केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल: लोकसभा से वापस लिया गया जन विश्वास (प्रावधान संशोधन) विधेयक, 2025, चयन समिति की सिफारिशों के लिए समीक्षा

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल: लोकसभा से वापस लिया गया जन विश्वास (प्रावधान संशोधन) विधेयक, 2025, चयन समिति की सिफारिशों के लिए समीक्षा

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने लोकसभा से जन विश्वास (प्रावधान संशोधन) विधेयक, 2025 को वापस लिया। इसका उद्देश्य चयन समिति की सिफारिशों के अनुसार संशोधन करना और व्यापार एवं जीवन सुगमता को बढ़ाना है।

केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को लोकसभा में जन विश्वास (प्रावधान संशोधन) विधेयक, 2025 को वापस लेने की घोषणा की। इसका उद्देश्य था कि चयन समिति द्वारा सुझाए गए कुछ और संशोधनों को विधेयक में शामिल किया जा सके।

विधेयक प्रारंभ में छोटे-मोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने और अधिनियमों में आवश्यक संशोधन करने के लिए पेश किया गया था। इससे जीवन यापन और व्यवसायिक गतिविधियों में सरलता लाई जा सके और भरोसा आधारित शासन को और मजबूत किया जा सके।

मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य न्यायिक बोझ को कम करना और नागरिकों व व्यवसायों को सुविधा प्रदान करना है। इसके तहत अदालतों में लंबी प्रक्रियाओं की बजाय समझौता विधि, न्यायनिर्णय और प्रशासनिक तंत्र के माध्यम से मामलों का निपटारा करना प्रस्तावित था। इससे लोगों को अनजाने में किए गए छोटे उल्लंघनों का समाधान आसानी से मिल सकेगा और समय, ऊर्जा और संसाधनों की बचत होगी।

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विधेयक के उद्देश्यों और कारणों में यह भी उल्लेख है कि लोकतांत्रिक शासन की नींव सरकार द्वारा अपने लोगों और संस्थानों पर भरोसा करने में निहित है। पुराने नियम और जटिल विनियम अक्सर भरोसे की कमी का कारण बनते हैं। सरकार का प्रयास है कि “न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन” के सिद्धांत के तहत जीवन और व्यापार की सुगमता सुधारों के माध्यम से नियामक ढांचे को सरल बनाया जाए।

यह विधेयक जन विश्वास (प्रावधान संशोधन) अधिनियम, 2023 के तहत शुरू किए गए नियामक सुधारों की निरंतरता है। 2025 के संशोधन का लक्ष्य छोटे-मोटे उल्लंघनों को अपराध की श्रेणी से बाहर करना, अनुपालन का बोझ कम करना, व्यापार सुगमता बढ़ाना और नागरिकों के जीवन को सरल बनाना था। इसमें पहली बार उल्लंघन करने पर चेतावनी और बाद के उल्लंघनों पर जुर्माने की सुव्यवस्थित प्रक्रिया प्रस्तावित की गई थी।

विधेयक में प्रस्तावित सुधार कृषि, औद्योगिक नियमों और अन्य कानूनों की एक विस्तृत श्रृंखला को प्रभावित करते हैं। इसका उद्देश्य अनावश्यक कानूनी बाधाओं को हटाकर पारदर्शी, पूर्वानुमानित और निष्पक्ष नियामक वातावरण सुनिश्चित करना है। इसके माध्यम से सरकार ने अधिक व्यवसाय-अनुकूल वातावरण और नागरिकों के लिए जीवन को सुगम बनाने की अपनी प्रतिबद्धता को रेखांकित किया है।

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