क्या आपके हाथ में भी महीनों से बंधा है कलावा? जानें इसे बदलने का सही समय और धार्मिक नियम।

क्या आपके हाथ में भी महीनों से बंधा है कलावा? जानें इसे बदलने का सही समय और धार्मिक नियम।

हाथ में बंधा पुराना और गंदा कलावा नकारात्मकता ला सकता है। जानें कलावा बदलने का सही दिन (मंगलवार/शनिवार), सही विधि और रक्षा सूत्र बांधने के वैज्ञानिक लाभ

हिंदू धर्म में कलावा या मौली बांधने की परंपरा सदियों पुरानी है। इसे केवल एक धागा नहीं, बल्कि ‘रक्षा सूत्र’ माना जाता है। अक्सर लोग एक बार कलावा बांधने के बाद उसे महीनों तक हाथ में बांधे रखते हैं, जो न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि स्वच्छता के लिहाज से भी ठीक नहीं है।

 

कलावा कब बदलना चाहिए?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कलावा को बहुत अधिक समय तक हाथ में नहीं रखना चाहिए। इसे बदलने के मुख्य संकेत और समय निम्नलिखित हैं:

  • रंग फीका पड़ने पर: जब कलावा का रंग (लाल या पीला) पूरी तरह फीका पड़ जाए या वह गंदा होकर काला दिखने लगे, तो उसे तुरंत बदल देना चाहिए। फीका पड़ा हुआ कलावा अपनी सकारात्मक ऊर्जा खो देता है।
  • धागा कमजोर होने पर: यदि कलावे के धागे टूटने लगें या वह घिस जाए, तो यह उसे बदलने का सही समय है।
  • शुभ दिन का चुनाव: कलावा बदलने के लिए मंगलवार और शनिवार के दिन सबसे श्रेष्ठ माने जाते हैं। इसके अलावा आप किसी भी शुभ पर्व, संक्रांति या पूर्णिमा पर भी इसे बदल सकते हैं।

कलावा बदलने के जरूरी नियम

कलावा उतारने और नया बांधने की एक निश्चित प्रक्रिया होती है, जिसका पालन करना चाहिए:

  • कैंची का प्रयोग न करें: पुराने कलावे को उतारते समय कभी भी कैंची या ब्लेड का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। इसे हाथों से ही खोलें या धीरे से सरका कर निकालें।

पुराने कलावे का क्या करें?

उतारे गए कलावे को इधर-उधर कचरे में न फेंकें। इसे या तो किसी बहते जल (नदी) में प्रवाहित कर दें या फिर किसी पीपल के पेड़ की जड़ के पास रख दें। यदि यह संभव न हो, तो इसे मिट्टी में दबा दें।

  • नया कलावा बांधने की विधि: नया कलावा बांधते समय अपना हाथ सिर पर रखें (या रुमाल रखें) और मुट्ठी बंद रखें।
  • मंत्र का जाप: कलावा बांधते समय इस प्रसिद्ध रक्षा मंत्र का उच्चारण करना चाहिए:

येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः।
तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे मा चल मा चल ॥

कितने लपेटे हैं जरूरी?

शास्त्रों के अनुसार, कलावा बांधते समय उसे हाथ पर तीन बार लपेटना सबसे शुभ माना जाता है। ये तीन लपेटे त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु और महेश) और तीन देवियों (लक्ष्मी, सरस्वती और पार्वती) का प्रतीक माने जाते हैं।

कलावा बांधने के लाभ

  • धार्मिक लाभ: मान्यता है कि कलावा बांधने से त्रिदेव और त्रिदेविओं की कृपा बनी रहती है और यह हर संकट से रक्षा करता है।
  • वैज्ञानिक लाभ: आयुर्वेद के अनुसार, कलावा कलाई की नसों पर दबाव बनाए रखता है, जिससे शरीर में वात, पित्त और कफ का संतुलन बना रहता है। यह रक्तचाप (Blood Pressure) और हृदय संबंधी समस्याओं में भी सहायक माना जाता है।

कलावा श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक है। इसे साफ-सुथरा रखना और समय पर बदलना आपके जीवन में सकारात्मकता और अनुशासन लाता है। अगर आपका कलावा भी पुराना हो गया है, तो आने वाले मंगलवार या शनिवार को इसे पूरे विधि-विधान से बदल लें।

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