भरूच के किसान स्वाभिमान सम्मेलन में इशुदान गढ़वी ने हाईटेंशन लाइनों के मुद्दे पर सरकार को घेरा। AAP ने किसानों के लिए 4 गुना मुआवजे और अन्य विकल्पों की मांग की।
गुजरात में खेतों के ऊपर से हाईटेंशन बिजली लाइनों को गुजारने और किसानों को मिलने वाले मुआवजे को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। भरूच में आयोजित ‘किसान स्वाभिमान’ सम्मेलन में AAP गुजरात प्रदेश अध्यक्ष इशुदान गढ़वी की मौजूदगी में किसानों के अधिकार और मुआवजे के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया गया। सम्मेलन में किसानों की जमीन से हाईटेंशन लाइनों के गुजरने, उचित मुआवजे और कंपनियों की भूमिका को लेकर सरकार पर सवाल खड़े किए गए।
इशुदान गढ़वी और AAP की ओर से आरोप लगाया गया कि कंपनियों के साथ मिलकर सरकार किसानों की सहमति के बिना उनके खेतों से हाईटेंशन बिजली लाइनें गुजार रही है। AAP ने सवाल उठाया कि सरकार किसानों के हित में काम कर रही है या कंपनियों के हित में। पार्टी ने किसानों को उनकी जमीन के इस्तेमाल के बदले उचित और न्यायसंगत मुआवजा देने की मांग की है।
भरूच में हुआ ‘किसान स्वाभिमान’ सम्मेलन
भरूच में आयोजित ‘किसान स्वाभिमान’ सम्मेलन में किसानों से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा हुई। AAP गुजरात प्रदेश अध्यक्ष इशुदान गढ़वी की विशेष मौजूदगी में आयोजित इस कार्यक्रम में हाईटेंशन लाइनों के कारण किसानों की जमीन और खेती पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर आवाज उठाई गई।
AAP नेताओं का कहना है कि बिजली परियोजनाओं के लिए किसानों की जमीन का इस्तेमाल किए जाने की स्थिति में किसानों के हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। पार्टी ने मांग की कि किसानों को उनकी जमीन और खेती पर पड़ने वाले असर के अनुरूप पर्याप्त मुआवजा दिया जाए।
सरकार किसानों की है या कंपनियों की? AAP का सवाल
આજે ભરૂચ ખાતે AAP ગુજરાત પ્રદેશ પ્રમુખ શ્રી @isudan_gadhvi ની વિશેષ ઉપસ્થિતિમાં “ખેડૂત સ્વાભિમાન” સંમેલન યોજાયું.
કંપનીઓ સાથે મળીને સરકાર ખેડૂતોની સહમતિ વગર ખેતરોમાંથી બેફામપણે હાઈટેન્શન લાઈનો પસાર કરી રહી છે. સરકાર ખેડૂતોની છે કે કંપનીઓની?
ખેડૂતોને યોગ્ય વળતર મળવું જ જોઈએ —… pic.twitter.com/mrqDhJ1eh4
— AAP Gujarat (@AAPGujarat) August 10, 2026
इशुदान गढ़वी की मौजूदगी में आयोजित सम्मेलन के दौरान AAP ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए पूछा कि सरकार किसानों के हित में काम कर रही है या कंपनियों के हित में। पार्टी का आरोप है कि हाईटेंशन लाइनें बिछाने की प्रक्रिया में किसानों की सहमति और उनके हितों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा है।
AAP का कहना है कि बिजली लाइनों के गुजरने से किसानों की जमीन के इस्तेमाल, खेती और भविष्य में जमीन के उपयोग पर असर पड़ सकता है। ऐसे में किसानों को केवल एक बार का मुआवजा देने के बजाय लंबे समय के प्रभाव को ध्यान में रखते हुए उचित आर्थिक व्यवस्था की जानी चाहिए।
बाजार कीमत का चार गुना मुआवजा देने की मांग
किसान स्वाभिमान सम्मेलन में AAP की ओर से मुआवजे को लेकर कई विकल्प सामने रखे गए। पार्टी ने मांग की कि किसानों को जमीन के बाजार मूल्य का चार गुना तक मुआवजा दिया जाना चाहिए।
