हरियाणा में इंतकाल मामलों पर सख्ती, पटवारी 5 दिन और कानूनगो-CRO 3 दिन में करेंगे निपटारा; सुमिता मिश्रा के निर्देश

हरियाणा में इंतकाल मामलों पर सख्ती, पटवारी 5 दिन और कानूनगो-CRO 3 दिन में करेंगे निपटारा; सुमिता मिश्रा के निर्देश

 

हरियाणा में इंतकाल यानी म्यूटेशन मामलों के निपटारे की समयसीमा तय हुई। पटवारी 5 दिन, कानूनगो और CRO 3 दिन में कार्रवाई करेंगे। ऑटो-म्यूटेशन के लिए मॉनिटरिंग सेल बनेगा।

हरियाणा में जमीन से जुड़े इंतकाल यानी म्यूटेशन मामलों के निपटारे को और तेज करने की दिशा में राजस्व विभाग ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब राजस्व अधिकारियों के लिए म्यूटेशन मामलों के निपटारे की स्पष्ट समयसीमा तय कर दी गई है। इसके तहत पटवारियों को इंतकाल के मामलों का निपटारा 5 दिनों के भीतर, जबकि कानूनगो और सर्कल रेवेन्यू ऑफिसर (CRO) को 3-3 दिनों के भीतर कार्रवाई पूरी करनी होगी।

यह निर्णय वित्तायुक्त, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में लिया गया। बैठक में राजस्व रिकॉर्ड से जुड़े मामलों, ऑटो-म्यूटेशन व्यवस्था और लंबित इंतकाल मामलों की स्थिति की समीक्षा की गई। विभाग का उद्देश्य लोगों को जमीन से जुड़े कार्यों के लिए अनावश्यक देरी और कार्यालयों के चक्कर से राहत देना है।

म्यूटेशन मामलों के लिए तय हुई समयसीमा

हरियाणा में भूमि रिकॉर्ड से जुड़े इंतकाल यानी म्यूटेशन की प्रक्रिया को समयबद्ध बनाने के लिए अधिकारियों की जिम्मेदारी निर्धारित की गई है। नई व्यवस्था के अनुसार पटवारी को किसी म्यूटेशन मामले पर अधिकतम 5 दिनों के भीतर अपनी कार्रवाई पूरी करनी होगी।

इसके बाद कानूनगो और संबंधित सर्कल रेवेन्यू ऑफिसर के स्तर पर मामले के निपटारे के लिए 3-3 दिनों की समयसीमा निर्धारित की गई है। इससे पूरी प्रक्रिया में जवाबदेही तय होने के साथ-साथ लंबित मामलों को तेजी से निपटाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

राजस्व विभाग की ओर से यह कदम खास तौर पर उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिन्हें जमीन की खरीद-बिक्री, विरासत या अन्य कारणों से भूमि रिकॉर्ड में स्वामित्व परिवर्तन दर्ज कराने के लिए इंतकाल की जरूरत होती है।

ऑटो-म्यूटेशन की होगी नियमित निगरानी

बैठक में ऑटो-म्यूटेशन सिस्टम की निगरानी को लेकर भी अहम फैसला लिया गया। इसके लिए एक समर्पित मॉनिटरिंग सेल गठित करने का निर्णय लिया गया है। यह सेल ऑटो-म्यूटेशन की प्रक्रिया की नियमित निगरानी करेगा और यह सुनिश्चित करने का प्रयास करेगा कि मामलों में अनावश्यक देरी न हो।

ऑटो-म्यूटेशन व्यवस्था का उद्देश्य पंजीकृत लेनदेन के बाद भूमि रिकॉर्ड में बदलाव की प्रक्रिया को अधिक स्वचालित और सरल बनाना है। इससे नागरिकों को अलग से इंतकाल की प्रक्रिया के लिए कार्यालयों में जाने की जरूरत कम हो सकती है।

