान्य ‘नीवी’ स्टाइल में पल्लू बाएं कंधे से पीछे की तरफ गिरता है, वहीं ‘सीधा पल्लू’ में इसे पीछे से लाकर दाहिने कंधे पर रखा जाता है और छाती पर फैलाया जाता है। यह शैली साड़ी की पूरी कारीगरी को सामने से निखारने का काम करती है।
एक्सेसरीज और मेकअप का तालमेल
अपने लुक को पूरा करने के लिए, 40 वर्षीय अभिनेत्री ने बालों का एक स्लीक बन (Slicked-back bun) बनाया और उसमें मोगरे के फूलों की गजरा लगाया, जो उन्हें एक क्लासिक भारतीय लुक दे रहा था। एक्सेसरीज की बात करें तो, उन्होंने ‘अमरापाली ज्वैलर्स’ का एक चोकर नेकलेस, ऑक्सीडाइज्ड झुमके और एक कड़ा पहना था। उनका मेकअप काफी मिनिमल और फ्रेश था। हल्के लाल रंग की लिपस्टिक, थोड़ा सा ब्लश और माथे पर एक छोटी सी काली बिंदी ने उनके पूरे लुक को बेहद प्रभावशाली और संयमित बना दिया था।
क्या है पाटन पटोला का इतिहास?
पाटन पटोला साड़ी की विरासत 700 साल से भी अधिक पुरानी है, जिसकी शुरुआत गुजरात के पाटन से हुई थी। इसे मूल रूप से ‘साल्वी’ समुदाय के बुनकरों द्वारा तैयार किया जाता था। ऐतिहासिक रूप से ये साड़ियाँ कुलीन वर्ग (aristocracy) के लिए आरक्षित थीं और इसे सामाजिक प्रतिष्ठा का प्रतीक माना जाता था। पाटन पटोला की सबसे बड़ी विशेषता इसकी ‘डबल इकत’ (Double Ikat) तकनीक है, जो इसे दोनों तरफ से एक जैसा बनाती है, जिससे इसकी वैल्यू और भी बढ़ जाती है। इन साड़ियों में फूलों, वनस्पतियों और जीवों के सुंदर सममित डिजाइन होते हैं, जिन्हें पूरी तरह से प्राकृतिक रंगों (natural dyes) से रंगा जाता है।
फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’: अनकही कहानियों का सम्मान
कंगना रनौत की नई फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’, जिसे मनोज टापड़िया ने लिखा और निर्देशित किया है, आज 12 जून को रिलीज हो रही है। यह फिल्म एक सच्ची घटना पर आधारित है। यह 26/11 मुंबई आतंकी हमलों के दौरान कामा अस्पताल (Cama Hospital) में तैनात उन गुमनाम स्वास्थ्यकर्मियों को श्रद्धांजलि देती है, जिन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर 400 से अधिक मरीजों की सुरक्षा की थी। इस फिल्म में कंगना एक नर्स की भूमिका निभा रही हैं, जो एक ऐसी स्वास्थ्यकर्मी को दर्शाती हैं, जिनके निस्वार्थ योगदान को अक्सर समाज में उतनी पहचान नहीं मिलती जितनी मिलनी चाहिए।
एक प्रभावशाली वापसी
कंगना रनौत का यह प्रमोशन दौर केवल फिल्म के प्रचार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की लुप्त होती कलाओं को नई पीढ़ी से जोड़ने का एक माध्यम भी बन गया है। उनकी पसंद की गई साड़ियाँ, चाहे वह पैठणी हो या पाटन पटोला, भारतीय कारीगरों की कुशलता को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करती हैं। ‘भारत भाग्य विधाता’ जैसी गंभीर और प्रेरणादायक फिल्म के प्रमोशन के लिए कंगना का यह पारंपरिक लुक फिल्म की गंभीरता को और बढ़ा देता है। आज जब फिल्म सिनेमाघरों में पहुँच रही है, प्रशंसक कंगना के अभिनय और इस महत्वपूर्ण कहानी को देखने के लिए बेहद उत्साहित हैं। यह फिल्म निश्चित रूप से उन अनसंग हीरोज को सम्मान देने का काम करेगी, जिन्होंने मानवता की रक्षा में अपनी भूमिका निभाई थी।