इसके अलावा किसानों के लिए 25 वर्षों के आधार पर मुआवजा देने की मांग भी उठाई गई। AAP का कहना है कि हाईटेंशन लाइन के कारण किसानों की जमीन लंबे समय तक प्रभावित हो सकती है, इसलिए मुआवजे की व्यवस्था भी दीर्घकालिक होनी चाहिए।
पार्टी ने किसानों को मासिक किराया या परियोजना से होने वाले मुनाफे में हिस्सेदारी जैसे विकल्प देने की मांग भी की है। AAP के अनुसार, किसानों को इन विकल्पों में से अपनी सुविधा और सहमति के आधार पर विकल्प चुनने का अधिकार मिलना चाहिए।
‘वाजिब मुआवजे तक खेतों में प्रवेश नहीं’
सम्मेलन में AAP की ओर से कड़ा रुख अपनाते हुए कहा गया कि जब तक किसान मुआवजे को लेकर सहमत नहीं होते, तब तक कंपनियों या सरकार के प्रतिनिधियों को खेतों में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा।
AAP का कहना है कि किसानों की जमीन पर किसी भी परियोजना को आगे बढ़ाने से पहले उनके अधिकारों और मुआवजे के मुद्दे का समाधान किया जाना चाहिए। पार्टी ने किसानों से एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने की अपील की।
हालांकि, जमीन पर किसी परियोजना को रोकने या अधिकारियों को प्रवेश नहीं देने से जुड़े किसी भी कदम की वैधानिक स्थिति संबंधित कानूनों, प्रशासनिक आदेशों और परियोजना की प्रकृति पर निर्भर करेगी।
गुजरात के 23 जिलों में मुद्दा होने का दावा
AAP ने हाईटेंशन लाइनों का मुद्दा केवल भरूच तक सीमित नहीं बताया है। पार्टी के अनुसार, गुजरात के 23 जिलों में किसान हाईटेंशन लाइनों से जुड़े मुद्दों का सामना कर रहे हैं।
AAP का दावा है कि अलग-अलग जिलों में किसानों की जमीन से बिजली लाइनों को गुजारने को लेकर मुआवजे और जमीन के इस्तेमाल से जुड़े सवाल सामने आ रहे हैं। पार्टी अब इस मुद्दे को राज्यव्यापी स्तर पर उठाने की तैयारी में है।
किसानों को एकजुट करने की AAP की कोशिश
इशुदान गढ़वी की मौजूदगी में हुए इस सम्मेलन के जरिए AAP ने किसानों के मुद्दे को गुजरात की राजनीति में प्रमुखता से उठाने का संकेत दिया है। पार्टी का कहना है कि यह केवल भरूच के किसानों की लड़ाई नहीं है, बल्कि गुजरात के उन सभी किसानों का मुद्दा है जिनकी जमीन हाईटेंशन बिजली लाइनों या संबंधित परियोजनाओं से प्रभावित हो रही है।
AAP नेताओं ने कहा कि किसान अब एकजुट होकर अपने अधिकारों और उचित मुआवजे के लिए संघर्ष करेंगे। पार्टी की ओर से बाजार मूल्य के चार गुना मुआवजे, 25 साल के आधार पर भुगतान, मासिक किराये या परियोजना के मुनाफे में हिस्सेदारी जैसे विकल्पों को किसानों के सामने रखने की मांग की गई है।
मुआवजे और सहमति पर आगे बढ़ेगा विवाद
हाईटेंशन बिजली लाइनों को लेकर किसानों और परियोजना एजेंसियों के बीच मुआवजा और जमीन के इस्तेमाल का मुद्दा आने वाले दिनों में गुजरात में राजनीतिक बहस का बड़ा विषय बन सकता है। AAP ने इस मुद्दे को किसानों के सम्मान और अधिकारों से जोड़ते हुए राज्य सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति अपनाई है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि गुजरात सरकार और संबंधित कंपनियां AAP की मांगों पर क्या प्रतिक्रिया देती हैं। साथ ही, जिन जिलों में हाईटेंशन लाइन परियोजनाओं को लेकर विवाद है, वहां प्रशासन किसानों की शिकायतों और मुआवजे से जुड़े मामलों का किस तरह समाधान करता है। फिलहाल भरूच का ‘किसान स्वाभिमान’ सम्मेलन इस मुद्दे को राज्यव्यापी राजनीतिक आंदोलन में बदलने की AAP की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।