5 लाख से ज्यादा म्यूटेशन मामलों का निपटारा

हरियाणा में भूमि रिकॉर्ड सुधारों के तहत अब तक 5 लाख से अधिक म्यूटेशन मामलों का निपटारा किया जा चुका है। विभाग द्वारा लंबित मामलों को कम करने और रिकॉर्ड अपडेट करने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है।

हालिया रिपोर्टों के अनुसार राज्य में तकनीक आधारित भूमि रिकॉर्ड सुधारों के जरिए लंबित म्यूटेशन मामलों में बड़ी कमी लाई गई है और ऑटो-म्यूटेशन व्यवस्था को राज्य स्तर पर लागू किया गया है।

लोगों को समय पर मिलेगी राजस्व सेवाएं

म्यूटेशन प्रक्रिया में देरी का सीधा असर जमीन मालिकों और अन्य संबंधित नागरिकों पर पड़ता है। भूमि रिकॉर्ड में नाम दर्ज होने, स्वामित्व संबंधी दस्तावेजों को अपडेट कराने और भविष्य के लेनदेन के लिए समय पर इंतकाल होना महत्वपूर्ण होता है।

ऐसे में पटवारी, कानूनगो और सर्कल रेवेन्यू ऑफिसर के स्तर पर अलग-अलग समयसीमा तय होने से प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद है। नागरिकों को यह स्पष्ट रहेगा कि उनका मामला किस स्तर पर है और संबंधित अधिकारी को कितने समय में कार्रवाई पूरी करनी है।

राजस्व विभाग में डिजिटल व्यवस्था पर जोर

हरियाणा सरकार और राजस्व विभाग की ओर से भूमि रिकॉर्ड से जुड़ी सेवाओं को डिजिटल और नागरिक-केंद्रित बनाने पर जोर दिया जा रहा है। ऑटो-म्यूटेशन के साथ-साथ डिजिटल रूप से प्रमाणित जमाबंदी और अन्य भूमि रिकॉर्ड सेवाओं को भी ऑनलाइन उपलब्ध कराने की दिशा में कदम उठाए गए हैं। हालिया व्यवस्था में प्रमाणित भूमि रिकॉर्ड दस्तावेजों को डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराने की सुविधा पर भी जोर दिया गया है।

विभाग का लक्ष्य भूमि रिकॉर्ड से जुड़ी प्रक्रियाओं को आसान, तेज और पारदर्शी बनाना है, ताकि लोगों को राजस्व कार्यालयों में अनावश्यक दौड़-धूप न करनी पड़े।

निगरानी व्यवस्था से बढ़ेगी जवाबदेही

समर्पित मॉनिटरिंग सेल के गठन से ऑटो-म्यूटेशन मामलों की स्थिति पर नियमित नजर रखी जा सकेगी। इससे लंबित मामलों की पहचान करने और संबंधित अधिकारियों के स्तर पर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

कुल मिलाकर, म्यूटेशन मामलों के लिए 5 दिन और 3 दिन की समयसीमा, ऑटो-म्यूटेशन की निगरानी के लिए समर्पित सेल और अब तक 5 लाख से अधिक मामलों के निपटारे को हरियाणा की राजस्व सेवाओं में गति और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

 

 

Related posts

हरियाणा में 17 सितंबर से शुरू होगा ‘सेवा संकल्प अभियान’, 17 अक्टूबर तक चलेगा; जमीनी स्तर तक पहुंचेंगी सरकारी योजनाएं

नायब सिंह सैनी ने Good Practices की समीक्षा की, कम पढ़े-लिखे युवाओं का सर्वे और पात्र महिलाओं को लाडली लक्ष्मी योजना का लाभ सुनिश्चित करने के निर्देश

करनाल के कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज का होगा विस्तार, ₹404.95 करोड़ का प्रस्ताव; 1100 बेड और 250 MBBS सीटें

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Read More