एस. जयशंकर का खाड़ी देशों का दौरा: ऊर्जा सुरक्षा और पश्चिम एशिया के हालातों पर भारत की बड़ी कूटनीति

एस. जयशंकर का खाड़ी देशों का दौरा: ऊर्जा सुरक्षा और पश्चिम एशिया के हालातों पर भारत की बड़ी कूटनीति

 

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कतर, कुवैत, बहरीन और ओमान का दौरा कर भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत किया। पश्चिम एशिया के घटनाक्रमों और द्विपक्षीय व्यापार पर हुई रणनीतिक चर्चा की पूरी रिपोर्ट।

 

भारतीय विदेश नीति में खाड़ी क्षेत्र (Gulf Region) हमेशा से एक बेहद महत्वपूर्ण और रणनीतिक स्तंभ रहा है। हाल ही में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने खाड़ी क्षेत्र के चार प्रमुख देशों—कतर, कुवैत, बहरीन और ओमान का एक अत्यंत महत्वपूर्ण आधिकारिक दौरा किया। इस यात्रा के दौरान न केवल भारत के इन देशों के साथ द्विपक्षीय संबंधों को एक नई ऊंचाई मिली, बल्कि वैश्विक उथल-पुथल के बीच भारत की ‘ऊर्जा सुरक्षा’ (Energy Security) को मजबूत करने और पश्चिम एशिया (West Asia) के घटनाक्रमों पर रणनीतिक तालमेल बिठाने पर भी गंभीर चर्चा हुई। विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान इस यात्रा के मुख्य बिंदुओं को रेखांकित किया।

ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक साझेदारी पर मुख्य ध्यान

विदेश मंत्रालय के अनुसार, विदेश मंत्री एस. जयशंकर की इन चारों देशों के शीर्ष नेतृत्व और अपने समकक्षों के साथ हुई व्यापक चर्चाओं में ‘ऊर्जा सुरक्षा’ सबसे महत्वपूर्ण एजेंडा बनकर उभरी। भारत अपनी कच्चे तेल (Crude Oil) और प्राकृतिक गैस (LNG) की जरूरतों के लिए एक बड़े हिस्से के रूप में खाड़ी देशों पर निर्भर है। ऐसे में वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों के बीच ऊर्जा आपूर्ति को निर्बाध बनाए रखना भारत की शीर्ष प्राथमिकता है। ऊर्जा के अलावा व्यापार और निवेश (Trade and Investment) को बढ़ावा देने पर भी विस्तृत बातचीत हुई, जिससे भारत में खाड़ी देशों के संप्रभु धन कोष (Sovereign Wealth Funds) के निवेश के नए रास्ते खुल सकें। इसके साथ ही, नेताओं ने पश्चिम एशिया में चल रहे हालिया घटनाक्रमों पर अपने-अपने दृष्टिकोण साझा किए।

कतर यात्रा: व्यापार, निवेश और कूटनीतिक मध्यस्थता की सराहना

कतर के दौरे के दौरान विदेश मंत्री जयशंकर ने वहां के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी से मुलाकात की। इस बैठक में ऊर्जा, व्यापार, निवेश और दोनों देशों के बीच मजबूत जन-केंद्रित संबंधों (People-to-People ties) सहित द्विपक्षीय संबंधों के पूरे स्पेक्ट्रम की समीक्षा की गई। इस वार्ता में एक महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब जयशंकर ने अमेरिका और ईरान के बीच चल रही वार्ताओं में कतर द्वारा निभाई जा रही सक्रिय और प्रमुख मध्यस्थता (Mediation) की भूमिका की सराहना की। इसके अलावा, उन्होंने वहां रह रहे भारतीय समुदाय के लोगों से बातचीत की और क्षेत्रीय संघर्षों के चुनौतीपूर्ण समय में उनकी जीवंतता की प्रशंसा की।

बहरीन दौरा: रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने की प्रतिबद्धता

विदेश मंत्री ने 6-7 जुलाई को बहरीन का दौरा किया, जहां उन्होंने राजा हमद बिन ईसा अल खलीफा और क्राउन प्रिंस व प्रधानमंत्री सलमान बिन हमद अल खलीफा की उपस्थिति में मुलाकात की। जयशंकर ने बहरीन के विदेश मंत्री डॉ. अब्दुललतीफ बिन राशिद अल जायनी के साथ भी द्विपक्षीय वार्ता की। दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया और रक्षा, सुरक्षा व व्यापार जैसे विविध क्षेत्रों में भारत-बहरीन सहयोग को और मजबूत करने के उपायों पर चर्चा की।

ओमान और कुवैत: साझेदारी की समीक्षा और भारतीय नाविकों की सुरक्षा

अपनी ओमान यात्रा के दौरान जयशंकर ने वहां के विदेश मंत्री सैय्यद बद्र अल्बुसैदी के साथ भारत-ओमान रणनीतिक साझेदारी (Strategic Partnership) की गहन समीक्षा की। इस बैठक में भारत ने हाल के क्षेत्रीय घटनाक्रमों के दौरान संकट में फंसे भारतीय नाविकों (Seafarers) को ओमान सरकार द्वारा त्वरित सहायता प्रदान करने के लिए विशेष आभार व्यक्त किया। वहीं कुवैत में भी विदेश मंत्री ने वहां के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात कर भारत-कुवैत संबंधों को नई दिशा दी। दोनों पक्षों ने आपसी हित के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर साझा रुख अपनाने पर सहमति जताई।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर का यह चार देशों का दौरा भारत की ‘लिंक वेस्ट’ (Link West) नीति की सफलता को दर्शाता है। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्षों और अस्थिरता के माहौल के बीच, भारत ने समय रहते अपने पारंपरिक भागीदारों के साथ ऊर्जा और आर्थिक सुरक्षा के मोर्चे पर खुद को सुरक्षित कर लिया है। यह यात्रा यह स्पष्ट करती है कि भारत केवल एक मूक दर्शक नहीं है, बल्कि खाड़ी क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सुरक्षा बनाए रखने में एक सक्रिय और जिम्मेदार वैश्विक भागीदार है।

 

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