भाजपा सांसद जगदंबिका पाल ने महिला आरक्षण बिल पर विपक्ष को घेरा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और सपा 2029 तक आरक्षण लागू करने के रास्ते में रोड़े अटका रहे हैं।
महिला आरक्षण से जुड़े संशोधन विधेयकों पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की वरिष्ठ सांसद जगदंबिका पाल ने विपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (सपा) और डीएमके (स्टालिन) पर दोहरा मानक लागू करने का आरोप लगाया है। उनका कहना था कि विपक्ष एक ओर समर्थन की बात करता है और दूसरी ओर प्रक्रिया को बाधित करता है।
2029 तक आरक्षण लागू करने की सरकार की घोषणा का बचाव करते हुए जगदंबिका पाल ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की सरकार महिलाओं को उनका हक देने के लिए प्रतिबद्ध है।
- महान कदम: सांसद ने कहा कि भारत में, जहां महिलाओं को देवियों की तरह पूजा जाता है, 33 प्रतिशत आरक्षण का बिल पारित होना ऐतिहासिक है।
संशोधन की आवश्यकता क्यों है?
उन्हें बताया कि ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’, जो 2023 में पारित हुआ था, परिसीमन और जनगणना के लिए स्पष्ट समय सीमा नहीं थी, इसलिए यह 2029 तक लागू नहीं हो पाता था। सरकार ने अब 2011 की जनगणना के आधार पर राज्यों को परिसीमन कराकर इसे 2029 के चुनावों में लागू किया जाएगा।
जगदंबिका पाल ने विपक्ष के पुराने विचारों पर प्रश्न उठाते हुए इतिहास का हवाला देते हुए कांग्रेस और उसके सहयोगियों पर हमला बोला:
कांग्रेस ने 2010 में भी राज्यसभा में महिला आरक्षण बिल लाया था। लेकिन उस समय सपा, राजद और अन्य दलों ने समर्थन वापस लेने की धमकी दी, जिससे कांग्रेस घबरा गई और लोकसभा में बिल को पारित नहीं कराया।”
“आरक्षण का विरोध, दरअसल परिसीमन का विरोध है।”
विपक्षी दलों द्वारा परिसीमन की प्रक्रिया पर उठाए जा रहे सवालों को बीजेपी सांसद ने “बहाना” बताया। उनका कहना था:
- दो चरित्र: विपक्षी कहते हैं कि वे परिसीमन के खिलाफ हैं लेकिन आरक्षण के पक्ष में हैं। वास्तव में, वे आज भी इस बिल को लागू नहीं करना चाहते।
- पारदर्शी: ताकि प्रक्रिया पारदर्शी और त्वरित रहे, 2011 की जनगणना के आधार पर राज्यों द्वारा ही परिसीमन किया जाएगा। इसके बावजूद विरोध करना कांग्रेस, यूपीए, सपा और स्टालिन के उद्देश्य को स्पष्ट नहीं करता।